क्यों डरते हैं बच्चे ?
अक्सर छोटे बच्चे कुछ खास स्थितियों या नामों को लेकर डरते हैं या उन्हें डराया जाता है। बच्चे अक्सर अंधेरे से डरते हैं। इससे बच्चों के माता-पिता को लगता है कि हमसे कोई कमी रह गई। डर जैसे नकारात्मक भाव पर काबू पाना बेहद ज़रुरी है, ऐसा सोचना सरासर गलत है।
हम क्यों भूल जाते हैं कि डर सकारात्मक सीढ़ी की तरह भी काम करता है, जैसे बच्चा घुटनों से पैरों पर चलते समय संभलता है, गिरने से डरता है तो यह उसके लिए अच्छा है। बच्चों को डर लगने से बचाने के लिए निम्न बातों का ध्यान रखें।
अंधेरे का डर : घुटने चलने वाले बच्चे रात में उठकर बैठ जाते हैं और अंधेरे से डरकर रोने लगते हैं। यह इसलिए कि उन्हें रोशनी और परिचित चेहरों को देखने की आदत पढ़ जाती है। अंधेरे में उन्हें लगता है कि वे अपने जाने-पहचाने माहौल से बाहर छूट गए हैं और असुरक्षित महसूस करते हुए रोने लगते हैं।
तेज़ आवाज : कई बार प्रेशर कुकर की सीटी या वाशिंग मशीन आदि की आवाज से भी बच्चे डर जाते हैं और वहां से भागने की कोशिश करते हैं। ऐसा उन बच्चों के साथ भी होता है जो इन आवाजों को रोज सुनते हैं। यदि पालक बच्चे को मशीन से संबंधित जानकारी व आवाज से परिचित करवाएंगे तो डर निकल जाएगा।
बिछड़ने का डर : माता-पिता या भाई बहन के नजर न आने से बच्चा तकरीबन डेढ़-दो साल डरता और रोता है। अगर आप खेल-खेल में भी छुप जाएं तो वह डर कर रोने लगता है क्योंकि सिर्फ अपने सामने मौजूद लोगों को जानता है। (उर्वशी)



