शंघाई सम्मेलन की उपलब्धि
गत दिवस प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की कज़ाकिस्तान और किर्गिस्तान की यात्रा को कई पक्षों से बहुत अर्थपूर्ण माना जा सकता है। कज़ाकिस्तान के साथ भारत के संबंध हमेशा सुखद बने रहे हैं। वहां प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी का भव्य स्वागत हुआ और उन्हें देश के सबसे बड़े नागरिक पुरस्कार से सम्मानित किया गया। कज़ाकिस्तान के साथ यूरेनियम की प्राप्ति के लिए किया गया समझौता भारत के योजनाबद्ध विकास में बड़ा सहायक हो सकता है। किर्गिस्तान में वह शंघाई कॉर्पोरेशन ऑर्गेनाइजेशन की 25वीं वर्षगांठ के समारोह में शामिल हुए। चाहे इसमें शामिल कई देशों के आपस में बड़े अलगाव हैं, जो दुश्मनी की हद तक चले गए हैं। इस संगठन में भारत सहित रूस, चीन, ईरान, कज़ाकिस्तान और किर्गिस्तान आदि देश शामिल हैं, जिनके प्रमुख संगठनों के लगातार होते वार्षिक सम्मेलनों में भाग लेते हैं। एक-दूसरे के साथ विचार-विमर्श करते हैं। संभावित सीमा तक व्यापारिक सहयोग के मार्ग ढूंढते हैं और अन्तर्राष्ट्रीय मंच पर उभरे महत्त्वपूर्ण घटनाक्रम पर भी आपस में विचार-विमर्श करते हैं। इस शिखर सम्मेलन में भारत के लिए एक बड़ी उपलब्धि यह रही है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इसमें सम्बोधित करते हुए स्पष्ट रूप में सीमा पार से आतंकवाद की निंदा की और आतंकवादी संगठनों पर तीव्र हमला करते हुए उन देशों की भी आलोचना की है, जो इनका पक्ष-पोषण करते हैं।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शऱीफ के समक्ष स्पष्ट रूप में यह बातें रखना श्री नरेन्द्र मोदी का बेबाक बयान माना जा सकता है। चीन के साथ भी भारत का लम्बी अवधि से सीमांत विवाद चला आ रहा है। इस बात में शंघाई संगठन का भी प्रभाव माना जा रहा है कि दोनों ही देश लगातार इस जटिल मामले को सुलझाने के लिए दर्जनों ही बैठकें कर चुके हैं परन्तु इसके साथ-साथ दोनों देशों में व्यापारिक साझ भी बनी रही है। शंघाई संगठन का ईरान भी सदस्य है और उनके राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन भी इस अवसर पर उपस्थित थे। यदि इस संगठन द्वारा स्पष्ट रूप में अमरीकी राष्ट्रपति की तानाशाही पर निशाना साधा गया है तो इस बयान का बड़ा प्रभाव भी अंतर्राष्ट्रीय मंच पर देखा जा सकेगा। शंघाई कॉर्पोरेशन आर्गेनाइजेशन के संयुक्त बयान में ईरान पर अमरीकी हमलों की आलोचना की गई है और स्पष्ट रूप में यह कहा गया है कि ऐसी कार्रवाई अंतर्राष्ट्रीय संयुक्त राष्ट्र के सिद्धांतों का उल्लंघन है।
इस समय भारत के समक्ष समस्या यह है कि पाकिस्तान के साथ संबंध नाज़ुक होने के कारण उसका सीधा सम्पर्क केन्द्रीय एशिया के देशों के साथ नहीं बन रहा परन्तु यह बात भी सुनिश्चित है कि शंघाई संगठन के रूप में केन्द्रीय एशिया और यूरेशियाई क्षेत्र के देशों के साथ संबंध बढ़ाने के लिए भारत को एक मज़बूत मंच ज़रूर मिल रहा है। इस संगठन के ज्यादातर देशों की समस्या नशीले पदार्थों की तस्करी है। इसमें यह फैसला लिया जाना कि इस तस्करी को रोकने के लिए आपस में बेहतर तालमेल बनाना ज़रूरी है, इससे सिंथैटिक नशीले पदार्थों के प्रसार को रोकने में बड़ी सहायता ज़रूर मिल सकती है। विगत अवधि में भारत के कुछ पड़ोसी देशों के साथ संबंध बिगड़ते दिखाई दे रहे हैं, परन्तु ऐसे संगठन भारत के दायरे को विशाल और मज़बूत बनाने में निश्चय ही सहायक हो सकते हैं।
—बरजिन्दर सिंह हमदर्द

