भारत तीसरी बार बना टी-20 का विश्व चैम्पियन

ऐसा पहली बार हुआ यानी इतिहास रचा गया। आईसीसी टी-20 वर्ल्ड कप (पुरुष) को 8 मार्च 2026 से पहले किसी मेज़बान देश ने नहीं जीता था और न ही किसी ने अपनी बादशाहत को बरकरार रखते हुए इस ट्राफी को लगातार दो बार उठाया था। इतना ही महत्वपूर्ण यह भी कि रिकॉर्ड तीन बार भी इसे किसी ने नहीं जीता था। भारत ने यह तीनों कारनामे कर दिखाये और वह अहमदाबाद के उसी नरेन्द्र मोदी स्टेडियम में, जहां नवम्बर 2023 के ओडीआई विश्व कप के फाइनल में ऑस्ट्रेलिया से शिकस्त हासिल करने के बाद सभी भारतीय खेल प्रेमियों के दिल टूट गये थे। जिस दिन 2026 टी-20 विश्व कप का खेल कार्यक्रम घोषित किया गया था, उस दिन भारतीय कप्तान से मालूम किया गया था कि वह अहमदाबाद में फाइनल किस टीम के विरुद्ध खेलना चाहते हैं, तो उनका जवाब तुरंत था- ‘ऑस्ट्रेलिया से’। ज़ाहिर है वह नवम्बर 2023 के ज़ख्मों पर मरहम लगाना चाहते थे, जिसकी टीस आज तक खेल प्रेमी महसूस करते हैं। ऑस्ट्रेलिया तो ग्रुप स्टेज में ही प्रतियोगिता से बाहर हो गया, लेकिन उसका पड़ोसी न्यूज़ीलैंड भारत को टक्कर देने के लिए फाइनल में पहुंचा और भारत ने मार्च 2026 के मुकाबले को नवम्बर 2023 के मुकाबले की ही तरह ‘नो-कांटेस्ट’ बनाते हुए एकतरफा जीत हासिल की, जो रिकॉर्ड बन गई। भारत ने पहले बल्लेबाज़ी करते हुए पांच विकेट के नुकसान पर 255 का विशाल स्कोर खड़ा किया और फिर 19 ओवर में न्यूज़ीलैंड को मात्र 159 पर समेटकर रिकॉर्ड 96 रन के अंतर से ट्राफी उठा ली। इस प्रकार भारत पहली टीम बनी जिसने सफलतापूर्वक अपने खिताब की रक्षा की, तीन टी-20 खिताब जीते और अपने घरेलू मैदान पर यह कारनामा अंजाम दिया। 
गौरतलब है कि भारत ने यह ट्राफी सबसे पहले इस प्रतियोगिता के पहले संस्करण में महेंद्र सिंह धोनी (2007) के नेतृत्व में जीती थी, फिर रोहित शर्मा (2024) की कप्तानी में और अब (2026) सूर्यकुमार यादव ने इसे उठाया है। हालांकि क्रिकेट टीम गेम है, लेकिन टी-20 के इस खिताबी सफर तक कुछ खिलाड़ियों का व्यक्तिगत प्रदर्शन इतना महत्वपूर्ण रहा कि अगर वह देखने को न मिलता तो कहानी शायद कुछ और ही लिखी जाती। दरअसल, विश्व कप तक जाने वाले मार्ग में अनेक बाधाएं व मुश्किलें मौजूद थीं, जिन्हें दूर करने के लिए किस्मत से, ज़रूरत के हर अवसर पर, किसी एक (या दो) खिलाड़ी ने अपना हाथ खड़ा किया, मैच जिताने वाला प्रदर्शन किया और कारवां आगे बढ़ता हुआ अपनी मंज़िल तक पहुंच ही गया। इस सिलसिले में पांच खिलाड़ियों का विशेषरूप से उल्लेख करना आवश्यक है। अमरीका के खिलाफ पहले ही मैच में भारत की पारी 6 विकेट खोकर 77 रन पर लड़खड़ा रही थी कि कप्तान सूर्यकुमार यादव ने मात्र 