पंजाब के मानवाधिकारों संबंधी गम्भीर हों सरकारें
पंजाब में आगामी वर्ष के शुरू में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए राजनीतिक गतिविधियां तेज़ हो चुकी हैं। भिन्न-भिन्न पार्टियों द्वारा अपने-अपने संगठनों में नई नियुक्तियां करके अपनी-अपनी पार्टियों को चुनाव के दृष्टिगत मज़बूत करने का यत्न किया जा रहा है। दूसरी तरफ पंजाब के भिन्न-भिन्न वर्गों के लोग अपने-अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करते दिखाई दे रहे हैं।
किसान अमरीका-भारत सम्भावित मुक्त व्यापार द्वारा अमरीका के कृषि उत्पादों को भारत के बाज़ार उपलब्ध करवाने हेतु हो रही चर्चाओं से चिंता में हैं। इसलिए वे अमरीका-भारत मुक्त व्यापार समझौते का विरोध कर रहे हैं। इसके अतिरिक्त कृषि उपजों के न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी, पंजाब में भूमिगत पानी का गिर रहा स्तर, कृषि विभिन्नता और अपनी अन्य मांगों को लेकर भी वे आंदोलन कर रहे हैं। कर्मचारियों के भिन्न-भिन्न संगठन भी महंगाई भत्ते और अस्थायी कर्मचारियों को स्थायी करने की मांगें पूरी करवाने के लिए आंदोलन के मार्ग पर हैं। दूसरी तरफ कौमी इन्साफ मोर्चा जो विगत कई वर्ष से सज़ा पूरी कर चुके बंदी सिंहों की रिहाई और 2015 में श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की हुई बेअदबी के लिए ज़िम्मेदार लोगों को सज़ा देने आदि के मुद्दों को लेकर संघर्ष करता आ रहा है। उसकी ओर से अब भाई जगतार सिंह हवारा को उनकी माता के गम्भीर बीमार होने के कारण पैरोल देने का मुद्दा भी उठाया जा रहा है। उसकी ओर से आज (21 अगस्त) को कुछ घंटों के लिए पंजाब बंद का आह्वान भी किया गया है। पंजाब बंद के किए गए इस आह्वान को किसान संगठनों के अतिरिक्त कुछ राजनीतिक पार्टियों द्वारा भी समर्थन देने की घोषणा की गई है। लम्बी अवधि से पटियाला जेल में बंद भाई बलवंत सिंह राजोआणा की फांसी की सज़ा को उम्र कैद में बदलने की मांग को लेकर भी विगत लम्बी अवधि से शिरोमणि कमेटी सहित अन्य कई संगठन अपनी आवाज़ बुलंद करते आ रहे हैं। श्री गुरु नानक देव जी के 550वें प्रकाशोत्सव के अवसर पर बाकायदा केन्द्र सरकार द्वारा सज़ाएं पूरी कर चुके बंदी सिंहों को रिहा करने और भाई राजोआणा की फांसी की सज़ा को उम्र कैद में बदलने का वादा किया गया था, परन्तु केन्द्र सरकार ने अभी तक अपनी इस घोषणा पर अमल नहीं किया। वह विगत लम्बी अवधि से पटियाला की जेल में फांसी वाली चक्की में बंद हैं। दूसरी तरफ एक डेरा प्रमुख जो कई गम्भीर अपराधों में उम्र कैद की सज़ा काट रहा है और उस पर अभी और भी कई मामले चल रहे हैं, उसे वर्ष में कई-कई बार पैरोल दी जा रही है। मानवाधिकारों की रक्षा के लिए अपनी जान कुर्बान करने वाले जसवंत सिंह खालड़ा के हत्यारों को भी कानूनी चोर दरवाज़ों का लाभ उठा कर सरकारों की ओर से जेल से बाहर निकाल दिया गया है।
केन्द्र सरकार और पंजाब सरकार के उपरोक्त मांगों और मामलों संबंधी उदासीनता वाला रवैया धारण करने से पंजाब के लोगों में लगातार रोष बढ़ रहा है। जब वह अपना रोष प्रकट करने के लिए हरियाणा के मार्ग से दिल्ली तक पहुंचने का यत्न करते हैं, तो उन्हें हरियाणा पुलिस की ओर से हरियाणा की सीमा पर रोक दिया जाता है, जबकि उनकी मांगों से हरियाणा सरकार का कोई संबंध ही नहीं है। वैसे भी अपनी मांगों संबंधी देश की राष्ट्रीय राजधानी जाकर रोष प्रकट करने का पंजाबियों का संवैधानिक अधिकार है, जिसका हरियाणा सरकार और पुलिस घोर उल्लंघन कर रही हैं। यदि पंजाब के भिन्न-भिन्न संगठन अपनी मांगों और मामले लेकर प्रदेश की राजधानी चंडीगढ़ जाने का यत्न करते हैं तो भी उन्हें मोहाली-चंडीगढ़ की सीमा पर चंडीगढ़ पुलिस द्वारा रोक दिया जाता है। शायद ही कभी किसी केन्द्र सरकार ने और प्रदेश सरकार ने पंजाब के लोगों की मांगों के प्रति ऐसा कठोर रवैया धारण किया हो।
लोगों को केन्द्र और प्रदेश सरकार संबंधी गम्भीर शिकायते हैं, परन्तु उन्हें यह समझ नहीं आ रहा कि वे अपनी शिकायतें कहां रखें? मानवाधिकारों से संबंधित मांगों और मामलों संबंधी न्यायपालिका के रवैये के प्रति भी पंजाब के लोगों में बेचैनी बढ़ती जा रही है। लोग सरेआम कह रहे हैं कि सरकारें और न्यायपालिका के नियम तथा कायदे-कानून पंजाबियों के लिए और हैं और ़गैर-पंजाबियों के लिए और। हमारी उपरोक्त सरकारों को परामर्श है कि वे पंजाब के लोगों के मानवाधिकारों से जुड़े सरोकारों संबंधी गम्भीर हों और उन्हें न्याय देने के लिए शीघ्र-अतिशीघ्र ठोस पहलकदमी करें, नहीं तो लोगों में बढ़ रही यह बेचैनी अमन-कानून के बड़े मामले में बदल सकती है।

