नवाज़ शरीफ के आजीवन चुनाव लड़ने पर रोक


इस्लामाबाद, 13 अप्रैल (भाषा) : पाकिस्तान के अपदस्थ प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ के आजीवन चुनाव लड़ने पर आज रोक लग गई जब उच्चतम न्यायालय ने अपने ऐतिहासिक फैसले में कहा कि संविधान के तहत किसी जन प्रतिनिधि की अयोग्यता स्थाई है। इसके साथ ही तीन बार देश के प्रधानमंत्री रहे नवाज़ शरीफ का राजनीतिक करियर हमेशा के लिए खत्म हो गया। पांच न्यायाधीशों की पीठ ने संविधान के तहत किसी जन प्रतिनिधि की अयोग्यता की अवधि का निर्धारण करने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए सर्वसम्मति से अपना फैसला सुनाया। अदालत संविधान के अनुच्छेद 62 (1)(एफ) पर विचार कर रही थी जिसमें सिर्फ इतना कहा गया है कि किसी जन प्रतिनिधि को विशेष परिस्थितियों में अयोग्य ठहराया जा सकता है, लेकिन अयोग्यता की अवधि नहीं बताई गई है। अनुच्छेद 62 में किसी संसद सदस्य के लिए ‘सादिक और अमीन’ (ईमानदार और न्याय परायण) होने की पूर्व शर्त रखी गई है। गौरतलब है कि इसी अनुच्छेद के तहत 68 वर्षीय शरीफ को 28 जुलाई, 2017 को पनामा पेपर्स मामले में अयोग्य ठहराया गया था। शरीफ को एक और झटका देते हुए अदालत ने कहा कि अयोग्य ठहराया गया कोई भी व्यक्ति किसी राजनीतिक दल का प्रमुख नहीं बन सकता है। इसके बाद उन्हें सत्तारूढ़ पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज के अध्यक्ष की कुर्सी भी गंवानी पड़ी थी। आज के अपने फैसले में उच्चतम न्यायालय ने कहा कि देश के संवैधानिक प्रावधानों के तहत अयोग्य ठहराया गया व्यक्ति फिर से सार्वजनिक पद पर आसीन नहीं हो सकता। इस ऐतिहासिक फैसले से तीन बार के प्रधानमंत्री का राजनीतिक भविष्य हमेशा के लिए खत्म हो गया। 
गौरतलब है कि पिछले साल 15 दिसम्बर को उच्चतम न्यायालय की एक अन्य पीठ ने इसी प्रावधान के तहत पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी के नेता जहांगीर तरीन को अयोग्य ठहराया था। न्यायमूर्ति उमर अता बंदियाल के फैसले में कहा गया है कि भविष्य में किसी भी सांसद या लोक सेवक को अगर अनुच्छेद 62 के तहत अयोग्य ठहराया जाता है तो उन पर यह प्रतिबंध स्थायी होगा। उन्होंने कहा कि ऐसे व्यक्ति चुनाव नहीं लड़ सकेंगे और न ही संसद के सदस्य बन सकेंगे। शरीफ ने जनवरी में पीठ के समक्ष एक लिखित बयान में कहा था कि अनुच्छेद 62 के तहत वर्तमान कार्यकाल के लिए ही अयोग्य ठहराया जा सकता है ना कि आजीवन के लिए। सूचना और प्रसारण राज्य मंत्री मर्रियम औरंगजेब ने फैसले को ‘मज़ाक’ बताया है। उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्रियों के साथ भी ऐसा ही मजाक हुआ है और पाकिस्तान के सभी 17 प्रधानमंत्रियों का यही हश्र हुआ है। मर्रियम ने कहा कि बार-बार पाकिस्तान के निर्वाचित नेताओं को अपमानजनक तरीके से हटाया जाता रहा है। उन्होंने कहा, ‘‘शरीफ के खिलाफ पहले फैसला तय कर लिया गया था उसके बाद सुनवाई की गई।’’