नच बलिए का लाइव सीजन
शादी-ब्याह में दूल्हा-दुल्हन भले ही केंद्र में हों, पर असली आकर्षण तो वे बाराती होते हैं जिनके नाचने का कोई ‘ऑफ बटन’ नहीं होता। कैमरामैन भी वरमाला और सिंदूरदान को औपचारिकता समझता है,असल फुटेज तो डांस फ्लोर पर ही बनती है। शादी में इन सीजनल डांसर्स का वही महत्व होता है जो गठबंधन सरकार में उप-मुख्यमंत्री का, न हों तो कोई कमी नहीं, पर हों तो कार्यक्रम में रौनक और अखबार में फोटो ज़रूर आता है।
कुछ लोग तो सिर्फ नाचने के लिए ही शादी में जाते हैं जैसे ही बाजा बजा नहीं कि गर्दन, कंधा, कमर, घुटना और टखने तक सब एक ही कमान के सैनिक बनकर थिरकने लगते हैं।
बारात में कुछ भावुक किस्म के नर्तक होते हैं, वे भीतर से तो थिरकने के लिए मचलते रहते हैं पर बाहर से ऐसे अभिनय करते हैं मानो नाचना उनके संस्कारों के खिलाफ हो। किन्तु जरा-सी मनुहार मिलते ही वे आटोमेटिक जेनरेटर की तरह स्टार्ट हो जाते हैं, जैसे किसी ने ‘शर्म-स्कैन’ बंद कर दिया हो। जैसे ही डीजे की पहली बीट फूटती है, पुरुषों के भीतर छिपा माइकल जैक्सन और महिलाओं के अंदर सुषुप्त सपना चौधरी जाग उठते हैं। फिर सड़क पर ऐसा दृश्य बनता है, जैसे डांस इंडिया डांस की ओपन ऑडिशन चल रही हो। सबसे पहले नागिन धुन का जादू चढ़ता है। नागिन धुन बजते ही एक तरफ हाथों से फन निकालते सांप, दूसरी तरफ मुंह में रूमाल दबाए सपेरे-दोनों दल ऐसे भिड़ते हैं जैसे इंटरनेशनल नाग-सपेरा सम्मेलन हो रहा हो।
नागिन जैसे-जैसे लहराती है, सपेरा वैसे-वैसे धरती पर लोट-लोटकर उसे वश में करने को अपनी सारी एनर्जी लगाता रहता है।
इसी बीच ‘यह देश है वीर जवानों का’ बजते ही भांगड़ा ब्रिगेड सक्रिय हो जाता है। हवा में पैर और जमीन पर हाथ मारते हुए वे देशभक्ति का अनोखा रूप प्रस्तुत करते हैं। और ‘डमडम डीगा डीगा’ पर तो ऐसे लोग भी झूम उठते हैं जिन्हें नाच में ‘न’ भी नहीं आता। पियक्कड़ बाराती भी उसी जुनून में ऐसे हिलते-डुलते हैं जैसे शरीर के जोड़ पिछले जनम की ईएमआई पर चल रहे हों।
महिलाएं इस महफिल की असली स्टार होती हैं। भोजपुरी गीत या ‘तेरी अंक्खा दा ये काजल’ आते ही सास-बहू-पड़ोस की भाभी सब एक मंच पर सपना चौधरी को चुनौती देने में जुट जाती हैं। और दर्शक दीर्घा में खड़े लोग मोबाइल का कैमरा ऐसे पकड़े रहते हैं जैसे किसी पुरातन लोकनृत्य का शोध-संग्रह कर रहे हों। मोबाइल कैमरामैन को देख कर सड़क की सपना इस सपने में भी अपना बेस्ट देने पर उतारू हो जाती हैं कि किसी कैमरा मैन की कृपा से उनका डांस वायरल हो जाए!
बहरहाल शादी-ब्याह में रात भर नाचने वाले गैर-प्रोफेशनल नर्तक-नर्तकियां खुद को उस समय भले ही रेमो डिसूजा का रिश्तेदार समझ लें, पर सुबह होते ही कमर, घुटना और तलवा उन्हें याद दिला देता है कि असल में वे सरकारी दफ्तर के ओवरवर्क्ड क्लर्क हैं।
अगले दो दिन झंडू बाम और आहों की महक के बीच पूरी टोली ऐसे कराहती दिखती है मानो डांस नहीं, नृत्य दुर्घटना में घायल हुई हो। (सुमन सागर)



