उज्बेकिस्तान के साथ निकटता
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एक बार फिर विदेशी दौरे पर हैं। चाहे उनके बारे में यह प्रभाव भी बना हुआ है कि वह विदेशों के ज्यादातर दौर करते हैं, परन्तु अक्सर ऐसे दौरे भावपूर्ण और भारत के लिए अनेक पक्षों से लाभदायक होते हैं। अपने इस संक्षेप दौरे में वह केन्द्रीय एशिया के देश उज्बेकिस्तान के साथ-साथ शंघाई सहयोग संगठन के शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए किर्गिस्तान भी पहुंच चुके हैं। भारत के केन्द्रीय एशिया के देशों के साथ सदियों पुराने संबंध रहे हैं, जिनका आधार व्यापार और सभ्याचारक निकटता रहा है। उज्बेकिस्तान लगभग 4 करोड़ की जनसंख्या वाला और साढ़े चार लाख किलोमीटर के करीब क्षेत्र वाला देश है। केन्द्रीय एशिया के देशों से होते हुए ईरान और अफगानिस्तान के रास्ते भारत में लगातार हमलावर भी आते रहे और इसको लूट कर अपने घर भरते रहे।
म़ुगल बादशाह बाबर का संबंध भी केन्द्रीय एशिया से ही था। म़ुगलों ने करीब 400 वर्ष के लगभग यहीं रह कर भारत पर राज किया। उज्बेकिस्तान किर्गिस्तान और अन्य दर्जनों ही पड़ोसी देश लम्बे समय तक सोवियत यूनियन का हिस्सा रहे। उस समय हुई भारत और पाकिस्तान की जंग में सोवियत यूनियन के नेताओं ने ही ताशकंद में दोनों देशों का समझौता करवाया था। ताशकंद उज्बेकिस्तान की राजधानी है। चाहे पाकिस्तान बनने से भारत का केन्द्रीय एशिया के देशों के साथ सीधा सड़क संबंध नहीं रहा, जिस कारण अफगानिस्तान और केन्द्रीय एशिया के देशों के साथ अभी तक भी पूरा सम्पर्क नहीं बन सका। इसलिए अंतर्राष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण गलियारे जैसी योजनाओं पर कार्य किया जा रहा है, जो इन देशों के साथ भारत के सम्पर्क को और भी गहरा करने में सहायक
हो सकता है।
श्री मोदी का उज्बेकिस्तान के साथ खास लगाव रहा है। अपने कार्यकाल में यह उनकी इस देश की चौथी यात्रा है। उज्बेकिस्तान भारत के महत्व को इसलिए भी जानता और पहचानता है, क्योंकि वह रूस तथा चीन के प्रभाव के बिना मित्रता एवं सहयोग के अन्य मार्ग भी तलाशता रहा है, जिसके लिए वह अक्सर भारत के साथ अधिक से अधिक सहयोग की भावना को प्राथमिकता देता रहा है। इस समय दोनों देशों का आपसी व्यापार लगभग एक बिलियन डॉलर (9515 करोड़ रुपये) है, जिसे अब दोनों देश वर्ष 2030 तक 5 बिलियन डॉलर तक ले जाने के इच्छुक हैं। व्यापार, निवेश तथा सुरक्षा के लिए समझौतों के अतिरिक्त कई तरह के दुर्लभ खनिज पदार्थों एवं दवाइयों के क्षेत्र में भी दोनों देशों द्वारा व्यापार को प्राथमिकता दी जाएगी। दोनों ही देश कृषि क्षेत्र में भी एक-दूसरे के साथ अधिक से अधिक सहयोग के इच्छुक हैं।
उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव ने अपने देश में आने वाले भारतीय यात्रियों को 30 दिन के लिए वीज़ा छूट देने की भी पेशकश की है, जिससे भारतीय यात्रियों को वहां जाने के निर्विघ्न अवसर मिल सकेंगे। भारत, जिसके कई कारणों से अपने कई पड़ोसी देशों के साथ संबंध सुखद नहीं रहे, परन्तु वह अपने केन्द्रीय एशिया के अधिकतर देशों के साथ मधुर संबंध बनाने के लिए ज़रूर यत्नशील है, जिसके अच्छे परिणाम निकल रहे हैं। जापान तथा अधिकतर यूरोपियन देशों से भी भारत के गहन व्यापरिक संबंधों के अतिरिक्त आपसी सद्भावना वाले संबंध बने रहे हैं। केन्द्रीय एशिया के देशों को इस क्रम से जोड़ना भी भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाएगा।
—बरजिन्दर सिंह हमदर्द

