अनिद्रा रोग का इंतज़ार

आजकल जीने का अर्थ किसी न किसी रोग को पाल कर जीना हो गया है। जिसने कोई रोग नहीं पाला, उसने जीवन में कुछ नहीं किया। कुछ न कर पाने की यह बेबसी उसे जीते हुए भी मुर्दा जीव की तरह बना देती है। मुर्दा होने से बचना है, तो कोई न कोई रोग पाल लो।
नौजवानों से लेकर बुढ़ापे तक यह रोग कुछ में नज़र आता है, दारू गोली का रोग। दारू भी वह जो जेब को भाये यानी एक्सपायर्ड, मिलावटी और घर का निकला हुआ दारू। इसे पीकर आदमी ज़मीन से चार इंच ऊपर हो जाता है, और उसे अपना परिवेश स्वर्ग और कूड़े के डम्प पहाड़ नज़र आने लगते हैं। नेताओं के भाषणों और घोषणाओं पर सबसे ऊंची ताली वह बजाता है। उनके सम्मान में निकली शोभायात्राओं में सबसे ऊंचा नारा उसका होता है। सबसे पहले हमने इस रोग की बात की क्योंकि चुनाव लड़ते हुए नेताओं के माल गोदाम में सबसे अधिक पेटियां ऐसे बांटने वाले दारू की ही होती हैं। ऐसा नेता जो सेवा करके नहीं, गरीब बस्तियों में ऐसा दारू बांट कर अंधेरे का मसीहा बनता है। ऐसा मसीहा जो अपने लिए रौशनी का ताज सजाता है। पीढ़ी-दर-पीढ़ी, और अंधेरे की विरासत बांटता है। नशाखोरी के विरुद्ध सशक्त अभियान चला कर अपने कैरियर ग्राफ की सीढ़ियां फांदता चला जाता है। 
इनके मददगार वह आंकड़ा शास्त्री होते हैं, जो हर बरस देश की ऊंची से ऊंची महा-शक्ति बन जाने की घोषणा करते हैं। समझाते हैं, देखो, पहले देश दुनिया की पांचवीं ताकतवर आर्थिक महा-शक्ति था, अब चौथी बन गया है, जल्दी ही तीसरी बनेगा और फिर जब तुम अपनी आज़ादी का शतकीय महोत्सव मना रहे होगे तो अपना देश विकसित होकर दुनिया की पहली बड़ी महा-शक्ति बन जाएगा। आज की सबसे बड़ी आर्थिक महा-शक्ति को पछाड़ देगा अमरीका को क्योंकि बेकारी वहां भी है, अपने देश में कमर तोड़ है। चुनिन्दा धनपति वहां भी शासकों का मार्ग दर्शन करते हैं, और यहां भी लेकिन वहां उनकी शासकों के साथ खुली भागीदारी है। अपने यहां पर्दे के पीछे बैठ कर शासकों को कठपुतलियों की तरह नचाते हैं। कौन-सा देश सर्वोपरि कहलाएगा? बेशक अपना देश जहां बेकारी और महंगाई सहने की क्षमता कहीं अधिक है। तरक्की की हर मंज़िल पर गरीबों में सस्ता अनाज बांटने का रिकार्ड हमने बनाया है। अस्सी करोड़ जनता में हमारा सस्ता अनाज बांटने का रिकार्ड पीछे रह गया। अब तो हमारी आबादी भी दुनिया में सबसे ज्यादा हो गई है। सबसे बड़ी आबादी वाले चीन को हमने पछाड़ दिया। सार्वजनिक क्षेत्र को रोगी घोषित करके देश का निजी क्षेत्र देश में तरक्की का ऐसा विद्युत दौड़ा रहा है, कि अमीर अगर और अधिक अमीर हो गये तो गरीबों की गिनती भी संख्या से असंख्य हो गई। जीता रहे हमारा मुफ्त अनाज बांटने का रिकार्ड। ज्यों-ज्यों इसकी अवधि दुलकी चाल से बढ़ती है, त्यों-त्यों यहां अमीरों की हवेलियां बढ़ कर प्रासाद होती जाती हैं।
अमीरी के बढ़ने की संख्या अगर चकाचौंध पैदा करती है, तो अब यहां समृद्धों में महा-समृद्ध होने की गति भी बढ़ रही है। करोड़पतियों में से अरबपति हो जाने की गति। तथ्य सामने आया है कि जितनी तरक्की हुई उसका आधा भाग या इसे मलाईदार भाग कह लीजिये, दस प्रतिशत धनियों में से एक प्रतिशत के पास चला गया। धनियों का सूचकांक कहता है, आज लखपति मध्य वर्ग कहलाते हैं, और अरबपति समृद्ध। बीच के करोड़पति तो वह द्रुत गति से आगे बढ़ता समूह है जो जल्द से जल्द अरबपति बन जाना चाहता है, और अपनी हालत से अभी तक महा असंतुष्ट है। सूचकांकों ने बताया कि देश के अरबपतियों की संख्या भारत में इतनी बढ़ी है कि वह एशिया में सबसे अधिक हो गई। यह तो बताया कि हमारे देश की आर्थिक विकास दर दुनिया में सबसे अधिक है, और प्रति व्यक्ति आय छलांगें लगा रही है, लेकिन यह नहीं बताया कि अपने देश में लोगों का खुशहाली सूचकांक इतना कम है कि वह पड़ोसी पाकिस्तान, नेपाल और श्रीलंका से भी कम हो गया।
अमीरों की गिनती तो आपने कर ली, लेकिन गरीबों की गिनती कब करोगे? यह क्यों नहीं बताया कि तरक्की की हर मंज़िल बढ़ती हुई गरीबों की भीड़ के कंधों पर खड़ी है। इसे भाग्य नियन्ताओं ने सस्ते और मुफ्त राशन की सान्त्वना परोस कर फटीचर बना दिया है। यह सत्य किसी ने नहीं बताया कि दुनिया के सबसे अधिक गरीबों की आबादी भारत में बसती है, जिसे साल-दर-साल भूख से मरने न देने की गारण्टी पर ज़िन्दा रखा जाता है। बेघर, बेज़मीन और बेकार लोगों की संख्या बढ़ गई है। इनकी गिनती करने लगोगे तो कलम टूट जाएगी। टूटी हुई कलम, टूटे हुए सपनों की इबारत ही लिख सकती है, जिसे हर नये चुनाव पर नारों की चाशनी से परोस दिया जाता है। जनता इसे चाव से स्वीकार करके कभी यह नहीं पूछती कि हमारे पास काम करने की भी क्षमता है। अब हर व्यक्ति को उसकी क्षमता के अनुसार रोज़गार देने की गारण्टी कब दोगे? जी नहीं, सवाल पूछोगे तो देश के भाग्य नियन्ताओं को अनिद्रा का रोग हो जाएगा। आप तो जानते ही हैं, अनिद्रा रोग का हो जाना उनकी सेहत के लिए कितना घातक होगा।

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