विधानसभा सत्र में पारित हो सकते हैं अहम प्रस्ताव
टूट पड़ती थीं घटाएं जिन की आंखें देख कर,
वो भरी बरसात में तरसे हैं पानी के लिए।
सजाद बाकर रिज़वी के इस शेअर जैसी हालत इस समय पांच नदियों के क्षेत्र तथा अब भी तीन नदियों के कथित मालिक पंजाब की है। चाहे इस समय विधानसभा चुनाव निकट होने के कारण राजनीति ही सबसे अधिक चर्चित मुद्दा और नशा विरोधी राजनीति इस समय केन्द्रीय मुद्दा बना हुआ है। इसीलिए परविन्दर सिंह झोटा की हत्या का मामला बहस के केन्द्र में है, परन्तु इस स्थिति पर बेहिसाब लिखा जा चुका है और अभी लिखा भी जा रहा है। इसलिए इस संबंध में मैं जो भी लिखूंगा, वह पहले कही गई बातों के दोहराव से अधिक कुछ नहीं होगा। आज पंजाब विधानसभा का विशेष सत्र शुरू हो गया है। इसमें इस मामले पर जितना शोर-शराबा हो, जितनी मज़र्ी राजनीति हो, परन्तु सत्र में कुछ प्रस्ताव या बिल, पंजाब के पक्ष में सर्वसम्मति से पारित होने की पूरी उम्मीद है।
क्योंकि संयुक्त किसान मोर्चा के चंडीगढ़ मोर्चे के दौरान सरकार द्वारा कुछ लिखित आश्वासन दिए गए थे। इन प्रस्तावों में सबसे प्रमुख पानी के पिछले समझौतों को रद्द करके पुनर्विचार करने का प्रस्ताव होगा, जो केन्द्र सरकार को रिपेरियन सिद्धांतों के अनुसार पंजाब की तीन नदियों सतलुज, ब्यास और रावी के पानी की मलिकी के अधिकारों को बहाल करने के लिए कहेगा। दूसरा बिल या प्रस्ताव पंजाब पुनर्गठन एक्ट में दर्ज अलोकारी धाराएं जो अकेले पंजाब के साथ जब्री धक्के का मार्ग खोलती हैं, को रद्द करने तथा संसद में रद्द करने की मांग का होगा। इस अवसर पर डैम सुरक्षा एक्ट रद्द करने तथा सम्भावित बीज बिल 2025 को वापस लेने के लिए प्रस्ताव भी पारित हो सकते हैं, जबकि अमरीका के साथ कर-मुक्त व्यापार समझौते में से कृषि को बाहर रखने की मांग का प्रस्ताव भी पारित हो सकता है। इसके साथ ही सहकारी बैंकों के कज़र् का एक ही बार में निपटान करने संबंधी विचार विमर्श भी किया जा सकता है।
कैंसर का तांडव व पानी
गुरबाणी का कथन है कि
पहिला पानी जीओ है जितु हरिआ सभु कोइ।।
(आसा, म:1, अंग 472 )
परन्तु पंजाब का पानी तो अब दूषित हो चुका है। केन्द्रीय भू-जल बोर्ड तथा अन्य स्वास्थ्य संस्थाओं के अनुसार पंजाब का 80 प्रतिशत भू-जल दूषित हो चुका है और पंजाब में फैल रही कैंसर की महामारी का कारण भी यही माना जाता है। पंजाब के भू-जल की पहली 100 फुट परत तो बहुत बुरी हालत में है। इसमें तेज़ाब, नाइट्रेट्स, फ्लोराइड आदि की मात्रा निर्धारित सीमा से बहुत ज़्यादा है। पानी की दूसरी परत जो 100 से 250 फुट तक की है, प्रत्येक वर्ष डेढ़ से 2 फुट नीचे जा रही है, इसमें आर्सेनिक भारी मात्रा में है और पहली परत के ज़हर भी इसमें रिसते जा रहे हैं। परीक्षणों में यूरेनियम तथा अन्य भारी धातुओं की मात्रा भी कई स्थानों पर अधिक है। रिपोर्टों के अनुसार इस परत का पानी आगामी कुछ वर्षों में खत्म होने के आसार हैं, क्योंकि हम धरती में प्रतिदिन रिचार्ज होने वाले पानी से 157 प्रतिशत अधिक पानी धरती में से निकाल रहे हैं, जो देश में सबसे ऊंची दर है। हम प्रतिवर्ष यदि 16.80 बिलियन क्यूबिक फुट पानी धरती से निकालें तो मौजूदा मात्रा कायम रह सकती है, परन्तु इसके विपरीत हम प्रत्येक वर्ष 26.27 बिलियन क्यूबिक फुट पानी इस्तेमाल कर रहे हैं।
पंजाब के पानी की तीसरी परत के बारे में कभी यह माना जाता था कि हमारे पास बहुत शुद्ध पानी का बड़ा भंडार है, परन्तु यह भ्रम अब टूट चुका है। इस तीसरी परत में भारी धातु अभिप्राय हैवी मैटल्स इतनी अधिक हैं कि ये मनुष्य, कृषि और पशुओं के लिए इस्तेमाल करने के योग्य नहीं हैं। इसमें यूरेनियम, कैडमियम, क्रोनियम जैसी धातु भी निर्धारित मात्रा के कहीं अधिक हैं। पानी में यदि यूरेनियम की मात्रा 30 माइक्रोग्राम प्रति लिटर हो तो यह स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित होता है, परन्तु पंजाब के कई ज़िलों में यह मात्रा 475.1 से 531.8 माइक्रोग्राम तक है। यही स्थिति आर्सेनिक की है।
