बड़ा होने का घमंड
एक रोज बस्ते में बैठे सारे पुस्तक आपस में बड़ा होने की बात पर तू-तू-मैं-मैं करते बस्ते से बाहर आ गए और सब एक-दूसरे से झगड़ा और हाथापाई करने लगे।
यह देखकर बस्ता बोल पड़ा अरे वो पुस्तकों तुम सब आपस में क्यों लड़-झगड़ रहे हो? यह लड़ाई-झगड़ा बंद करो।
बस्ता भाई आज सारे पुस्तकों को बड़ा होने का घमंड हो गया इसलिए यह लड़ाई-झगड़ा हो रहा है।
आज मैं सबको इसका मजा चखा कर रहूंगा। ताकि फिर कोई पुस्तक अपने को बड़ा होने का घमंड न कर सके। हिन्दी की पुस्तक कहकर सारे पुस्तकों से लड़ने लगा।
हिन्दी की मोटी पुस्तक सारे पुस्तकों में सबसे ताकतवर था। वह नहीं चाह रहा था कि आपस में लड़ाई-झगड़ा हो। मगर अंग्रेजी की पुस्तक अपने आपको सबसे बड़ा कहकर दूसरे पुस्तकों की आए दिन हंसी उड़ा रहा था।
इतिहास, भूगोल, विज्ञान, संस्कृत, कला, गणित, बीजगणित, सामान्य ज्ञान की सभी पुस्तकें, अंग्रेजी की पुस्तक से पंगा लेकर खूब लड़ झगड़ रहे थे।
तभी हिन्दी की पुस्तक अंग्रेजी की पुस्तक के गाल पर एक थप्पड़ जमाते हुए बोला-‘तू तो अंग्रेज की औलाद है। तुझे तो शर्म से चुल्लू भर पानी में डूब मरना चाहिए।’
मैं तो हिन्दुस्तान का हूं। मगर मैंने कभी बड़ा होने का घमंड नहीं किया। और तू अपनी शेखी बधारने से बाज नहीं आ रहा है। तुम्हें तो इंग्लैंड चला जाना चाहिए।
मैं क्यों जाऊं तुम जाओ इंग्लैंड मुझे तो भारत का बच्चा-बच्चा चाहता है। मगर तुझे कौन चाहता है। अंग्रेजी पढ़ने जानने वालों की मांग सारे विश्व में है। मगर हिन्दी की मांग किसी देश में नहीं है। अंग्रेजी का पुस्तक बोल पड़ा।
अरे ओ अंग्रेजी की पुस्तक मुझको अब ज्यादा गुस्सा मत दिला वरना हम सब मार-मार कर तेरा हाथ-पैर तोड़ देंगे। हिन्दी का पुस्तक धमकाते हुए बोला। इतना सुनते ही इतिहास, भूगोल, विज्ञान, संस्कृत, कला, गणित, बीजगणित, सामान्य ज्ञान की पुस्तक और हिन्दी की पुस्तक मिलकर अंग्रेजी की पुस्तक को लात-घूसे, मुक्के, थप्पड़ से मारने लगे। अंग्रेजी का पुस्तक रोते हुए बोला तुम सब मुझे छोड़ दो। मैं अब कभी बड़ा होने का घमंड नहीं करुंगा। न किसी की हंसी उड़ाऊंगा। मैं तुम सबसे हाथ जोड़ता हूं। पांव पड़ता हूं। मुझे छोड़ दो। ऐसी गलती अब कभी नहीं करुंगा।
अंग्रेजी की पुस्तक की बात सुनकर सारे पुस्तक उसे मारना छोड़कर दूर खड़ा हो गए।
तभी हिन्दी का पुस्तक बोला आज के बाद कोई भी पुस्तक अपने को बड़ा नहीं कहेगा। न किसी की हंसी उड़ाएगा। बल्कि सबके साथ मिलकर रहेगा। हां, हिन्दी का पुस्तक ठीक कह रहा है। अब हम सबको मिल जुलकर रहना चाहिए। एक-दूसरे को अपना दोस्त मानना चाहिए। चलो तुम सब अब जल्दी से बस्ते में चलकर बैठ जाओ वरना बस्ते का मालिक मोनू आ गया तो फिर सबकी पिटाई होने लगेगी। बस्ता इतना कहकर खामोश हो गया।
इतने में हिन्दी का पुस्तक सबसे पहले बस्ते में आकर बैठ गया। उसके बाद अंग्रेजी, इतिहास, भूगोल, विज्ञान, कला, गणित, बीज गणित, सामान्य ज्ञान की सभी पुस्तकें एक-एक कर के बस्ते में आकर अपनी-अपनी जगह पर बैठ गए। और झगड़ा समाप्त होने की खुशी में सब हंसने लगे।
तभी बस्ता सबको समझाते हुए बोला तुम सबको कभी भी बड़ा होने का घमंड नहीं करना चाहिए। न लड़ना-झगड़ना चाहिए। तुम सब पुस्तकों में न कोई छोटा है न कोई बड़ा है। अब ऐसी भूल कोई कभी नहीं करेगा। बस्ता इतना समझाकर चुप हो गया। (सुमन सागर)




