6 आला आई.ए.एस. अधिकारी घोटाले में फंसे

हरियाणा के बहुचर्चित 504 करोड़ के आईडीएफसी फर्स्ट बैंक घोटाले में सीबीआई ने पंचकूला की सीबीआई कोर्ट में तीसरी चार्जशीट दाखिल की है। इसमें प्रदेश के 6 आईएएस अधिकारियों मोहम्मद शाइन, डॉ. साकेत कुमार, प्रदीप कुमार, विनित गर्ग, पंकज अग्रवाल और आर.के. सिंह को आरोपी बनाया है। आर.के.सिंह, पंकज अग्रवाल और प्रदीप कुमार को सीबीआई गिरफ्तार कर चुकी है, जबकि मोहम्मद शाइन, डॉ. साकेत कुमार और विनित गर्ग पर भी गिरफ्तारी की तलवार लटक  रही है। सीबीआई ने आईडीएफसी बैंक के तीन अधिकारियों और एक प्राईवेट बैंक के एक अधिकारी को भी आरोपी बनाया है। सीबीआई ने आरोपी अधिकारियों पर आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, साक्ष्य नष्ट करने, जालसाजी, फर्जी दस्तावेजों को असली के रूप में इस्तेमाल करने, खातों में हेरा-फेरी, आपराधिक विश्वासघात जैसी भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप लगाए हैं। इसके अलावा भष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत रिश्वतखोरी और आपराधिक कदाचार के आरोप भी लगाए हैं।  जिन अधिकारियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल हुई है, उनके विभागों से करोड़ों रुपए का गबन हुआ है। चार्जशीट में कुल 19 अन्य लोगों को भी आरोपी बनाया गया है। अब तक जांच में यह बात सामने आई है कि आरोपी सरकारी कर्मचारियों ने आईडीएफसी और एक निजी बैंक के अधिकारियों के साथ मिलीभगत कर योजनाबद्ध तरीके से सरकारी धन के गबन की साजिश को अंजाम दिया। प्रदेश सरकार के 8 विभागों और संस्थानों की राशि पैनल में शामिल विभिन्न बैंकों से निकाल कर आईडीएफसी और एक अन्य निजी बैंक की चिन्हित शाखाओं में ट्रांस्फर की गई। सीबीआई के अनुसार इस पूरी प्रक्रिया में प्रदेश सरकार के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन किया गया। इसके बाद इन खातों में जमा सरकारी धन को कथित तौर पर फर्जी तरीके से ऐसे तीसरे पक्षों के खातों में ट्रांस्फर किया गया, जिनका संबंधित सरकारी विभागों से कहीं कोई संबंध नहीं था।
लपेटे में बड़े अधिकारी
आरोपी बनाए गए आईएएस अधिकारियों में विनित गर्ग 1991 बैच के आईएएस अधिकारी हैं और उनकी रिटायरमेंट अगले साल होने वाली है। घोटाले के समय विनित गर्ग हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में तैनात थे। इसके अलावा आरोपी बनाए गए 2002 बैच के हरियाणा कैडर के आईएएस अधिकारी मोहम्मद शाइन घोटाले के दौरान हरियाणा बिजली उत्पादन निगम में नियुक्त थे। उनकी सेवानिवृत्ति 2033 में है। आरोपी बनाए गए डॉ. साकेत कुमार 2005 बैच के हरियाणा कैडर के आईएएस अधिकारी हैं और घोटाले के समय वह पंचायत एवं विकास विभाग में तैनात थे। उनकी रिटायरमेंट 2034 में है। इस घोटाले के आरोपियों में शामिल और सीबीआई द्वारा गिरफ्तार किए गए आईएएस अधिकारी पंकज अग्रवाल 2002 बैच के आईएएस अधिकारी हैं और उनकी सेवानिवृत्ति भी 2034 में होनी है। घोटाले के समय वह हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना में तैनात थे। इसी घोटाले के सिलसिले में गिरफ्तार किए गए प्रदीप कुमार हरियाणा कैडर