पाकिस्तान की मुश्किलों में वृद्धि
विगत लम्बी अवधि से पड़ोसी देश पाकिस्तान अनेकानेक मुश्किलों में घिरा हुआ है। इसकी आर्थिकता पूरी तरह डावांडोल होती दिखाई दे रही है। इसीलिए अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय एजेंसियों ने भी इसे ब्याज पर और ऋण देने में आना-कानी करनी शुरू कर दी है। इसके कुछ मुस्लिम मित्र देशों जो वित्तीय पक्ष से बहुत समर्थ दिखाई देते हैं, ने भी इससे दामन छुड़ाना शुरू कर दिया है। खाड़ी के देश अमरीका और ईरान के बीच छिड़े युद्ध के कारण बेहद कठिन दौर से गुज़र रहे हैं। ऐसे समय में लड़खड़ाते देश को पाकिस्तानी सरकार के प्रमुख प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ और सेना प्रमुख आसिम मुनीर सम्भाल पाने में असमर्थ दिखाई दे रहे हैं। बलोचिस्तान ने इस देश के जन्म से ही इसके नाक में दम करके रखा है। बलोचों के पास इस देश की धरती का अधिक हिस्सा है। खनिजों से भरपूर इस हिस्से के स्थानीय लोगों को यह शिकायत रही है कि पाकिस्तान वहां के हितों की अनदेखी करके न सिर्फ इसके प्राकृतिक खज़ानों को लूट रहा है, अपितु चीन जैसे देश को बलोचिस्तान में बड़े प्रोजैक्ट लगाने की इजाज़त देकर और सीधा सड़क मार्ग से जोड़ कर बलोचों के हितों को नुकसान पहुंचा रहा है।
अ़फगानिस्तान के साथ लगता प्रांत ़खैबर पख्तूनख्वा भी अ़फगानिस्तान के साथ चल रहे सीमांत विवाद के कारण और वहां पाकिस्तानी तालिबान की बढ़ रही कार्रवाइयों के कारण पाकिस्तान के लिए बड़ा ़खतरा बना रहा है। अलगाववादी संगठनों के अतिरिक्त ़खैबर पख्तूनख्वा में पाकिस्तान तहरीक-ए-इन्साफ पार्टी की सरकार का मुख्यमंत्री सुहेल अ़फरीदी अपने नेता इमरान खान की नज़रबंदी के विरुद्ध प्रदेश भर में बड़ी लामबंदी कर रहा है। इमरान खान आज भी पाकिस्तान के बड़े नेता हैं। पिछले तीन वर्ष से उन्हें केन्द्र सरकार जिसके प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ हैं और सेना प्रमुख आसिम मुनीर ने जेल में कैद कर रखा है। उन्हें अगस्त 2023 में रावलपिंडी की अडियाला जेल में बंद कर दिया गया था। उन पर लगभग 100 से अधिक मामले दर्ज हैं। तीन मामलों में उन्हें सज़ा भी सुनाई गई है, जिसमें अल़कादिर ट्रस्ट मामले में 14 वर्ष, दस्तावेज़ लीक मामले में 10 वर्ष और तोशाखाना मामले में 3 वर्ष की सज़ा हुई है। उनकी पत्नी बुशरा बीबी भी जेल में हैं। उनकी बहनें अलीमा, उज़मा और नूरीन भी नज़रबंद हैं। इसके साथ ही पाक अधिकृत कश्मीर में विगत लम्बी अवधि से लोगों में रोष भड़का हुआ है। बेरोज़गारी, महंगाई और खराब कानून व्यवस्था ने वहां के लोगों के नाक में दम किया हुआ है। यहां तक कि वे अब भारत के जम्मू-कश्मीर में विलय होने के पक्ष में नारे बुलंद कर रहे हैं। अब इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इन्स़ाफ के नेताओं ने केन्द्र सरकार के विरुद्ध आर-पार की लड़ाई लड़ने का फैसला कर लिया है।
़खैबर पख्तूनख्वा से मुख्यमंत्री सुहेल अ़फरीदी के नेतृत्व में लांग मार्च (लम्बा मार्च) शुरू हो चुका है। अ़फरीदी ने कहा है कि 8 अक्तूबर से शुरू यह मार्च राजधानी इस्लामाबाद पहुंच कर सरकार और सेना की जड़ें हिला देगा। उन्होंने यह भी कहा है कि पार्टी लोकतांत्रिक ढंग से मांगें उठा रही है, परन्तु यदि हालात हद से पार होने लगे तो लोगों के रोष को सम्भाल पाना किसी के बस में नहीं रहेगा। शहबाज़ शऱीफ की गठबंधन वाली सरकार ने हालात के दृष्टिगत विगत दिवस बातचीत का मार्ग अपनाया था परन्तु बातचीत किसी किनारे नहीं पहुंच सकी। विगत रविवार 4 अक्तूबर को इस लम्बे मार्च की शुरुआत कर दी गई। इस्लामाबाद वहां से लगभग 275 किलोमीटर दूरी पर है। ट्रकों, बसों और कारों के चलते क़ािफले को जगह-जगह पर भारी समर्थन मिल रहा है। चाहे केन्द्र सरकार द्वारा इस मार्च रोकने के लिए हज़ारों की संख्या में रेंजर तैनात कर दिए गए हैं और रास्तों में व्यापक स्तर पर कंटेनर और तारें लगा कर हर हाल में इस मार्च को राजधानी में दाखिल न होने देने के प्रबंध किए गए हैं। इससे प्रतीत होता है कि मौजूदा समय में सेन्य प्रमुख आसिम मुनीर इमरान खान की पार्टी के साथ बातचीत करके किसी समझौते पर पहुंचने के लिए तैयार नहीं हैं।
यदि पाकिस्तान में हालात ऐसे ही बने रहे तो पहले ही डावांडोल इस देश के लिए लांग मार्च भी और बड़ी चुनौती बनकर सामने आएगा,जिसका मुकाबला करने के लिए उसे बड़ी जद्दोजहद करनी पड़ेगी।
—बरजिन्दर सिंह हमदर्द

