हरसिमरत कौर बादल ने दिल्ली में राष्ट्रीय महिला आयोग की चेयरपर्सन से की मुलाकात
चंडीगढ़, 8 सितंबर- शिरोमणि अकाली दल (ब) की वरिष्ठ नेता और बठिंडा की सांसद सरदारनी हरसिमरत कौर बादल ने आज दिल्ली में राष्ट्रीय महिला आयोग से अपील की कि वह पंजाब सरकार को निर्देश दे कि दुष्कर्म के दो मामलों में आरोपियों को बचाने के लिए पंजाब के मुख्यमंत्री की पत्नी डॉ. गुरप्रीत कौर और उनके साथियों द्वारा 5 करोड़ रुपये रिश्वत लेने के आरोपों में उनके खिलाफ FIR दर्ज की जाए।
बठिंडा की सांसद, जिन्होंने आज शाम राष्ट्रीय महिला आयोग की चेयरपर्सन विजया किशोर राहतकर से मुलाकात की, ने कहा कि मुख्यमंत्री की पत्नी और उनके साथियों के खिलाफ राष्ट्रीय महिला आयोग अधिनियम 1990 की धारा 10 के तहत संज्ञान लेते हुए FIR दर्ज की जानी चाहिए। उन्होंने आयोग से यह भी अपील की कि वह केंद्रीय गृह मंत्रालय को सिफारिश करे कि एक CBI जांच शुरू कर अमृतसर और मोहाली में दर्ज दो दुष्कर्म के मामलों को मुख्यमंत्री के परिवार के कथित दबाव पर रफा-दफा करने के मामले की भी जांच की जाए।
सरदारनी हरसिमरत कौर बादल ने आयोग के ध्यान में लाया कि पंजाब पुलिस ने अमृतसर और मोहाली में दो महिलाओं द्वारा दर्ज करवाए गए दुष्कर्म के मामलों की जांच को तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाने के बजाय कथित तौर पर इन्हें खुर्द-बुर्द कर दिया। उन्होंने कहा कि एकतरफा तरीके से केस रद्द करने की रिपोर्ट दाखिल करने और आरोपी मीडिया इन्फ्लुएंसर गुरी चहल को गिरफ्तारी के दो महीने के भीतर ही रिहा करवाने वाले पुलिस अधिकारियों के खिलाफ CBI जांच होनी चाहिए।
सरदार बादल ने श्रीमती राहतकर से यह भी अपील की कि वह एक जांच कमेटी गठित करें, जो पंजाब जाकर दोनों शिकायतकर्ता महिलाओं और उनके परिवारों के बयान सुरक्षित एवं विश्वासपूर्ण माहौल में दर्ज करे। उन्होंने कहा कि एक बार यह प्रक्रिया पूरी होने पर DGP, पुलिस कमिश्नर अमृतसर, SSP एस.ए.एस. नगर और स्पेशल DGP, जिन्हें हाईकोर्ट ने अमृतसर मामले की जांच सौंपी थी, को धारा 10 (4) के तहत आरोपी की हिरासत और जेल स्थानांतरण से संबंधित पूरा रिकॉर्ड लेकर तलब किया जाए।
उन्होंने ऑडियो रिकॉर्डिंग, तस्वीरें, CCTV फुटेज और संबंधित व्यक्तियों के कॉल रिकॉर्ड के विवरण सहित सभी इलेक्ट्रॉनिक सबूतों को सुरक्षित रखने और उनकी फोरेंसिक जांच करवाने की भी मांग की। उन्होंने यह भी अपील की कि गवाहों को गवाह सुरक्षा योजना के तहत रखा जाए और आरोपियों के खिलाफ LOC जारी की जाए, ताकि उन्हें वापस लाकर मुकदमे का सामना करवाया जा सके।
राष्ट्रीय महिला आयोग की चेयरपर्सन से मुलाकात के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए सरदार बादल ने कहा कि पंजाब की बेटी होने के नाते वह उस समय चुप नहीं रह सकतीं, जब हमारी बेटियों की सुरक्षा के साथ मुख्यमंत्री के घर से कथित तौर पर सौदेबाजी की जा रही हो। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उन्होंने महिला आयोग से उस समय संपर्क किया है, जब पीड़ितों की इज्जत की रक्षा के लिए बनाए गए हर कार्यालय के दरवाजे न्याय हासिल करने के लिए बंद हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि उन्होंने ऐसे दस्तावेज सौंपे हैं, जिनसे अमरदीप ग्रेवाल, जो मुख्यमंत्री की पत्नी का रिश्तेदार बताया गया है, के काम करने के तरीके का पता चलता है कि कैसे दुष्कर्म के आरोपी को बचाने का कथित प्रयास किया गया। उन्होंने कहा कि अमरदीप ग्रेवाल ने बिचौलिए सिमरजीत हुंदल से स्पष्ट कहा था कि एक बार 'मान-सम्मान' कर दिया गया और अग्रिम राशि दे दी गई तो काम हो जाएगा।
उन्होंने बताया कि ग्रेवाल ने बिचौलिए को मुख्यमंत्री की पत्नी से 20 मई को मिलवाने का वादा किया था और उसे चंडीगढ़ स्थित अपने रेस्टोरेंट में कथित सौदेबाजी के दौरान की तस्वीर भी भेजी थी, ताकि पुख्ता सबूत दिए जा सकें। उन्होंने कहा कि रेस्टोरेंट की CCTV फुटेज से इस बैठक की तारीख और समय का पता लगाया जा सकता है।
सरदारनी बादल ने जोर देकर कहा कि ग्रेवाल ने यह भी कहा था कि एक बार रिश्वत की रकम मिल जाने के बाद उन अधिकारियों को फोन किए जाएंगे, जिनके नाम उसने बताए हैं और फिर आरोपी को उसकी पसंद की जेल में भेज दिया जाएगा तथा अस्पताल भी रेफर कर दिया जाएगा। जहां वह अपनी जरूरत के मुताबिक नशीले पदार्थ भी ले सकता है और उसके खिलाफ सभी आरोप भी खारिज हो जाएंगे।
उन्होंने कहा कि इस पूरे कथित खाके के मुताबिक ही काम हुआ, जिससे पता चलता है कि मुख्यमंत्री की पत्नी ने गुरी चहल के खिलाफ दुष्कर्म के दो मामले रद्द करवाने के लिए रिश्वत की कथित सौदेबाजी पक्की कर ली थी। उन्होंने कहा कि यही कारण है कि आरोपी को दो महीने में ही जेल से बाहर निकाल दिया गया और वह देश से फरार हो गया।