के 2011 बैच के अधिकारी हैं और घोटाले के दौरान वह हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में तैनात थे और अब रिटायर हो चुके हैं। इसी घोटाले में गिरफ्तार किए गए एक अन्य आईएएस अधिकारी आरके सिंह 2012 बैच के अधिकारी हैं और उनकी रिटायरमेंट 2027 में होनी है। घोटाले के समय वह नगर निगम पंचकूला और नगर परिषद कालका से जुड़े पदों पर रहे हैं। सीबीआई ने इस मामले में इससे पहले 18 अन्य आरोपियों के खिलाफ दो चार्जशीट दाखिल की थी। इनमें आईडीएफसी बैंक और एक निजी बैंक के अधिकारी, हरियाणा सरकार के कर्मचारी, प्राईवेट व्यक्ति व निजी कंपनियां शामिल हैं। 
कुल 37 आरोपियों के विरुद्ध चार्जशीट दायर
पहले 18 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट के बाद अब 19 अन्य आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल होने के साथ ही इस मामले में अब तक कुल 37 आरोपियों को चार्जशीट किया जा चुका है। सीबीआई ने इस घोटाले के संबंध में 54 स्थानों पर तलाशी ली और करीब 20 करोड़ रुपए के सोने समेत कई महत्वपूर्ण साक्ष्य जुटाए हैं। जांच एजेंसी अब तक 26 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। इस घोटाले से जो 8 सरकारी विभाग और संस्थान प्रभावित हुए, उनमें पंचायत विभाग, पंचकूला और कालका नगर निगम व परिषद, हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद, हरियाणा श्रम कल्याण बोर्ड, हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड, हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और हरियाणा पावर जनरेशन निगम प्रभावित हुए हैं। सीबीआई के अनुसार इस मामले में कुल 504 करोड़ रुपए की राशि के गबन का पता चला है। जांच में यह भी सामने आया है कि गबन की राशि को कई बैंक खातों के जरिए इधर-उधर कर उसकी लेयरिंग की गई और बाद में उसे नगदी में प्रवर्तित किया गया। इस प्रक्रिया से आरोपियों द्वारा कथित तौर पर अवैध लाभ हासिल किया गया। चार्जशीट में जिन अन्य प्रमुख लोगों के नाम हैं, उनमें हरियाणा पावर जेनरेशन निगम से दीप्ति कौशिक और राजेश गोयल, विकास एवं पंचायत विभाग के प्रिंस शर्मा, हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सौरव शर्मा और प्रवीण कुमार, नगर निगम पंचकूला के सुरेन्द्र जैन, हरियाणा श्रम कल्याण बोर्ड के अमित कुमार और जुगल किशोर, आईडीएफसी बैंक के शमीम अहमद डार, सुधा गोयल व कुलदीप सिंह और निजी बैंक के चरणजीत सिंह रंधावा शामिल हैं। इसके अलावा सीबीआई चंडीगढ़ से जुड़े दो अन्य मामलों की भी जांच कर रही है। इनमें 1 मामला चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी निगम और नगर निगम चंडीगढ़ से संबंधित हैं, जबकि दूसरा मामला चंडीगढ़ रिन्यूएबल एनर्जी एंड साईंस एंड टैक्नोलॉजी प्रमोशन सोसायटी से जुड़ा हुआ है। दोनों मामलों में सीबीआई चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। 
 खिलाड़ी बनेंगे एचसीएस व एचपीएस
अंतर्राष्ट्रीय खेलों में पदक जीतकर देश का सम्मान बढ़ाने वाले हरियाणा के 7 खिलाड़ियों को हरियाणा सिविल सर्विस (एचसीएस) और हरियाणा पुलिस सर्विस (एचपीएस) की नौकरी मिलेगी। इनमें 4 दिव्यांग खिलाड़ी भी शामिल हैं। अंकुर मित्तल, अभिषेक वर्मा, हरविंद्र सिंह, तरुण ढिल्लों, एकता भ्याण और अमित कुमार एचसीएस अधिकारी बनेंगे, जबकि मनजीत सिंह को डीएसपी का पद दिया जाएगा। 
