50 करोड़ देशवासियों की पहुंच से बाहर है पौष्टिक आहार
देश में हर वर्ष 1 से 7 सितम्बर तक राष्ट्रीय पोषण सप्ताह मनाया जाता है। इस वर्ष पोषण सप्ताह की थीम जीवन के पहले छह वर्षों में मस्तिष्क के विकास को अधिकतम करना रखी गई है। इस थीम का मुख्य मकसद लोगों को पोषण संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने वाले संतुलित और विविध आहार को बढ़ावा देने पर केंद्रित कराना है। संयुक्त राष्ट्र की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार भारत में 2025 तक करीब 49.5 करोड़ लोग पौष्टिक भोजन खरीदने में सक्षम नहीं हैं। हालांकि 2017 की तुलना में 32 करोड़ लोगों की स्थिति में सुधार हुआ है, फिर भी भारत दुनिया के सबसे अधिक प्रभावित देशों में शामिल है। रिपोर्ट में महंगाई, कमजोर सप्लाई सिस्टम और जलवायु परिवर्तन को प्रमुख कारण बताते हुए सरकारों को पौष्टिक भोजन सस्ता और सुलभ बनाने की सलाह दी गई है।
राष्ट्रीय पोषण सप्ताह के अंतर्गत आम लोगों को पौष्टिक आहार के बारे में जागरूक किया जाता है, ताकि शरीर में पोषण की पूर्ति को बढ़ावा दिया जा सके और बीमारियों का खतरा कम किया जा सके। आज दुनियाभर में खानपान को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म हो रहा है। क्या खाये और क्या न खाये इस पर बहस चल रही है। स्वास्थ्य एवं पोषण का होना किसी भी मानव के लिए पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। स्वस्थ शरीर में स्वस्थ मस्तिष्क का वास होता है। स्वस्थ्य रखने के लिए शरीर को पोषक आहार की आवश्यकता पड़ती है। पोषण आहार स्वस्थ के लिए बेहद ही ज़रूरी होता है। पोषण युक्त चीजें खाने से शरीर को ज़रूरी तत्व मिल जाते हैं और शरीर में ऊर्जा बनी रहती है। इसलिए अपनी डाइट में केवल पोषण आहार को ही शामिल करें और वही चीजें खाएं जोकि पोषण से युक्त हो। हर व्यक्ति के लिए पूर्ण पौष्टिक आहार ज़रूरी होता है, क्योंकि ज़रूरी पोषक तत्वों की कमी होने से शरीर ना सिर्फ कमजोर हो सकता है बल्कि बीमारियों का घर बन सकता है।
पौष्टिक आहार को लेकर दुनियां में व्यापक हलचल मची है। आहार मनुष्य की सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण आधारभूत आवश्यकता है जिसके बिना कोई भी प्राणी जीवन की कल्पना नहीं कर सकता है। दुनिया में प्रचुर खाद्यान्न उत्पादन होने के बावजूद लोगों के लिए स्वास्थ्यपरक आहार आज भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। हमारे शरीर को पूरी तरह स्वस्थ रहने के लिए पोषक पदार्थों की ज़रूरत होती है। ये पोषक पदार्थ अलग-अलग तरह के भोजन से हमें मिलते हैं, यानि ताजे फल, सब्जियां, साबुत अनाज, फलियां, सूखे मेवे, डेयरी उत्पाद और मीट वगैरह आदि। शारीरिक श्रम करना, सोना और आराम करने की तरह ही संतुलित और पौष्टिक आहार लेना भी ज़रूरी है। भोजन का मतलब यह नहीं होता कि आप कुछ भी खा रहे हैं। ऐसा भोजन करें जो स्वच्छ और पोषण तत्वों से भरपूर हो। इससे न सिर्फ हम बीमारियों से दूर रहते हैं, बल्कि शारीरिक विकास भी अच्छी तरह होता है। संतुलित आहार के अनेक फायदे नहीं है जैसे आप के शरीर को ऊर्जा प्रदान करता है और अच्छी नींद को बढ़ावा भी देता ह। संतुलित आहार शरीर में वसा कम करता है साथ ही शरीर को अच्छे से काम करने के लिए प्रेरित करता है। शरीर के लिए आवश्यक संतुलित आहार लंबे समय तक नहीं मिलना ही कुपोषण है।
हमारे देश में गरीबी एवं अज्ञानता के कारण भोजन में पौषक तत्वों की कमी रहती है। इन्ही कारणों से बच्चों में कुपोषण एवं वयस्कों में कई विकार उत्पन्न होते है। आहार में कार्बोज, प्रोटीन, वसा, खनिज लवण एवं विटामिन विद्यमान हो तभी व्यक्ति की शारीरिक वृद्धि एवं विकास होगा। इस प्रकार के आहार में जल एवं फाइबर की भी पर्याप्त मात्रा होनी चाहिए। नाश्ते में अंकुरित अनाज यानी मूंग, चना और सोयाबीन को अंकुरित खाएं। ऐसा करने से उनमें मौजूद पोषक तत्वों की मात्रा बढ़ती है। मौसमी हरी सब्जियों को डाइट में शामिल करें। अधिक फैट वाला दूध, बटर तथा पनीर लेने से बचें। जंकफूड से बचना होगा और पोषक आहार अपनाना होगा तभी मोटापे जैसी बीमारियों से बचा जा सकता है। भारत सरकार ने हर प्रकार की गरीबी को कम करने के लक्ष्य के साथ लोगों के जीवन को बेहतर बनाने में उल्लेखनीय प्रगति की है। पोषण अभियान और एनीमिया मुक्त भारत जैसी उल्लेखनीय पहलों ने स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंच में उल्लेखनीय वृद्धि की है, जिससे वंचित रहने में काफी कमी आई है।

