आईडीएफसी बैंक घोटाला मामले में 6 आईएएस अधिकारियों पर गंभीर आरोप
पंचकूला, 25 सितंबर (कपिल)- हरियाणा के कथित आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक मामले में सीबीआई की चार्जशीट में 6 आईएएस अधिकारियों की भूमिका को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। चार्जशीट में साकेत कुमार, आर.के. सिंह, पंकज अग्रवाल, प्रदीप कुमार, विनीत गर्ग और मोहम्मद शाइन के नाम शामिल हैं।
चार्जशीट के मुताबिक अधिकारियों पर कथित साजिश रचने, सरकारी राशि निजी बैंकों में ट्रांसफर करवाने, बैंक चयन और एफडी निवेश में नियमों का उल्लंघन करने तथा रिश्वत या अन्य अनुचित लाभ लेने के आरोप लगाए गए हैं।
चार्जशीट में आईएएस पंकज अग्रवाल के लिए कथित तौर पर मुजरा पार्टियों, होटल में ठहरने और महिलाओं की व्यवस्था करवाने के आरोप भी दर्ज हैं। जीरकपुर के एक होटल में नवंबर 2025 से जनवरी 2026 के बीच 4 पार्टियां होने का उल्लेख है। इसके अलावा चंडीगढ़ और मोहाली के होटलों में महिलाओं को बुलाने और उनके खर्च का भुगतान बैंक अधिकारी रिभव ऋषि द्वारा किए जाने का आरोप है।
आईएएस साकेत कुमार पर बैंक खाते खोलने के लिए नियमों की अनदेखी करने और आईडीएफसी तथा एयू बैंक में सरकारी राशि निवेश करवाने में भूमिका निभाने के आरोप हैं। चार्जशीट में 29 दिसंबर 2025 को एचपीजीसीएल पेंशन फंड ट्रस्ट से 25 करोड़ रुपये निकालकर आईडीएफसी में जमा करवाने की कथित साजिश का भी उल्लेख किया गया है।
हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के तत्कालीन चेयरमैन विनीत गर्ग पर आईडीएफसी बैंक को निवेश में प्राथमिकता देने और कथित तौर पर 50-50 ग्राम के दो सोने के सिक्के प्राप्त करने के आरोप लगाए गए हैं। वहीं आर.के. सिंह के घर 50 लाख रुपये और उनके बेटे को दिल्ली में 3 किस्तों में 2 करोड़ रुपये दिए जाने का भी चार्जशीट में आरोप है।
मोहम्मद शाइन पर आईडीएफसी में 50 करोड़ रुपये जमा करवाने और बैंक को सरकारी निवेश में फायदा पहुंचाने में भूमिका निभाने का आरोप है। चार्जशीट के मुताबिक बैंक अधिकारी द्वारा शाइन से संबंधित होटल-रेस्टोरेंट के करीब 3.67 लाख रुपये के बिल भी अदा किए गए।
प्रदीप कुमार पर आईडीएफसी बैंक में निर्धारित 50 करोड़ रुपये की सीमा के बावजूद निवेश को 63.68 करोड़ रुपये तक पहुंचने देने तथा एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक की 8.45 प्रतिशत ब्याज दर को 8.25 प्रतिशत दर्शाकर आईडीएफसी की दर को अधिक दिखाने के आरोप लगाए गए हैं। सीबीआई की चार्जशीट में इन मामलों से जुड़े दस्तावेजों, कॉल रिकॉर्ड और गवाहों के बयानों को भी सबूत के तौर पर दर्ज किया गया है।

