खट्टे मीठे स्वाद वाली स्ट्रॉबेरी
आगे बढ़ें इससे पहले यह स्पष्ट हो लें कि स्ट्रॉबेरी का पेड़ नहीं होता बल्कि एक झाड़ीनुमा पौधा ही होता है जिसे विशेष परिस्थितियों में पेड़ भी कहा जा सकता है। लेकिन आकार में छोटा होने के बावजूद किसानों को इसके आर्थिक फायदे बहुत बड़े हैं। अगर सही योजना, सही तकनीक और बाज़ार से सही तरह का कारोबारी जुड़ाव हो जाए, तो स्ट्रॉबेरी किसानों के लिए सचमुच सोने की खान साबित हो सकती है। मगर स्ट्रॉबेरी का पूरी तरह से आर्थिक फायदा पाने के लिए इन परिस्थितियों का होना ज़रूरी है।
* स्ट्रॉबेरी को ठंडी और मध्यम जलवायु पसंद है, इसलिए इसके लिए आदर्श तापमान 18 से 26 डिग्री सेंटीग्रेड है।
* पहाड़ी क्षेत्र, ऊंचे पठार और ठंडे मैदानी इलाके इसकी खेती के लिए सबसे उपयुक्त हैं। अगर आप गर्म और ह्यूमिड परिस्थितियों में स्ट्रॉबेरी खेती करना चाहते हैं, तो ग्रीन हाउस या पोली हाउस में ही यह संभव है।
* स्ट्रॉबेरी की खेती के लिए उच्च गुणवत्ता वाले नर्सरी के रोगमुक्त पौधे होने ज़रूरी हैं। तभी बेहतर किस्म, बेहतर आकार, बेहतर रंग और मिठास की स्ट्रॉबेरी मिलती है।
* स्ट्रॉबेरी के लिए ज़रूरी है प्लास्टिक मलचिंग और ड्रिप सिंचाई तकनीक अपनायी जाए। इससे नमी बनी रहती है, खरपतवार कम होते हैं और फल साफ और आकर्षक लगते हैं। साथ ही इससे उत्पादन 20 से 30 प्रतिशत बढ़ जाता है।
* स्ट्रॉबेरी से किसान भरपूर फायदा तभी उठा सकते हैं, जब वे महज ताजा फल बेंचने तक सीमित न रहें बल्कि वैल्यू एडिशन के जरिये स्ट्रॉबेरी जैम, जूस/स्क्वैश, पल्प, फ्रोजन स्ट्रॉबेरी और आइसक्रीम व बेकरी को सप्लायी की जाए। क्योंकि प्रोसेसिंग के बाद स्ट्रॉबेरी अपनी फल वाली कीमत के 3 से 4 गुना महंगी हो जाती है।
* स्ट्रॉबेरी जल्दी खराब होने वाला फल है। इसलिए जरूरी है नजदीकी शहर, होटल रेस्टोरेंट, फलों की मंडी या थोक खरीदार को तुरंत बेंची जाए। अगर बिकने के लिए बाजार की व्यवस्था नहीं है, तो स्ट्रॉबेरी की खेती के पहले कई बार सोचें।
* अगर किसान थोड़ा इनोवेशन करके अपने स्ट्रॉबेरी फार्म को टूरिज्म से जोड़ दें और पर्यटकों से कहें वो खुद तोड़ें और खरीदें, इससे जबर्दस्त फायदा हो सकता है। क्योंकि जब ग्राहक खुद फार्म में आकर अपने हाथों से सुंदर-सुंदर स्ट्रॉबेरी तोड़ते हैं, तब वे खुशी-खुशी 250 से 300 रुपये प्रतिकिलो भुगतान कर देते हैं।
* स्ट्रॉबेरी की खेती के लिए एक हेक्टेयर में 8 से 10 लाख रुपये का खर्च आता है और लगभग 8 से 15 टन उत्पादन होता है। इसलिए प्रति हेक्टेयर संभावित लाभ 5 से 10 लाख रुपये प्रति सीजन है बशर्ते फसल के लिए सबकुछ सही हो जाए।
