अनावश्यक टकराव पैदा कर रही है भाजपा

भारतीय जनता पार्टी आज देश के ज्यादातर हिस्सों में प्रशासन चला रही है। संसद में कोई कानून पास करवाने के लिए उसको अधिक कठिनाई का सामना नहीं करना पड़ता, परन्तु कोई भी संवैधानिक संशोधन करने के लिए संसद में उसके लिए दो तिहाई बहुमत प्राप्त करना ज़रूरी है। इस समय उसके पास लोकसभा और राज्यसभा में इतना बहुमत मौजूद नहीं है, परन्तु वह लगातार इस लक्ष्य पर पहुंचने के लिए बड़ा ज़ोर लगा रही है और अपना हर हथकंडा अपनाने से भी संकोच नहीं कर रही। इसी सोच अधीन उसने देश की आज़ादी की लड़ाई के समय लोगों को प्रभावित करने वाले बंकिम चंद्र चटर्जी द्वारा लिखे गए गीत वंदे मातरम् को गाने संबंधी 90 वर्ष पहले बनी आम सहमति को रद्द करके अब एक नया विवाद खड़ा कर दिया है।
देश की आज़ादी से पहले वर्ष 1937 में महात्मा गांधी, सरदार पटेल, मौलाना अबुल कलाम आज़ाद और पंडित जवाहर लाल नेहरू पर आधारित बनी एक कमेटी ने आम सहमति से इस गीत की भावना का पूरा सम्मान करते हुए इसके पहले दो अंतरे को ही गाने का फैसला लिया था। वैसे तो इस गीत के छह अंतरे हैं, जिनमें से पहले दो अंतरों में भारत माता की स्तुति की गई है और पिछले चार भागों में देवी दुर्गा और सरस्वती का गुणगान किया गया है। उस समय इस पिछले चार अंतरों संबंधी मुस्लिम भाईचारे द्वारा एतराज़ किया गया था। उस समय देश की आज़ादी की लड़ाई लड़ते हुए एक आम सहमति बनाने के लिए इसके दो अंतरों को ही राष्ट्रीय गीत के रूप में स्वीकार किया गया था। इसके साथ ही जन-गन-मन को राष्ट्रीय गान के रूप में मान्यता दी गई थी। तब से ही कांग्रेस के सैशनों में और अन्य तरह के समारोह में राष्ट्रीय गान के साथ-साथ इस राष्ट्रीय गीत के दो अंतरों को ही गाया जाता रहा है। अब भाजपा तथा उसके पूर्वजों का देश की आज़ादी के संघर्ष में अधिक योगदान नहीं रहा था, अपितु उन्होंने उस समय भी अपने हिन्दुत्व के एजेंडे को ही अपनाए रखने में बेहतरी समझी थी, परन्तु अब जब देश में भाजपा का बोलबाला है तो इसने अपने राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के एजेंडों को पूरा करने के लिए अपना ज़ोर लगाया हुआ है। इसलिए संसद में अपनी स्थिति को देखते हुए इसने वंदे मातरम् गीत पूरा गाने के लिए कानून पारित करवा कर एक ऐसा अनावश्यक विवाद शुरू कर दिया है, जो अलग-अलग समुदायों में ऩफरत को और भड़काने का कारण बन सकता है। चाहे भाजपा कांग्रेस पर अपने वोट बैंक के लिए साम्प्रदायिक तुष्टिकरण की राजनीति करने का आरोप लगा रही है, परन्तु हम समझते हैं कि अपनी इन कार्रवाइयों से वह स्वयं देश में साम्प्रदायिक  भावनाओं को भड़का कर अपने लिए बहुसंख्यक हिन्दू वोट बैंक को साधने का यत्न कर रही है। इस देश में 24 करोड़ मुस्लिम समुदाय के लोग रहते हैं। भाजपा अपनी वोट राजनीति के दृष्टिगत इस समुदाय को बुरी तरह नज़रअंदाज़ करती हुए बहुसंख्यक हिन्दू समुदाय से संबंधित मतदाताओं को भावुक करके अपने पक्ष में कर रही है। 
हम समझते हैं कि यह आज़ादी के लिए चले साझे संघर्ष, जिसमें लोगों के विभिन्न वर्गों की शमूलियत  थी और इसके बाद अपनाए गए लोकतांत्रिक व धर्म -निरपेक्ष संविधान के साथ देश में ऐसा माहौल बना है, जिसके विपरीत जाकर किसी समुदाय या वर्ग द्वारा साम्प्रदायिक भावनाओं को अपनाकर आज भी देश के अधिकतर लोगों की स्वीकृति प्राप्त नहीं की जा सकती। इसके विपरीत हम भाजपा के केन्द्र सरकार की आर्थिक नीतियों तथा विकास की बहुत-सी योजनाओं की प्रशंसा भी करते रहे हैं। इसलिए हम उसे, अपनी नीतियों का आधार भारत की असली तस्वीर को सामने रख कर गरीबी तथा युवाओं की बेरोज़गारी दूर करने के लिए सफल योजनाएं बना कर देश को आधुनिक सोच के अनुसार विकास के मार्ग पर ले जाने की अपील करते हैं। नि:संदेह किसी भी तरह की साम्प्रदायिक भावनाओं का प्रसार आधुनिक विकास पर काले बादल छा जाने के समान होगा, जिस कारण देश की चमक धूमिल होती दिखाई देगी।

—बरजिन्दर सिंह हमदर्द 

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