राजनीतिज्ञों के लिए कड़ा संदेश

‘आप’ की पंजाब सरकार के शासन को चार वर्ष व्यतीत हो गए हैं। इस समय में सरकार और प्रदेश की राजनीति में बड़े उतार-चढ़ाव आए हैं। सरकार ने अलग-अलग क्षेत्रों में लोगों के लिए बहुत से कार्य किए हैं। ऐसे कार्यों में मोहल्ला क्लीनिक बनाना, घरेलू उपभोक्ताओं को मुफ्त बिजली देना, स्कूलों की हालत सुधारना, 65,000 युवाओं को रोज़गार आदि देना शामिल हैं। सरकार ने नशों के तस्करों और गैंगस्टरों के विरुद्ध भी प्रभावशाली अभियान चलाया है। विगत दिवस जनरल वर्ग की महिलाओं को 1000 रुपये और अनुसूचित वर्ग की महिलाओं को आगामी कुछ महीनों के दौरान 1500 रुपये देने की भी घोषणा की गई है। बाढ़ पीड़ितों को अपने स्रोतों द्वारा मुआवज़ा देने सहित अन्य भी बहुत-सी अपनी उपलब्धियां सरकार गिनाती है।
समय-समय पर सरकार अपने इन किए गए सभी कार्यों का विस्तारपूर्वक विवरण भी देती रही है और अपनी इन उपलब्धियों की सफलता का दावा भी करती रही है। दूसरी तरफ अलग-अलग विपक्षी पार्टियां अपने-अपने ढंग-तरीके से सरकार की इस कारगुज़ारी को तसल्लीजनक न मान कर इसकी आलोचना भी करती रही हैं। यहां यह भी वर्णनीय है कि सरकार ने अपने चुनावी वायदों में भ्रष्टाचार रहित प्रशासन देने का भी ज़ोरदार ढंग से प्रचार किया था। सरकार ने भ्रष्टाचार के आरोपों में राजनीतिज्ञों और अधिकारियों पर कुछ मामले दर्ज करके भी अपने भ्रष्टाचारी विरोधी होने का प्रभाव दिया था। चाहे कि विपक्षी पार्टियां इसे राजनीतिक बदलाखोरी ही कहती रही हैं। अब चार वर्ष की अवधि के बाद चुनाव नज़दीक आने की आहट से राजनीतिक दलों की गतिविधियां बहुत तेज़ हो गई हैं। प्रत्येक पार्टी एक दूसरे से बढ़ कर अपनी गतिविधियां दिखाने के लिए तत्पर प्रतीत होती है। ऐसे समय में अब अमृतसर में पंजाब वेयर हाऊस कार्पोरेशन के अधिकारी गगनदीप सिंह रंधावा की ओर से लालजीत सिंह भुल्लर, जो प्रभावशाली मंत्री माना जाता था, पर आरोप लगाने के बाद आत्महत्या करने की घटना ने सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती पैदा कर दी है। इसने एक बार फिर राजनीतिक माहौल को गर्मा दिया है। प्रदेश की लगभग सभी विपक्षी पार्टियों के नेताओं ने इस घटनाक्रम के विरुद्ध सख्त आवाज़ उठाई है, जिसके दृष्टिगत सरकार ने पहले उसे मंत्रिमंडल से निकाला और फिर उसके विरुद्ध मामला दर्ज करके उसे गिरफ्तार भी कर लिया है। देश की संसद में भी इसकी चर्चा हुई है। केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने इस मामले की सी.बी.आई. से जांच करवाने का विश्वास दिलाया है।
जहां अभी भी विपक्षी पार्टियां इस मामले संबंधी सक्रिय दिखाई देती हैं, वहीं मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान और ‘आप’ के पार्टी संयोजक श्री अरविन्द केजरीवाल द्वारा भी यह स्पष्ट बयान दिए गए हैं कि किसी भी आरोपी को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वह किसी भी पद पर विराजमान रहा हो। प्रभावित परिवार के लिए यह घटना बड़े दु:ख और संताप वाली है। आगामी समय में प्रत्येक स्तर पर इसकी पारदर्शी और निष्पक्ष जांच होना ज़रूरी है। सरकार की कड़ी कार्रवाई ही दु:खी परिवार को कुछ सहारा दे सकती है, इससे बेहद गर्मा चुके राजनीतिक माहौल में भी कुछ सुधार आ सकता है। नि:संदेह यह दुर्घटना एक ऐसा सबक है जो प्रत्येक स्तर पर विचरण कर रहे राजनीतिज्ञों को अपने फज़र् के पालन के प्रति अधिक सतर्क होने का संदेश देता है।

—बरजिन्दर सिंह हमदर्द

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