ग्लोबल वार्मिंग का जवाब हो सकता है ग्रीन थार


ग्लोबल वार्मिंग के दुष्प्रभावों के संबंध में अब किसी चेतावनी की जरूरत नहीं है। क्योंकि अब यह भयावह रूप में दिखने लगी है। एक ही समय में कहीं आफत की बारिश तो कहीं आसमान से बरसती आग। ये स्थितियां चीख-चीखकर कह रही हैं कि पानी सर के ऊपर आ चुका है। ग्लोबल वार्मिंग के विरुद्ध जंग में अब एक पल की भी देरी हुई तो आने वाली पीढ़ियां हम जैसे अपने पुर्खों को कभी माफ  नहीं कर पाएंगी। इसीलिये पिछले कई सालों से चलाये जा रहे नीम महोत्सव अभियान को अब हमने ‘ग्रीन थार’ के ग्लोबल अभियान में बदल दिया है। आगामी 21 जुलाई 2019 से जैसलमेर,जोधपुर तथा बीकानेर के संगम स्थल से यह अभियान शुरू हो रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी इसमें आने के लिए आमंत्रित किया गया है। इस महत्वाकांक्षी अभियान के तहत पूरे राजस्थान में 15 करोड़ नीम के पेड़ लगाने की योजना है। ग्रीन थार के परिणामदायक होने पर न केवल राजस्थान बल्कि हरियाणा, पंजाब, गुजरात के कच्छ और पाकिस्तान के सिंध तक की पूरी तस्वीर बदल सकती है। इसके फलीभूत होने पर पूरे इलाके का  तापमान 5 डिग्री तक कम किया जा सकता है। इससे न सिर्फ राजस्थान और कई दूसरे प्रांत आग उगलती गर्मी से बचेंगे बल्कि इससे हिमालय की बर्फ  भी पिघलने से बचेगी। अगर हिमालय की बर्फ  को बढ़ती गर्मी के कारण पिघलने से बचा लिया जाए तो भारत सहित कई सार्क देशों का हर साल जो बाढ़ के कारण भारी भरकम नुकसान होता है (सार्क देशों के सकल घरेलू उत्पाद के 14 फीसदी के बराबर) उसे भी बचाया जा सकता है, जिससे इस क्षेत्र में गरीबी खत्म करने में सहायता मिल सकती है। वास्तव में अगर राजस्थान में 15 करोड़ नीम के पेड़ लगा दिये जाएं तो हिमालय की बर्फ  को तेजी से पिघलने से बचाया जा सकता है। इस अभियान को सफल बनाने के लिए किसी असंभव राशि की जरूरत नहीं है। महज 4000 करोड़ रुपये में इस ग्रीन थार को हासिल किया जा सकता है। अगर केंद्र या राज्य सरकार यह रकम नहीं भी खर्च करना चाहती तो देश के तमाम उद्योपति अपने सामाजिक उत्तरदायित्व वाले अंशदान से भी यह रकम जुटा सकती है। देशभर के उद्योग जगत में राजस्थान के मारवाड़ी उद्योगपतियों का शीर्ष स्थान है। वे चाहें तो अपनी मातृभूमि की सेवा ग्रीन थार को संभव बनाकर कर सकते हैं। यही नहीं इसके लिए उन्हें कोई कुर्बानी भी नहीं देनी, यह सब ये लोग उस पैसे से कर सकते हैं जो पैसा इन्हें सरकार को टैक्स के रूप में देना होता है। वास्तव में उद्योगपति कुल देय टैक्स का 2 फीसदी अपने विवेक से सामाजिक विकास एवं उत्थान में खर्च कर सकते हैं। ग्रीन थार से सिर्फ  इंसानों को ही फायदा नहीं होगा बल्कि बड़े पैमाने पर जानवरों को भी बढ़ती गर्मी से राहत मिलेगी। गौरलतब है कि राजस्थान जैसे मरूस्थलीय इलाके में हाल के सालों में लगातार बढ़ती गर्मी के कारण कई रेगिस्तानी जीव प्रजातियां खत्म हो गई हैं और कई बढ़ती गर्मी के लुप्त होने के कगार पर पहुंच गई हैं। सिर्फ  गर्मी ही नहीं, यहां जानवरों और इंसानों को बड़े पैमाने पर धूल भी झेलनी पड़ती है, जो नीम की क्रमश: बाड़ लगाने से हमेशा-हमेशा के लिए खत्म हो सकती है। हैरानी की बात यह है कि आज जबकि देश के तमाम हिस्सों में गर्मियों के महीने में तापमान 50 डिग्री से भी ऊपर पहुंचने की होड़ में है, तब भी न तो केंद्र सरकार न ही राज्य सरकारें गर्मी से बचाव के लिए सबसे साइंटिफिक उपाय वृक्षारोपण को लेकर गंभीर हैं। जबकि अंग्रेजों ने हिंदुस्तान के बड़े हिस्से में उस समय बड़े पैमाने पर पेड़ लगवाये थे, जब देश का तापमान अधिकतम 37 डिग्री तक ही जाता था। पिछले 70 सालों में देश के अधिकतम तापमान में 13 डिग्री से ज्यादा की वृद्धि हुई है। साफ  हवा के फायदे गिनाने की जरूरत नहीं है और न ही यह बताने की जरूरत है कि नीम का पेड़ किसी भी दूसरे पेड़ के मुकाबले हवा को ज्यादा शुद्ध बनाता है। नीम की लाल पत्तियों से तमाम त्वचा संबंधी परेशानियों को दूर करने के लिए क्रीम बनायी जा सकती हैं। अभी भी ऐसा हो रहा है, लेकिन इसका लाभ गांव के आम लोगों को नहीं मिल रहा। एक बार सरकार नीम को बहुउद्देशीय योजना में शामिल कर लें तो इससे बहुत बड़े पैमाने पर गांव के आम लोगों का आर्थिक और सामाजिक उद्धार हो सकता है। नीम की पत्तियां, नीम के बीज, नीम का तेल, नीम की छाल, नीम की लकड़ी। नीम के पेड़ का ऐसा कौन-सा हिस्सा है जो इंसान की बेहतरी में अपना योगदान नहीं करता। बस एक बार यह बात सरकारों की समझ में आ जाये तो नीम के जरिये ग्लोबल वार्मिंग से भी अच्छी तरह से निपटा जा सकता है। गांधी जी ने बताया था कि सामाजिकता का महत्व धार्मिकता से ज्यादा है उन्हें इसीलिए महात्मा घोषित किया गया था, जो अपने जीते जी ही नहीं, मरने के बाद भी सभी शंकराचार्यों से बड़े रहे। लोगों को सामाजिक गुरुओं की जरूरत है न कि धार्मिक गुरुओं की। भविष्य की सामाजिकता पर्यावरण सुरक्षा में है जिसे नीम के संरक्षण से हासिल किया जा सकता है।

-इमेज रिफ्लेक्षन सेंटर