कितने ताकतवर साबित होंगे नेपाल के बालेन शाह ?

भारत की सीमा से जुड़े देश नेपाल के नये राजनीतिज्ञ के रूप में उभरे बालेन शाह एक ऐसा नाम बन गये हैं जिसने पारंपरिक दलों की राजनीति को चुनौती देकर एक मिसाल कायम कर दी है। पिछले साल हुए जेन-जी आंदोलन के बाद नेपाल में यह पहला आम चुनाव है। काठमांडू महानगर के पूर्व मेयर के रूप में उनकी पार्टी की जीत ने यह संकेत दिया कि जनता अब पुराने राजनीतिक ढांचे से हटकर नए और स्वतंत्र नेतृत्व को अवसर देने के लिए तैयार है। इंजीनियर, रैपर व सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में पहचाने जाने वाले बालेन शाह की लोकप्रियता मुख्यत: उनकी साफ-सुथरी छवि और सिस्टम को बदलने के वादे पर खरे उतरने वाले राजनेता होने के कारण है। 
नेपाल में संसदीय लोकतंत्र की व्यवस्था है और वहां की संसद दो सदनों से मिलकर बनी। इनमें निचला सदन प्रतिनिधि सभा और ऊपरी सदन राष्ट्रीय सभा कहलाता है। प्रतिनिधि सभा को भारत की लोकसभा की तरह माना जाता है। ऐसे में उनकी पार्टी नेपाल के संसदीय चुनाव के नतीजे देश की राजनीति में बड़े बदलाव का संकेत दे रहे हैं, वहीं नेपाल में पिछले काफी समय से युवाओं के बीच राजनीति को लेकर बढ़ती सक्रियता देखने को मिली है। पिछले साल हुए जेन-जी आंदोलन के बाद देश में यह पहला आम चुनाव है। उस आंदोलन के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली को इस्तीफा देना पड़ा था और सांसद भंग कर दी गई थी।
हम बात करे तो बालेन शाह की तो उन्होंने मेयर बनने के बाद अचानक अपने वायदे अनुसार काठमांडू में अतिक्रमण हटाने, अव्यवस्थित शहरी ढांचे को सुधारने और प्रशासनिक पारदर्शिता लाने जैसे कई कदम उठाए जिससे वह इन फैसलों के कारण आम  से खास बनते चले गए। इस सबमें खास बात यह है कि बालेन शाह किसी बड़े राजनीतिक दल से नहीं जुड़े हैं, फिर भी उन्होंने स्थापित नेताओं को हराकर सत्ता तक पहुंच बनाई। यह बदलाव नेपाल की राजनीति में एक नई सोच का संकेत देता है। अब सवाल उठता है कि वह नेपाल में चेहते तो बन गए पीएम बनते हैं तो क्या उनकी वास्तविक ताकत कितनी होगी। स्थानीय निकाय के प्रमुख के रूप में उनकी शक्तियां सीमित थी, कई बड़े निर्णय प्रांतीय या केंद्रीय सरकार के स्तर पर लिए जाते हैं। ऐसे में कई बार उनकी योजनाएं नौकरशाही या ंराजनीतिक खींचतान में फंस जाती हैं। यही वजह है कि लोकप्रियता के बावजूद उनके सामने व्यवस्था की जटिलताएं बड़ी चुनौती बनकर खड़ी हैं। इसके बावजूद बालेन शाह की सबसे बड़ी ताकत जनता का भरोसा है। यदि वह अपने काम और पारदर्शी प्रशासन से लोगों का विश्वास बनाए रखते हैं, तो उनकी राजनीतिक भूमिका केवल काठमांडू तक सीमित नहीं रहेगी। भविष्य में वे नेपाल की राष्ट्रीय राजनीति में भी प्रभावशाली भूमिका निभा सकते हैं।
अगर हम उनकी कर्मठ राजनीति की बता करें तो नेपाल की राजनीति में अचानक उभरे युवा चेहरों में बालेन शाह का नाम सबसे प्रमुख है। पेशे से इंजीनियर और पहले एक लोकप्रिय रैपर रहे शाह ने 2022 में काठमांडू महानगर के मेयर का चुनाव जीतकर पारंपरिक राजनीतिक दलों को चौंका दिया। उनकी जीत को युवाओं की उम्मीद व भ्रष्ट राजनीति के खिलाफ जनाक्रोश का प्रतीक माना गया। सवाल यह है कि मेयर बनने के बाद वे कितने कारगर साबित हुए? बालेन शाह के कार्यकाल की शुरुआत काफी आक्रामक और प्रतीकात्मक कदमों से हुई। शहर में अवैध कब्जों और अतिक्रमण के खिलाफ उन्होंने बुलडोज़र अभियान चलाया, जिससे कई इमारतों और संरचनाओं को हटाया गया। लाखों नेपाली भारत में काम करते हैं, दोनों देशों के बीच व्यापार व आवागमन बेहद सहज है। इसलिए किसी भी नेता के लिए यह ज़रूरी है कि वह राष्ट्रीय हित के साथ-साथ इन ऐतिहासिक संबंधों की संवेदनशीलता को भी समझे। बालेन शाह जैसे युवा नेताओं से उम्मीद यही है कि वे नेपाल के विकास और स्वाभिमान को मजबूत करने के साथ-साथ पड़ोसी देशों के साथ सहयोग का रास्ता भी खुला रखें।
(अदिति फीचर्स)

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