क्या महिलाओं ने भी ऐतिहासिक इमारतें बनवाई हैं ?
‘दीदी, आगरा में ताजमहल का निर्माण म़ुगल बादशाह शाहजहां ने अपनी बेगम मुमताज़ महल की याद में कराया था।’
‘हां, यह बात तो सबको मालूम है।’
‘जी। मैं यह कह रहा था कि जब भी ऐतिहासिक इमारतों की बात आती है तो उनके निर्माण का श्रेय किसी पुरुष या राजा को ही दिया जाता है। क्या कोई ऐसी ऐतिहासिक इमारत भी है जिसका निर्माण किसी महिला ने कराया हो?’
‘दुनिया में तो ऐसी बहुत सी इमारतें होंगी।’
‘मैं अपने देश भारत के बारे में जानना चाहता हूं।’
‘भारत में भी मेरी जानकारी में आठ ऐतिहासिक इमारतें तो हैं जिनका निर्माण महिलाओं ने कराया है।’
‘कौन कौन सी?’
‘दिल्ली में हुमायूं का मकबरा तो आपने देखा ही है। इसे साल 1565 में हुमायूं की प्रिय बेबा बेगम ने उनकी याद में बनवाया था। इसी तरह आगरा में सफेद संगमरमर से बना एत्माद-उद-दौला का मकबरा का निर्माण म़ुगल बादशाह जहांगीर की पत्नी नूरजहां ने अपने पिता मिज़र्ा गियास बेग की याद में बनवाया था।’
‘तो महिलाओं या रानियों ने अपने पति या पिता की याद में ही मकबरे बनवाये।’
‘नहीं, केवल ऐसा नहीं है। गुजरात के पाटन में सरस्वती नदी के किनारे रानी की बाव है। इस मशहूर बावड़ी को 11वीं शताब्दी में रानी उदयमती ने अपने पति राजा भीमदेव प्रथम की याद में बनवाया था।’
‘बावड़ी क्या होती है?’
‘सीढ़ीदार कुआं। फिर गुलमर्ग में मोहिनीश्वर शिवालय मंदिर है जिसे कश्मीर के तत्कालीन राजा हरि सिंह की पत्नी महारानी मोहिनी बाई सिसोदिया ने बनवाया था। जब राजा विक्रमादित्य द्वितीय ने पल्लव शासकों पर विजय दर्ज की थी तो उसके उपलक्ष्य में उनकी पत्नी रानी लोकमहादेवी ने कर्नाटक के पट्टढकल में विरुपाक्ष मंदिर का निर्माण कराया था। कोलकाता, पश्चिम बंगाल में हुगली नदी के तट पर दक्षिणेश्वर काली मंदिर है जिसका निर्माण 1855 में रानी रासमणि ने कराया था।’
‘क्या कोई मस्जिद या किला भी महिलाओं ने बनवाये?’
‘भारत की सबसे बड़ी मस्जिदों में से एक ताज-उल-मस्जिद, भोपाल का निर्माण भोपाल की बेगम शाहजहां ने 20वीं शताब्दी में कराया और तुलुवा--सलुवा वंश की रानी चेन्नाभैरदेवी ने कर्नाटक में मिरजान किला बनवाया।’
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