पंजाब में कैंसर पीड़ितों की दर प्रत्येक वर्ष 7 प्रतिशत की दर से बढ़ रही है। देश की राष्ट्रीय औसत 10 लाख पर 800 व्यक्तियों को कैंसर की है, जबकि पंजाब के कुछ क्षेत्रों की औसत 1360 तक पहुंच गई है, हालांकि फाज़िल्का जैसे सबसे प्रभावित ज़िलों में तो 10 लाख लोगों पर 5000 लोगों को कैंसर होने का अनुमान है। पंजाब में महिलाएं पुरुषों से इस प्रकोप की अधिक शिकार हैं और वे राष्ट्रीय औसत से तीन गुणा अधिक प्रभावित हैं। मैडिकल रिसर्चों में पाया गया है कि पंजाब के पानी में मौजूदा कैंसर के कारक तत्व मानवीय शरीर के डी.एन.ए. तक को नुकसान पहुंचा रहे हैं। बात अकेले पेयजल की नहीं। यह पानी सब्ज़ियों, फसलों था जानवरों के मांस के ज़रिये भी मनुष्य को बिमारियों की ओर धकेल रहा है।
पंज-आबों की धरती पर भी
पीने का पानी बिकता है,
किस्मत देखो डूबने वाला भी
प्यासा ही डूब रहा है।
अमरीका-भारत व्यापार समझौते
अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कह दिया है कि भारत-अमरीका व्यापार समझौता सम्पन्न होने के बहुत करीब है। अमरीकी सैक्रेटरी आफ स्टेट मार्को रूबियो ने भी मुम्बई में कहा कि इस समझौते का 99 प्रतिशत मामला निपट चुका है, परन्तु इस समझौते को जिस प्रकार गुप्त रखा जा रहा है, वह भारत तथा विशेषकर भारत के पंजाब तथा हरियाणा जैसे कृषि प्रधान राज्यों को चिन्ता में डाल रहा है। संयुक्त किसान मोर्चा तथा किसान संगठन इस समझौते को ‘मौत का वारंट’ घोषित कर रहे हैं। यदि इसमें डेयरी उत्पादों को छूट दी गई तो यह भारत के 8 करोड़ परिवारों की आय को नुकसान पहुंचा सकता है। सोयाबीन, मक्की तथा ज्वार जैसी फसलों के उत्पादक किसानों को नुकसान होने का अनुमान है। पंजाब को चावल तथा गेहूं के मामले में बेशक प्रत्यक्ष नुकसान की सम्भावना नहीं, परन्तु डेयरी एवं पशु खुराक के लिए आयात होने वाले पदार्थों से अप्रत्यक्ष नुकसान हो सकता है।
इसके विपरीत पंजाब की बासमती के लिए नये बाज़ार खुल सकते हैं। भारत सरकार के सूत्र तो डेयरी क्षेत्र में सुरक्षित रहने का दावा भी कर रहे हैं।
दूसरी ओर भारत तथा रूस से तेल लेने के कारण अमरीका द्वारा लगाए जाने वाले 100 प्रतिशत टैरिफ का खतरा भी टल गया है। इस समय भारत प्रतिदिन रूस से 1.82 बिलियन बैरल तेल खरीद रहा है। भारत की तेल शोधन अभिप्राय रिफाइन करने की सामर्थ्य 5.6 मिलियन बैरल प्रतिदिन है। रिलाइंस अमरीका के साथ 1.66 लाख बैरल प्रतिदिन रिफाइन करने वाले 300 बिलियन डालर का समझौता कर रही है। यह भारत के लिए एक बड़ी उपलब्धि होगी, परन्तु पता नहीं क्यों इस समझौते को संसद तक से छिपाया जा रहा है, जिससे अफवाहें फैल रही हैं। यदि यह सारा मसौदा संसद में पेश किया जाए तथा विपक्षी दलों को साथ लिया जाए तो अधिक अच्छा होगा। अब तो जब अमरीकी विदेश मंत्री समझौते के लिए भारत आए तो बिल्कुल उसी अवसर पर भारत के पैट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी की बदनाम जैफ्री एप्स्टीन के साथ तस्वीरें जारी होने को विपक्ष की ओर से अमरीक द्वारा समझौते के लिए ब्लैकमेल करने के आरोप लगाए जा रहे हैं। दूसरी ओर अमरीकी पूंजीपति एलन मस्क जिनके सैटेलाइट इंटरनैट ‘स्टार लिंक’ को भारत में लाइसैंस मिल चुका है, परन्तु अभी सिक्योरिटी क्लीयलैंस तथा स्पेक्ट्रम मिलने में देर हो रही है, द्वारा मुकेश अम्बानी को व्यंग्य से ‘प्राइम मिनिस्टर अम्बानी’ तथा ‘द रियल बॉस ऑफ इंडिया’ कहना भी कई सवाल खड़े करता है। मिज़र्ा ़गालिब के शब्दों में :
बे-़खुदी बे-सबब नहीं ़गालिब,
कुछ तो है जिसकी पर्दा-दारी है।
-1044, गुरु नानक स्ट्रीट, समराला रोड, खन्ना।
-मो. 92168-60000