49 गेंदों में 84 रन की नाबाद कप्तानी पारी खेलकर कश्ती को किनारे लगाया और अमरीका को भयंकर उथल-पुथल करने से रोका। सूर्या 15 गेंदों में 17 रन बनाकर खेल रहे थे कि उनका कैच छोड़ दिया गया, इस जीवनदान का असर यह हुआ कि सूर्या ने जो स्वयं अंतिम 18 गेंदें खेलीं उनमें 48 रन बनाये, जिसमें अंतिम ओवर में 21 रन शामिल थे और नतीजतन भारत ने 9 विकेट खोकर 161 रन का स्कोर किया व मैच मुहम्मद सिराज (3 विकेट) व अर्शदीप (2 विकेट) की प्रभावी गेंदबाज़ी की बदौलत आसानी से 29 रन से जीत लिया। इसी तरह जिस मैच में हर बैटर घुमाव लेती पिच पर संघर्ष कर रहा था तो ईशान किशन ने 40 गेंदों में 77 रन की पारी खेलकर पाकिस्तान के हौसले पस्त कर दिये और भारतीय टीम के टेम्पो को गति दी। ईशान को उस दिन खेलता हुआ देखकर ऐसा लग रहा था जैसे वह अन्यों की तुलना में किसी अन्य विकेट पर खेल रहे थे। उनकी वजह से भारत ने कठिन पिच पर 7 विकेट खोकर 175 रन बनाये और पाकिस्तान को मात्र 114 रन पर आउट कर दिया। 
हालांकि इंग्लैंड के विरुद्ध सेमीफाइनल में प्लेयर ऑ़फ द मैच सैमसन को दिया गया, लेकिन असल जीत जसप्रीत बुमराह के दो किफायती ओवर व अक्षर पटेल के दो अविश्वसनीय कैचों की बदौलत मिली थी, जिससे इंग्लैंड 253 रन के लक्ष्य को पार करने से मात्र 7 रन पीछे रह गया। बुमराह ने फाइनल में भी प्रभावी गेंदबाज़ी की, मात्र 15 रन देकर चार विकेट लिए और प्लेयर ऑ़फ द मैच पुरस्कार हासिल करके इरफान पठान (2007) व विराट कोहली (2024) की श्रेणी में शामिल हो गये, जो उनसे पहले फाइनल में प्लेयर ऑ़फ द मैच रहे थे। 
दरअसल, फाइनल तो न्यूज़ीलैंड पहले 6 ओवर में ही हार गया था, जब उसने सपाट पिच पर टॉस जीतने के बाद भारत को पहले बल्लेबाज़ी करने का अवसर दिया और भारत ने पॉवर प्ले में बिना विकेट खोये रिकॉर्ड 92 रन बना दिये। इसकी बदौलत ही भारत पहली टीम बन सकी जिसने टी-20 विश्व कप के दोनों सेमीफाइनल (253) व फाइनल (255) में 250 प्लस के स्कोर किये। इसके अतिरिक्त टी-20 विश्व कप के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ कि टॉप तीन बैटर्स ने एक ही पारी में अर्द्धशतक लगाये- सैमसन (89), अभिषेक शर्मा (52) और ईशान किशन (54)। इसलिए यह कहना गलत न होगा कि भारत ने यह विश्व कप अपने बैटर्स की बदौलत जीता। टॉप 5 रन बनाने वालों में दो भारतीय सैमसन (321 रन के साथ तीसरे स्थान पर) व किशन (317 रन के साथ चौथे स्थान पर) रहे। हां, बुमराह (14 विकेट) व वरुण चक्रवर्ती (14 विकेट) के योगदान को भी अनदेखा नहीं किया जा सकता; क्योंकि दोनों ने इस प्रतियोगिता में सर्वाधिक विकेट लिए।            -इमेज रिफ्लेक्शन सेंटर

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