पतझड़ के मौसम में फलों की काश्त

स्वास्थ्य, पौष्टिकता और भोजन के लिए फलों का बहुत महत्व है। विभिन्नता, रोज़गार और किसानों की आर्थिक हालत सुधारने के लिए भी फलों की काश्त ज़रूरी है। किसानों और उपभोक्ताओं में फलों के पौधे लगाने का रूझान दिन-प्रतिदिन बढ़ रहा है। यह जनवरी का महीना है, कड़ाके की ठंड पड़ रही है। इस पतझड़ के मौसम में पौधों के पत्ते झड़ने की वजह से उन पौधों पर ठंड का कोई ज़्यादा विपरीत प्रभाव नहीं पड़ता। जिन फलों के पेड़ों/पौधों के पत्ते दिसम्बर-जनवरी में झड़ जाते हैं, उन्हें पतझड़ वाले फलदार पौधे कहा जाता है। आम फलदार पौधे लगाने वालों को तकनीकी जानकारी नहीं होती और वे फलों के पौधों की ठीक से देखभाल नहीं करते, जिस कारण पौधे फल नहीं देते या मर जाते हैं। किसानों और उपभोक्ताओं को फलों के पौधों के संबंध में ज़रूरी तकनीकी ज्ञान बागवानी विभाग या पंजाब कृषि विश्वविद्यालय से संबंधित विभाग से लेना चाहिए। फलदार पौधे लगाने के लिए जनवरी-फरवरी सही समय है। बागवानों को सत्यापित नर्सरियों से ही पौधे खरीदने चाहिएं।
जनवरी-फरवरी में लगाए जाने वाले फलदार पौधे नाशपाती, आड़ू, अंगूर, अनार, आंवला, अंजीर, फालसा आदि हैं। बागवानी विभाग के उप-निदेशक (सेवानिवृत्त) डॉ. स्वर्ण सिंह मान (जो फलों के विशेषज्ञ हैं और लोगों को मुफ्त सलाह देते हैं) के अनुसार नाशपाती के पौधों को पांच-छह साल बाद सपर (टुंड) लगता है। फल तोड़ते समय सपर टूटने नहीं चाहिएं तभी उन्हें फल की पूरी प्राप्ति होगी। आड़ू, प्योंदी को अधिक घनत्व से 20×5 फुट के अंतराल पर लगाया जा सकता है। अंगूर की फ्लेम सीडलेस और ब्यूटी सीडलेस किस्मों का चयन लगाने के लिए किया जा सकता है। अनार के पौधे को झाड़ी नहीं बनने देना चाहिए। इसे एक ही तने पर रखना चाहिए। फालसा के पौधे को एक ही तने पर रखना चाहिए। इसका फल मई-जून में पक जाता है। अंजीर का फल भी मई-जून में पक जाता है। आलू बुखारा में सतलुज पर्पल किस्म का फल बड़े आकार का होता है, लेकिन इस अकेली किस्म को फल नहीं लगता। इसके साथ काला अमृतसरी किस्म के पौधे भी लगाने पड़ते हैं। पौधे 85:15 के अनुपात में लगाने चाहिएं। काला अमृतसरी किस्म का फल छोटा होता है। इन पौधों को खाद देने का यह उचित समय है। आड़ू, नाशपाती, अलूचा और लीची के पौधों को दिसम्बर-जनवरी में देसी रूड़ी खाद, सिंगल सुपरफॉस्फेट और म्यूरेट ऑफ पोटाश डाल देनी चाहिए। आड़ू के 1-2 साल के पौधे को 10-15 किलो रूड़ी खाद और 3-4 साल के पौधे को 20-25 किलो रूड़ी खाद डाल देनी चाहिए। अनार के पौधे को 5-6 किलो रूड़ी खाद की ज़रूरत होती है। लीची के बड़ी आयु के पौधे को पानी दे देना चाहिए। पपीते को धब्बे के रोग से बचाने के लिए छिड़काव कर देना चाहिए। आड़ू चाहे ठंडे इलाके का फल है, लेकिन अब इसकी ऐसी किस्में भी उपलब्ध हैं, जिन्हें कम ठंड की ज़रूरत होती है। उन्नत किस्में प्रताप, फ्लोरिडा प्रिंस, शान-ए-पंजाब, अर्ली ग्रैंड, प्रभात, शरबती, नेक्ट्रॉन और पंजाब नेक्ट्रॉन उपलब्ध हैं।
बाग लगाने की जगह के आस-पास जामुन, देसी आम, शहतूत, बोगनविलिया, करौंदा, जट्टी खट्टी आदि हवा रोकने वाली बाड़ लगा देनी चाहिए। प्योंद वाली जगह से प्रस्फुटन को लगातार तोड़ते रहना चाहिए। पौधे लगाने से पहले 3×3 फुट का गड्ढा खोद लेना चाहिए। इसमें गली-सड़ी गोबर की खाद (आधी मिट्टी, आधी गोबर की खाद) भर देनी चाहिए। इसके बाद पानी लगा देना चाहिए। वत्तर आने के बाद ही पौधा लगाना चाहिए। पंजाब की हल्की और रेतीली ज़मीन में आमतौर पर ज़िंक की कमी आ जाती है, जिसके लिए 600 ग्राम ज़िंक सल्फेट और 300 ग्राम अनबुझा चूना 100 लीटर पानी में घोल कर छिड़काव करना चाहिए। हल्की ज़मीन में आड़ू के पौधों में लोहे की कमी भी आ जाती है जिसके लिए फैरस सल्फेट 100 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करना चाहिए। हालांकि, यह छिड़काव अप्रैल, जून और अगस्त में हो। रेतीली ज़मीन में अलूचे के पौधों में ज़िंक की कमी को रोकने के लिए 600 ग्राम ज़िंक सल्फेट और 300 ग्राम अनबुझा चूना 100 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करना चाहिए। पंजाब में अमरूद की काश्त का रकबा नींबू जाति के बाद दूसरे स्थान पर है। अमरूद की काश्त हर तरह की मिट्टी में सफल होती है और साल में दो बार फल देता है। इलाहाबादी सफेदा, लखनऊ-49, पंजाब सफेदा, पंजाब किरण, स्वेता, पंजाब पिंक, एप्पल गुआवा और हिसार सफेदा किस्में पीएयू से मिल सकती हैं। हिसार सफेदा बहुत ही पसंदीदा किस्म है। अमरूद की ये किस्में सितम्बर-अक्तूबर के अलावा फरवरी-मार्च में भी लगाई जा सकती हैं। पतझड़ वाले फलदार पौधों की कटाई-छंटाई के लिए भी जनवरी का महीना बहुत सही है। कटाई-छंटाई भी तकनीकी ज्ञान मांगती है। छंटाई के बाद 300 ग्राम ब्लाइटोक्स 100 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करना चाहिए।
ई-मेल : bhagwandass226@gmail.com

#पतझड़ के मौसम में फलों की काश्त