हाईकोर्ट के 4 साल पुराने आदेश को सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा है जिसके तहत मानव संसाधन विभाग ने खिलाड़ियों की नियुक्ति के आदेश जारी किए हैं। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने 18 अप्रैल 2022 को पुरानी खेल नीति के अनुसार इन खिलाड़ियों को एचसीएस और एचपीएस की नौकरी देने का आदेश दिया था जिससे प्रदेश सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी। इसके बाद बीती 29 मई को सुप्रीम कोर्ट ने भी हाईकोर्ट के फैसले पर मोहर लगा दी। हरियाणा उत्कृष्ट खिलाड़ी (भर्ती एवं सेवा की शर्तें) नियम 2018 के तहत इन खिलाड़ियों को एचसीएस और एचपीएस की नौकरी दी जाएगी। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने इन नियुक्तियों के लिए मंजूरी दे दी है। एचसीएस बनने वाले खिलाड़ियों में अंकुर मित्तल ने वर्ष 2018 में कोरिया में आयोजित विश्व चैंप्यिनशिप में गोल्ड मैडल जीता था। 30 मार्च 1992 में जन्मे अंकुर बीए पास हैं और उन्हें नियमों के अनुसार 4 साल की सिनीयारिटी भी दी जाएगी। अभिषेक वर्मा ने 2018 में एशियाई खेलों में कांस्य पदक और विश्व चैंपियनशिप में रजत पदक जीता था। अभिषेक वर्मा बीटेक एलएलबी हैं। दिव्यांग खिलाड़ी हरविंद्र सिंह ने 2018 एशियाई पैरा गेम्स में तीरअंदाजी में स्वर्ण पदक जीता था। 25 फरवरी 1991 को जन्म एमए पास हरविंद्र को 40 प्रतिशत दिव्यांग श्रेणी में एचसीएस अधिकारी बनाया जाएगा। दिव्यांग खिलाड़ी तरुण ढिल्लों ने 2018 एशियाई पैरा गेम्स में बेडमिंटन में गोल्ड मैडल जीता था। 18 अगस्त 1994 को जन्मे तरुण ढिल्लों की शैक्षणिक योग्यता बीए पास है और उन्हें भी 40 प्रतिशत दिव्यांग श्रेणी में नौकरी दी जाएगी। दिव्यांग खिलाड़ी एकता भ्याण ने 2018 एशियाई पैरा गेम्स में एथलेटिक्स में स्वर्ण पदक जीता था। 7 जून 1985 को जन्मीं एकता एमए बीएड हैं और उन्हें 100 प्रतिशत दिव्यांग श्रेणी में एचसीएस अधिकारी बनाया जाएगा। 
2020 में बदली खेल पॉलिसी
साल 2020 तक अंतर्राष्ट्रीय स्तर के पदक विजेता खिलाड़ियों को एचसीएस और एचपीएस के पदों पर नियुक्ति दी जाती थी। 6 साल पहले तत्कालीन मनोहर लाल की सरकार ने खेल पॉलिसी में संशोधन कर दिया था। इस संशोधन के अनुसार किसी भी खिलाड़ी को एचसीएस और एचपीएस के पद पर सीधी नियुक्ति नहीं दिए जाने का प्रावधान कर दिया था। पदक विजेता खिलाड़ियों को अधिकतम खेल विभाग में डिप्टी डायरेक्टर पद पर नियुक्ति दिए जाने का प्रावधान किया गया। पदक विजेता खिलाड़ियों को नई नीति के अनुसार गु्रप-ए, ग्रुप-बी व ग्रुप-सी कैटेगिरी की नौकरी मिलेगी। इसके अलावा ग्रुप-डी की नौकरियों में खिलाड़ियों को 10 प्रतिशत आरक्षण दिया जाएगा। प्रदेश सरकार के अनुसार हरियाणा में उत्कृष्ट खिलाड़ी भर्ती नियमों के तहत अब तक 260 खिलाड़ियों को ग्रुप-ए, ग्रुप-बी और सी की सरकारी नौकरियां दी जा चुकी हैं। 

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