मोहाली में मैडीकल कालेज का सपना अभी भी अधूरा


पटियाला, 15 अप्रैल (अ.स.): केन्द्र सरकार ने वर्ष 2014 में देश के राज्यों में स्थित सिविल अस्पतालों को नये मैडीकल कालेजों में बदलने के लिए भारत सरकार और राज्यों की साझा स्कीम शुरू की थी। पहले पड़ाव में 20 राज्यों में बने हुए 58 सिविल अस्पतालों को नये मैडीकल कालेजों में बदलने के लिए चुना गया था, जिस में पंजाब के मोहाली ज़िले का सिविल अस्पताल भी था, परन्तु पंजाब में इस तरफ अभी तक विभागीय कार्रवाई ही चल रही है। इससे पहले पंजाब के फरीदकोट में 1973 में सरकारी मैडीकल कालेज खोला गया था। सूत्रों का कहना है कि भारत सरकार ने मोहाली में सिविल अस्पताल को मैडीकल कालेज में बदलने के लिए 100 करोड़ की राशि भी भेज दी थी, चालू वर्ष में मैडीकल कालेज चलाने के लिए 168 स्टाफ सदस्य और 826 पैरा मैडीकल स्टाफ की भर्ती भी नहीं की गई। मैडीकल कौंसिल आफ इंडिया की टीम द्वारा कालेज स्थापित करने के लिए रखी शर्तें पूरी न होने पर कई बार इस संबंधी मुआयना करने के बाद कौंसिल ने मैडीकल कालेज की मंजूरी नहीं दी है। मोहाली में मैडीकल कालेज बनाने से संबंधित कांग्रेस सरकार ने अपने पहले बजट वर्ष 2017 में ऐलान भी किया था। सूत्रों के अनुसार पंजाब के स्वास्थ्य मंत्री ब्रह्ममहिन्द्रा ने वित्त विभाग की तरफ से मैडीकल कालेज के लिए स्टाफ की भर्ती सम्बन्धित हो रही देरी बारे मुख्यमंत्री पंजाब को अवगत भी करवाया था, जिसके बाद मुख्यमंत्री कैप्टन अमरेन्द्र सिंह ने मैडीकल कालेज संबंधी बकाया पड़े कामों को जल्द पूरा करने संबंधी आधिकारियों को आदेश भी दिए थे। इस संबंधी स्वास्थ्य विभाग के सचिव सतीश चंद्रा ने सम्पर्क करने पर कहा कि वह इस बारे फाईनांस विभाग के साथ बात करेंगे। इस बारे स्वास्थ्य मंत्री ब्रह्ममहिन्द्रा और मैडीकल शिक्षा और खोज विभाग के डायरैक्टर के साथ संपर्क करने की कोशिश की गई परन्तु सम्पर्क नहीं हो सका।