ब्यास में कम हुआ जलस्तर, डाल्फिन व घडियाल हेतु बना खतरा


हरिके पत्तन, 29 मार्च (रितू कुन्द्रा) : ब्यास-सतलुज दरिया के संगम हरिके हैड वर्कस से निकलती राजस्थान फीडर नहर की रिपेयर लिए नहर का पानी बंद कर दिया गया है और पौंग डैम से ब्यास दरिया में आते पानी की आमद बहुत ज्यादा कम कर दी गई है और अब सिर्फ 5557 क्यूसिक पानी ही पौंग डैम से ब्यास दरिया में छोड़ा जा रहा है, जिस कारन ब्यास दरिया के पानी का स्तर 6 फीट तक कम होने कारन जंगली जीव व वण विभाग को हाथों पांवों की पड़ गई है क्योंकि खत्म हो रही 2 अहम प्रजातियां इंडस रिवर डालफिन व घड़ियाल ब्यास दरिया में मौजूद है। घड़ियाल प्रोजैक्ट जो कि 3 महीने पहले ही विभाग द्वारा शुरू कर अब तक 47 घड़ियाल ब्यास दरिया में छोड़े गए थे और पानी में रहने वाले इन जानवरों लिए पानी का कम हुआ स्तर खतरा बन गया है, जिस कारन विभाग के अधिकारी चिंता में है। राजस्थान नहर की रिपेयर जो कि 29 मार्च से 2 मई तक चलनी है और 35 दिन नहर में पानी बंद रहना है और उपर से गर्मी का मौसम भी शुरू हो गया है। अगर पानी का स्तर और कम हो गया तो जंगली जीव व वण विभाग लिए बहुत बड़ी सिरदर्दी पैदा हो जाएगी। हरिके हैड वर्कस यहां कि रोपड़ हैड वर्कस से छोडा जाता पानी सतलुज दरिया के रास्ते व पौंग डैम से छोडा जाता पानी ब्यास दरिया के रास्ते हरिके हैड वर्कस में पहुंचता है और गत वर्ष मार्च में डैम से पानी की आमद बिलकुल बंद कर दी गई थी और हरिके सैंचेरी का क्षेत्र भी पानी ना होने कारण सूख गया है और लाखों की संख्यां में जलचर जीव, मछलियां व कछ्छूकम्मे आदि पानी सूखने की भेंट चढ़ गए थे और अब 1 वर्ष दौरान ही दूसरी बार नहर की बंदी होने कारण सैंचेरी क्षेत्र में रहते जीवों लिए खतरा बन गया है। इस संबंधी जब जंगली जीव व वण विभाग हरिके के डिवीज़नल जंगलात अधिकारी चरनजीत सिंह से बात की गई तो उन्होंने कहा कि पानी कम करने संबंधी हमारे साथ किसी भी विभाग द्वारा कोई सम्पर्क नहीं किया गया और गत 2 दिनों से लगातार पानी 6 फीट कम होने से चिंता बढ़ गई है और अगर पानी का स्तर कम होता गया तो जानवरों लिए खतरा पैदा हो सकता है। उन्होंने कहा कि ब्यास दरिया का क्षेत्र कंजरवेशन रिजर्व घोषित हो चुक्का है और बार-बार पानी की बंदी बहुत नुकसानदेह साबित हो सकती है, जिस कारन कई प्रजातियां खत्म होने का खतरा बना हुआ है। इस संबंधी डब्लयू, डब्लयू, ऐफ की सीनियर प्रोजैक्ट अधिकारी मैडम गीतांजलि कंवर से सम्पर्क किया गया तो उन्होंने कहा कि 2 दिनों दौरान 5 फीट तक पानी का स्तर कम हुआ है और वर्ष में दूसरी बार पानी की बंदी की गई है, अबी तो गत वर्ष मार्च पानी की बंदी कारण हुए जीव के नुकसान की पूर्ति भी नही हो सकी कि दूसरी बार बंदी से और नुकसान होगा। इस संबंधी जब मुख्य जंगली जीव वार्डन पंजाब कुलदीप कुमार से सम्पर्क किया गया तो उन्होंने कहा कि ब्यास दरिया में पानी के कम होने कारन पैदा हुए खतरे को देखते हुए पंजाब सरकार को लिख कर भेज दिया गया है और सरकार इस सबंधी भाखड़ा मैनजमैंट बोर्ड से सम्पर्क करेगी कि घड़ियाल व इंडस रिवर डालफिन को देखते हुए ब्यासा दरिया में पानी जरूरी स्तर पर रखा जाए।