SC ने हाई कोर्ट से दिल्ली जिमखाना क्लब को अपने कब्ज़े में लेने के केंद्र के फैसले के खिलाफ याचिका पर विचार करने को कहा
नई दिल्ली, 5 अक्टूबर (PTI) सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को दिल्ली हाई कोर्ट से दिल्ली जिमखाना क्लब के 11 सदस्यों की याचिका पर विचार करने को कहा, जिन्होंने क्लब की 27.3 एकड़ की जगह को अपने कब्ज़े में लेने के केंद्र के फैसले और उसके बाद बेदखली की कार्रवाई को चुनौती दी थी।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की बेंच को क्लब के सदस्यों की ओर से पेश सीनियर वकील विकास सिंह ने बताया कि दिल्ली हाई कोर्ट ने इस आधार पर उनकी याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया कि सिर्फ क्लब ही केंद्र के फैसले को चुनौती दे सकता है।
सिंह ने कहा कि हाई कोर्ट ने सदस्यों से सुप्रीम कोर्ट से यह क्लैरिफिकेशन लेने को कहा कि वे वहां भी याचिका दायर कर सकते हैं।
टॉप कोर्ट ने उन्हें आपत्तियों के अधीन हाई कोर्ट जाने की अनुमति दी, जो दूसरी तरफ से मेंटेनेबिलिटी और अन्य कानूनी विरोधों के संबंध में उठाई जा सकती हैं।
11 सदस्यों की ओर से पेश हुए सिंह ने पहले बेंच को बताया था कि केंद्र सरकार की बनाई एक कमेटी अभी क्लब को मैनेज कर रही है, और वह सरकार के साथ कानूनी लड़ाई नहीं लड़ सकती।
3 सितंबर को, केंद्र ने एक अलग मामले में दिल्ली हाई कोर्ट को बताया कि वह सफदरजंग रोड पर क्लब को उसकी जगह से निकालने के संबंध में 16 सितंबर तक उसके खिलाफ कोई ज़बरदस्ती की कार्रवाई नहीं करेगा।
हाई कोर्ट क्लब के सदस्य विजय खुराना और अन्य लोगों की याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें लैंड एंड डेवलपमेंट ऑफिस (L&DO) के एक एस्टेट ऑफिसर द्वारा क्लब के मैनेजमेंट को निकाले जाने के लिए 29 जून को जारी किए गए कारण बताओ नोटिस पर रोक लगाने की मांग की गई थी।
विपिन अग्रवाल और क्लब के 10 अन्य सदस्यों ने वकील नितिन सलूजा के ज़रिए दायर अपनी याचिका में L&DO द्वारा 22 मई को जारी किए गए रिज्यूमेशन नोटिफिकेशन और एस्टेट ऑफिसर द्वारा 29 जून को जारी किए गए कारण बताओ नोटिस को रद्द करने की मांग की थी।

