कानून व्यवस्था को चुनौती देते गैंगस्टर
देश में संगठित अपराध और गैंगस्टरों की बढ़ती गतिविधियां कानून-व्यवस्था के लिए एक चुनौती बन चुकी हैं। हाल के महीनों में साबरमती जेल में बंद गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के सिंडिकेट और अन्य आपराधिक गिरोहों ने देश के कई राज्यों में सुरक्षा एजेंसियों की नाक में दम कर रखा है। फिल्म अभिनेताओं, राजनेताओं और व्यापारियों को निशाना बनाकर सरेआम की जा रही गोलीबारी और हत्या की वारदातों ने शासन-प्रशासन के इकबाल पर बड़े सवाल खड़े किए हैं।
बीते दिनों बॉलीवुड अभिनेता टाइगर श्रॉफ पर हुआ हमला इसका हालिया उदाहरण है। जो बताता है कि गैंगस्टर कैसे कानून व्यवस्था को खुलेआम चुनौतियां दे रहे हैं। पहले भी सलमान खान व रोहित शेट्टी जैसे सितारे और फिल्म निर्माता गैंगस्टरों के निशाने पर रहे हैं। जो बताता है कि महाराष्ट्र की राजधानी मुम्बई में अब भी संगठित अपराध कानून व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बने हुए हैं। यह सराहनीय है कि मुम्बई पुलिस की खुफिया सूचनाओं की मदद से कोटा रेलवे स्टेशन से तीन संदिग्ध हमलावरों को राजस्थान पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। टाइगर श्रॉफ की कार पर गोलीबारी के बाद सबसे पहला सवाल यही था कि क्या बॉलीवुड में अंडरवर्ल्ड का पुराना ख़ौफ़ लौट रहा है? देश में कानून-व्यवस्था के समांतर अपराध की सत्ता चलाने वाले गिरोहों का इतिहास पुराना रहा है। बेशक समय के साथ अपराधी संगठनों के नामकरण और अपराध के तौर-तरीके ज़रूर बदले हों, लेकिन उनका खौफ गाहे-बगाहे बना रहा। कभी मुम्बई हाजी मस्तान और दाऊद से लेकर छोटे राजन के गैंगवार की साक्षी रही है। अब वहां नये सिरे से गैंगस्टरों का दखल बढ़ रहा है।
नि:संदेह, इन मामलों को महज धमकियों और जबरन वसूली तथा हिंसा की इक्का-दक्का घटनाओं के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। वास्तव में ये समाज में लगातार गहरी होती जाती एक गंभीर समस्या के लक्षण हैं। समय रहते ऐसे गैंगस्टरों को नियंत्रित करना बहुत ज़रूरी है। दरअसल, पुलिस की शुरुआती जांच से पता चला है कि इस हमले के संदिग्ध हमलावरों में से एक का संबंध लॉरेंस बिश्नोई गिरोह के कथित साथी से है। यह उल्लेखनीय है कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में आए लॉरेंस बिश्नोई साल 2015 से जेल में बंद है। ऐसे में सवाल उठता है कि कड़ी पुलिस सुरक्षा में जेल में बंद लॉरेंस बिश्नोई का नाम गाहे-बगाहे विभिन्न अपराधों में संलिप्तता के रूप में कैसे उछाला जाता है? भारत ही नहीं, उसके साथी यूरोप व अमरीका में सक्रिय बताये जाते हैं। कुछ समय पहले उसके करीबी सहयोगियों में से एक, करमवीर सिंह को कनाडा से डिपोर्ट किया गया था। पिछले महीने पंजाब पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया था। वहीं दूसरी ओर लॉरेंस बिश्नोई के भाई अनमोल को नवम्बर 2025 में अमरीका से डिपोर्ट किया गया था। उसके उपरांत नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (एनआईए) ने उसे गिरफ्तार कर लिया था। दरअसल, यह मामला आपराधिक गिरोहों और आतंकी समूहों के बीच सांठगांठ से जुड़ा बताया जाता है।
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सुरक्षा कारणों और लोक व्यवस्था का हवाला देते हुए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 303 लागू की है, जिसके तहत लॉरेंस बिश्नोई जैसे अपराधियों को गुजरात की साबरमती जेल से बाहर ले जाने या मुम्बई पुलिस की प्रत्यक्ष हिरासत में देने पर रोक है। इस वजह से जांच एजेंसियां केवल जेल के अंदर ही पूछताछ कर पा रही हैं, जिससे बड़ी साज़िशों का पूरी तरह पर्दाफाश करने में बाधा आ रही है। विपक्षी दल सरकार पर संगठित अपराध पर लगाम लगाने में विफल रहने का आरोप लगा रहे हैं।
आजकल गैंगस्टरों द्वारा किए गए अपराध या धमकियों को सोशल मीडिया पर खुलेआम पोस्ट किया जाता है। कई युवा आर्थिक तंगी के चलते या पैसों के लालच में इन गैंग्स के संपर्क में आ जाते हैं। जेल में बैठे गैंगस्टर भी एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप्स के जरिए आसानी से अपने सिंडिकेट, फिरौती और वारदातों का संचालन करते हैं। हथियारों की तस्करी, नशीले पदार्थों का कारोबार और रियल एस्टेट या जबरन वसूली से इन्हें अकूत कमाई होती है। इस अवैध नेटवर्क का दायरा स्थानीय स्तर से बढ़कर अब अंतर्राष्ट्रीय स्तर तक फैल चुका है। ये गैंग अपनी अवैध कमाई का बड़ा हिस्सा शेल कंपनियों, रियल एस्टेट और क्रिप्टोकरेंसी के जरिए मुख्य बैंकिंग सिस्टम में सफेद कर लेते हैं, जिससे इनकी आर्थिक पकड़ मज़बूत बनी रहती है।आपराधिक गिरोहों को कानूनी व्यवस्था की खामियों का लाभ उठाने से रोकने के लिये देश के विभिन्न राज्यों के बीच लगातार सहयोग होना ज़रूरी है। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी सूचना को लेकर तालमेल बेहद ज़रूरी है। अपराधियों में कानून का डर पैदा करने और जनता में सुरक्षा की भावना बहाल करने के लिए विभिन्न राज्यों की पुलिस के बीच बेहतर समन्वय और जेलों की सुरक्षा व्यवस्था को तकनीकी रूप से पूरी तरह अभेद्य बनाना बेहद ज़रूरी हो गया है। (स्वतंत्र पत्रकार)



