विश्व बैडमिंटन चैम्पियनशिप में फ्रांस ने रचा इतिहास

दिल की धड़कनें तेज़ हो गईं। शटलकॉक हवा में इतनी देर रही कि एलेक्स लैनियर अपनी किस्मत का अंदाज़ा लगा सकते थे। फ्रांस के इस 21 वर्षीय खिलाड़ी ने कोण बनाता हुआ एक ज़बरदस्त स्मैश मारा जो इतनी तेज़ गति का था कि उनके प्रतिद्वंदी कोडाई नाराओका (जापान) अपनी जगह से हिल भी न पाये थे कि शटलकॉक ने हार्डवुड को चूम लिया। इस विजयी शॉट के लगते ही नई दिल्ली का इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम तालियों से गूंज उठा। लैनियर ने अपना रैकेट नीचे गिराया और वह जोश व ख़ुशी में हवा में उछल गये। जब उन्होंने अपने कोच केस्टुटिस नविकस को गले लगाया तो उनकी आंखों में ख़ुशी के आंसू थे। चंद मिनट बाद जब लैनियर स्वर्ण पदक गले में पहने हुए पोडियम पर खड़े थे, तो उनके होंठों पर मुस्कान थी। होती भी क्यों नहीं, लम्बे समय तक फ्रेंच बैडमिंटन उम्मीदें जगाता हुआ हाशिये पर रहा और अब आखिरकार उसने दुनिया को फतह कर लिया था। यादगार रविवार (23 अगस्त 2026) को लैनियर ने खेल की परीकथाओं में अपना नाम दर्ज करा लिया था- विश्व चैंपियनशिप खिताब जीतने वाले फ्रांस के पहले एकल बैडमिंटन खिलाड़ी के रूप में। 
लैनियर की ऐतिहासिक जीत फ्रेंच बैडमिंटन के लिए इस लिहाज़ से भी यादगार व महत्वपूर्ण रही; क्योंकि उनसे पहले फ्रांस की ही मिश्रित युगल जोड़ी थाम मार्क गिक्वेल व डेल्फिन औरोर डेलरू ने सनसनी मचाते हुए अपने वर्ग में स्वर्ण पदक जीत लिया था और यह भी विश्व चैंपियनशिप में पहला स्वर्ण पदक था। विश्व ख़िताब की ओर लैनियर ने अपनी स्पीड व चपलता से कदम बढ़ाये। फाइनल में उन्होंने इतना दबदबा बनाकर रखा कि विश्व के नंबर 11 खिलाड़ी कोडाई नाराओका के पास कोई जवाब ही नहीं था। मात्र 50-मिनट के एक तरफा मुकाबले में लैनियर ने 21-11, 21-11 से सीधे सेटों में जीत दर्ज की। मिश्रित युगल में थाम मार्क गिक्वेल व डेल्फिन औरोर डेलरू के सामने चीन की विश्व नंबर 1 जोड़ी फेंग यान झे व हुआंग डोंगपिंग थी। मुकाबला 78 मिनट तक कड़ा चला, लेकिन अंत में थाम मार्क गिक्वेल व डेल्फिन औरोर डेलरू ने 22-20, 19-21, 21-15 से जीत दर्ज करके वह कर दिखाया जिसका किसी को विश्वास नहीं था। लैनियर ने कहा, ‘यह फ्रेंच बैडमिंटन के लिए महान दिन है और पूरे स्टाफ के लिए भी महान दिन है। जब हमने मिश्रित युगल में स्वर्ण पदक जीता तो मैंने सोचा कि मुझे उन्हें दोहरी मुस्कान देनी चाहिए और मुझे फिर से इतिहास रचना चाहिए।’ 
महिला एकल के फाइनल में शुद्ध, अदम्य इच्छा का प्रदर्शन देखने को मिला। जापान की अकाने यामागुची अपने खिताब को बरकरार रखने के लिए कोर्ट पर विश्व की नंबर 1 खिलाड़ी एन से-यंग (दक्षिण कोरिया) के खिलाफ कोर्ट में उतरी थीं। यामागुची के रिटर्न व जम्प स्मैश ने से-यंग की परीक्षा अवश्य ली कि पहला गेम 17-17 तक बराबर की टक्कर से चलता रहा, लेकिन फिर दक्षिण कोरिया की 24-वर्षीय से-यंग ने अपना कलात्मक जादू दिखाते हुए इस गेम को 21-17 से ही जीत लिया। दूसरे गेम में भी हाई-स्पीड रैली दर्शकों को देखने को अवश्य मिलीं, लेकिन से-यंग ने 21-14 से बाज़ी मार ली। यह फाइनल 49 मिनट चला। हालांकि यामागुची पहली महिला एकल खिलाड़ी हैं, जिन्होंने विश्व चैंपियनशिप के छह पदक जीते हैं, लेकिन इस फाइनल का दिन तो से-यंग के नाम ही रहा। वह न सिर्फ ओलंपिक चैंपियन हैं बल्कि यह उनका दूसरा विश्व खिताब है। एन से-यंग अब एक साथ महिला एकल के ओलंपिक, विश्व चैंपियनशिप, एशियन गेम्स और एशियन चैंपियनशिप्स खिताब अपने पास रखे हुए हैं, जोकि ऐतिहासिक है। 
अन्य फाइनलों में बाक हा ना व ली सो ही की जोड़ी ने महिला युगल विश्व खिताब के लिए दक्षिण कोरिया की 31-वर्ष की प्रतीक्षा को खत्म किया जब उन्होंने चीन की लिउ शेंग शु व तान निंग की जोड़ी को सीधे सेटों में 21-15, 21-15 से पराजित किया। ली की आयु 32 वर्ष 70 दिन है और इस तरह वह सबसे अधिक आयु की महिला युगल विश्व चैंपियन बन जाती हैं। पुरुष युगल के फाइनल में चीन के लियांग वेई केंग व वांग चांग की जोड़ी ने मलेशिया के आरोन चिया व सोह वुई यिक की जोड़ी को 21-17, 21-16 पराजित करके अपनी गोल्डन यात्रा को पूर्ण किया। भारत की एकमात्र सफलता महिला युगल में ट्रीसा जॉली व गायत्री गोपीचंद की जोड़ी रही, जो अपने वर्ग में सेमीफाइनल तक पहुंची और उसे कांस्य पदक से सम्मानित किया गया।
-इमेज रिफ्लेक्शन सेंटर 
 

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