लब्बोलुआब यह कि स्ट्रॉबेरी की खेती किसानों के लिए सोने की खान तो है बशर्ते उनके पास खेती करने की सारी आधुनिक सहूलियतें और तकनीकी हो। क्षेत्र का मौसम इस खेती के अनुकूल हो। तेज रफ्तार नेटवर्क से कनेक्टिड बाजार हो और कोल्ड स्टोरेज की सुविधा हो, तो न केवल किसान स्ट्रॉबेरी के ताजे फलों बल्कि इसके वैल्यू एडीशन उत्पादों से मालामाल हो सकते हैं। कहने का मतलब यह कि सही जलवायु, सही किस्म, प्रोसेसिंग की सही सुविधा और तेज रफ्तार बाजार, अगर ये सब हैं तो किसानों के लिए स्ट्रॉबेरी की खेती सोने की खान है वरना इसमें जोखिम ही जोखिम है।
इसका वैज्ञानिक नाम फ्रैगेरिया, अनानासा है। यह रोजेसी यानी गुलाब कुल का पौधा है। इसकी प्रकृति बहुवर्षीय है, लेकिन व्यवसायिक खेती में पौधे को हर दो या तीन साल में बदलना पड़ता है। जहां तक इसकी उपज का सवाल है तो एक पौधे से सामान्यत: 150 से 400 ग्राम तक फल मिलते हैं। जहां तक इसके लिए अनुकूल जलवायु का सवाल है तो इसके लिए ठंडी जलवायु, अनुकूल होती है। तापमान 18 से 24 डिग्री तक आदर्श होता है। ठंडी रात और हल्की धूप इसकी मिठास को बढ़ाती है। जहां तक मिट्टी का सवाल है तो स्ट्रॉबेरी के पौधे के लिए दोमट मिट्टी अच्छी होती है, जिसमें कार्बनिक पदार्थ भरपूर मात्रा में हों और इसका पीएचमान 5.5 से 6.5 सबसे उपयुक्त होता है। जैसा कि हमने पहले बताया स्ट्रॉबेरी का कोई पेड़ नहीं होता, यह झाड़ीनुमा पौधा है, जिसे कई लोग गलती से पेड़ कहते हैं। स्ट्रॉबेरी के पौधे जमीन के करीब फैलते हैं और इनकी ऊंचाई 6 से 8 इंच तक ही होती है।
जहां तक इसके आर्थिक महत्व की बात है तो यह एक जबर्दस्त नगदी फसल है। ऑफ सीजन में बाज़ारों में स्ट्रॉबेरी काफी महंगी बिकती है। शहरी उपभोक्ताओं और पर्यटन क्षेत्रों में इसकी डिमांड काफी ज्यादा होती है। साथ ही मूल्य संवर्धन उत्पाद जैसे- जैम, जैली, जूस, आइसक्रीम, वाइन आदि में ड्रॉ स्ट्रॉबेरी प्रोसेसिंग करके इस्तेमाल होती है। एक हेक्टेयर में आमतौर पर 20 से 25 टन स्ट्रॉबेरी उपजती है और अब कुछ अच्छा हो जाए तो 30 से 40 लाख तक की एक हेक्टेयर में स्ट्रॉबेरी पैदा होती है। हालांकि इसकी खेती के लिए कई चुनौतियां भी हैं। मसलन यह ज्यादा गर्मी और असमय की बारिश से खराब हो जाती है। इसलिए दो तीन दिन के लिए इसे रखना हो तो कोल्ड स्टोरेज आदि में रखते हैं। यह किसानों के लिए फायदेमंद है बशर्ते वे पहाड़ी और ठंडी जलवायु में रहते हों और उनके पास किसानी की हाइटेक सुविधाएं हों। मैदानी क्षेत्रों में भी स्ट्रॉबेरी उगाना संभव है बशर्ते सारी ज़रूरी सुविधाएं हों। लब्बोलुआब यह कि स्ट्रॉबेरी किसानों के लिए लाभकारी है बशर्ते अनुकूल परिस्थितियां और बाज़ार हों।
-इमेज रिफ्लेक्शन सेंटर




