बाबा बकाला से संदेश

गत दिवस बाबा बकाला की पवित्र धरती पर रक्खड़ पुन्नया वाले दिन जहां लाखों श्रद्धालु नतमस्तक हुए, वहीं कुछ राजनीतिक पार्टियों ने अपने-अपने मंच लगा कर गुरु को श्रद्धांजलि देने के साथ-साथ ज्यादातर अपनी राजनीतिक बातों को प्राथमिकता दी। आम आदमी पार्टी ने जहां राज्य स्तरीय समारोह का आयोजन किया, वहीं मुख्यमंत्री भगवंत मान ने अपनी पिछले साढ़े चार वर्ष की कारगुज़ारी का विवरण देते हुए मावां-धीयां सत्कार योजना के तहत 5.30 लाख और महिलाओं के खातों में 3 महीने की सम्मान राशि के रूप में 181.50 करोड़ रुपये उनके खातों में डाले। इससे लाभार्थी महिलाओं की संख्या 70.92 लाख हो जाने की घोषणा भी की और इस योजना के तहत एक करोड़ महिलाओं को इस योजना के तहत शीघ्र ही लाने की घोषणा की। सरकार की कारगुज़ारी के संबंध में सम्बोधित करते हुए उन्होंने बिजली के बिल के ज़ीरो आने, खेतों तक नहरी पानी पहुंचाने, 70840 कर्मचारियों को नौकरियां देने और मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना को लागू करने का दावा भी किया।
अकाली दल (ब) के मंच से सम्बोधित करते हुए सुखबीर सिंह बादल ने पिछली अकाली सरकारों के समय हुए विकास की बात की और आने वाले समय में भी प्रदेश के हितों के लिए बनाई जाने वाली योजनाओं की घोषणा की। अकाली दल वारिस पंजाब दे के नेताओं ने बंदी सिंहों की रिहाई, नशा और गैंगस्टरवाद को खत्म करने के साथ-साथ पंथक एजेंडे का ज़िक्र करते हुए जेल में नज़रबंद अमृतपाल सिंह को सम्भावित मुख्यमंत्री बनाने की घोषणा भी की। भारतीय जनता पार्टी के नेता और केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज चौहान ने किसान मुद्दों की बात की और कहा कि किसी भी देश के साथ होने वाले समझौते किसानों के हित में होंगे। उन्होंने केन्द्र सरकार द्वारा गेहूं और धान की एम.एस.पी., यूरिया खाद की सब्सिडी, प्रधानमंत्री सम्मान निधि और जी राम जी योजना के लिए खर्च किए गए लाखों-करोड़ों की धन-राशि का भी ज़िक्र किया। कांग्रेस की ओर से आयोजित कांफ्रैंस में सरकार के दावों के विपरीत, उस पर रेत से अवैध कमाई करने, नशे के प्रचलन और भ्रष्टाचार करने के आरोप लगाए गए।
इन कांफ्रैंसों ने एक तरह से राजनीतिक माहौल को और भी गर्मा दिया है। प्रदेश में कुछ महीने बाद होने जा रहे चुनाव के लिए भी सभी पार्टियों ने अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं। सरकार हर हाल में इस बात के लिए यत्नशील दिखाई देती है कि वह अपने स्थापित विरोधी प्रभाव को जहां प्रत्येक ढंग-तरीके से कम कर सके, वहीं अपनी लागू और घोषित योजनाओं से लोगों का अधिक से अधिक ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर सके। ‘आप’ की सक्रियता शिखर पर पहुंच गई प्रतीत होती है। चुनाव नज़दीक आते देख कर विगत अवधि में भाजपा और अकाली दल (ब) के पुन: गठबंधन की बात भी चलती रही है परन्तु अब लगातार बड़े-छोटे भाजपा नेताओं की ओर से प्रदेश की सभी सीटों पर चुनाव लड़ने की घोषणा करना और इसके साथ पहली बार रक्खड़ पुन्नया पर अपनी कांफ्रैंस का आयोजन करना और उस पर केन्द्रीय कृषि मंत्री को आमंत्रित करना, इस बात का प्रकटावा ज़रूर है कि भाजपा इस बार अब तक अकेले ही चुनाव लड़ने के लिए अपना दम भर रही है। उसके साथ ही दूसरी पार्टी के रूप में अकाली दल वारिस पंजाब दे का उभार भी देखा जा रहा है, जिसने बाबा बकाला में बहुत ही प्रभावशाली जन-समूह एकत्रित करके अपने अस्तित्व को दिखाने का सफल यत्न किया है। कांग्रेस की ओर से आयोजित कांफ्रैंस में सामने आई पार्टी की आंतरिक खींचतान को मौजूदा समय में प्रदेश वासियों के लिए एक नकारात्मक संदेश ही कहा जा सकता है। यदि स्थिति ऐसी बनी रहती है तो यह आगामी समय में पार्टी के लिए नुकसानदायक सिद्ध हो सकता है। इन कांफ्रैंसों ने एक बार तो राजनीतिक माहौल को पूरी तरह गर्मा दिया है, जिसका बड़ा प्रभाव आगामी महीनों में देखा जा सकेगा।

—बरजिन्दर सिंह हमदर्द

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