सचिन पायलट की कमान

पंजाब में समय से पहले चुनाव होने संबंधी अनुमान लगाए जा रहे हैं परन्तु अब यह बात काफी हद तक स्पष्ट हो गई है, कि इन चुनावों की गतिविधियां जनवरी माह तक चलते रहने की संभावना है। मौजूदा सरकार ने 2022 में 16 मार्च को शपथ ग्रहण की थी। इस समय विधानसभा में आम आदमी पार्टी का बहुमत है। दूसरे स्थान पर कांग्रेस का प्रतिनिधित्व है। शेष पार्टियां तो हाशिये पर ही खड़ी दिखाई देती हैं। इससे पहले प्रदेश में कांग्रेस की सरकार थी, जो आखिरी समय में गुटबंदी का शिकार हो गई थी। इसके राजनीति में आम आदमी पार्टी से बुरी तरह पिछड़ जाने का एक बड़ा कारण पार्टी की आंतरिक फूट कहा जा सकता है।
अब जबकि चुनाव में मात्र कुछ महीने ही शेष रह गए हैं फिर भी कांग्रेस की आंतरिक फूट बार-बार उजागर हो रही है। इसने अन्य पार्टियों के मुकाबले में इसके प्रभाव को बहुत सीमा तक कम किया है। विगत अवधि में पार्टी हाईकमान द्वारा अमरिन्द्र सिंह राजा वड़िंग को पद पर बनाए रखने की घोषणा के बाद पार्टी की आंतरिक लड़ाई और भी तेज़ हो गई थी। उस समय छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल प्रदेश पार्टी के प्रभारी थे। उन्होंने इस फूट को खत्म करने के लिए बड़े यत्न शुरू ज़रूर किए थे परन्तु वह इसमें सफल नहीं हो सके, अपितु एक गुट ने यह आरोप भी लगाया कि वह दूसरे गुट का अधिक पक्ष ले रहे हैं। इसलिए भूपेश बघेल द्वारा बुलाई गई बैठकों में एक गुट शामिल नहीं होता रहा था। इसकी बजाये उस गुट द्वारा अलग बैठकें करके बगावती स्वर भी अलापे जाते रहे। हाईकमान लम्बी अवधि तक इस विवाद के दृश्य को ज़रूर देखती रही है, परन्तु उसकी ओर से कोई ऐसे गम्भीर यत्न नहीं किए गए कि वह पार्टी में कोई एकजुटता पैदा कर सके। एक तरफ कांग्रेसी अभी भी आपसी विवाद में लगे हुए हैं, दूसरी तरफ आम आदमी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी चुनाव के लिए लगातार अपनी योजनाबंदी कर रही हैं। जहां आम आदमी पार्टी लगातार प्रदेश भर में लामबंदी करने के लिए यत्नशील है, वहीं भाजपा भी बूथ स्तर तक अपने सम्पर्क बनाने के यत्न कर रही है।
इन परिस्थितियों में अब भूपेश बघेल के स्थान पर राजस्थान के पूर्व उप-मुख्यमंत्री सचिन पायलट को पंजाब कांग्रेस की ज़िम्मेदारी सौंपी गई है। इसके बाद पायलट ने दिल्ली में विशेष रूप से राहुल गांधी और प्रियंका गांधी से भेंटवार्ता की है। आगामी सप्ताह वह पंजाब का दौरा कर रहे हैं। उसके बाद ही राहुल गांधी द्वारा प्रदेश में बस यात्रा करने की संभावना है, परन्तु इस सब कुछ के बावजूद प्रदेश कांग्रेस में सब कुछ अच्छा दिखाई नहीं दे रहा। अलग-अलग गुट अपनी-अपनी गतिविधियां करते दिखाई दे रहे हैं, जिन्होंने हालात को और भी जटिल बना दिया है। विगत दिवस चरणजीत सिंह चन्नी ने जालन्धर में अपने साथियों का इकट्ठ करके एक तरह से शक्ति प्रदर्शन किया और राजा वड़िंग ने चंडीगढ़ में भारी संख्या में अपने समर्थकों को साथ लेकर पंजाब सरकार के विरुद्ध रोष प्रदर्शन किया। इन दोनों गतिविधियों में या तो बड़े कांग्रेसी नेताओं ने भाग नहीं लिया या ऐसा करते हुए वह अलग-अलग गुटों में विभाजित दिखाई देते रहे। ऐसी स्थिति में सचिन पायलट इस विवादपूर्ण स्थिति को कैसे ठीक कर सकेंगे और पार्टी को आगामी चुनाव में किस तरह मुकाबले के लिए तैयार करने में समर्थ हो सकेंगे, इस सवाल का जवाब इस समय ढूंढना बेहद कठिन दिखाई देता है।

—बरजिन्दर सिंह हमदर्द

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