अमरीकी विदेश मंत्री के दौरे का महत्व
अमरीकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो भारत दौरे पर हैं। इसके साथ ही वह भारत में हो रही क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक में भी शामिल होंगे। आज जिस तरह के अंतर्राष्ट्रीय हालात बने हुए हैं, उनको देखते हुए रूबियो का यह दौरा महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विदेश मंत्री बनने के बाद वह पहली बार भारत की यात्रा पर आए हैं। पिछले कुछ वर्षों से अमरीका और भारत के संबंधों में ठहराव आया लगता है। अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा टैरिफ के मामले पर धारण की गई नीति के साथ भी भारत से दूरियां बढ़ी थीं। दोनों देशों में होने वाला व्यापारिक समझौता भी बहुत समय से लटका हुआ है। चाहे राष्ट्रपति ट्रम्प अक्सर अपने बयानों में भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की प्रशंसा करते रहे हैं परन्तु इसके बावजूद दोनों देशों के रिश्ते पहले जैसे नहीं रहे।
फरवरी माह में अमरीका और इज़रायल द्वारा ईरान पर हमला करने के साथ यह दूरियां और भी बढ़ती नज़र आ रही हैं। भारत के साथ ईरान के संबंध लम्बे समय से सुखद ही रहे हैं। यहां तक कि पाकिस्तान की सड़कीय रुकावटों के होते हुए भारत ने ईरान के साथ उसकी गवादर बंदरगाह के जरिये तथा आगे अफगानिस्तान के साथ सड़कीय मार्ग से नाता जोड़ लिया था। इसके आगे वह केन्द्रीय एशिया के देशों के साथ भी अपने पुराने व्यापारिक संबंधों को और आगे बढ़ा सकता था, परन्तु अमरीका के ईरान के साथ युद्ध के कारण भारत की यह बड़ी योजना बीच में ही रुक गई है। ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य द्वारा जहाज़ों के आवागमन को रोकने के साथ तेल के मामले में भी भारत को बड़ा नुकसान हुआ है। तेल की लगातार बढ़ती कीमतों ने इसकी चिन्ता को और भी बढ़ा दिया है। अमरीका द्वारा ईरान के साथ चलती अपनी लड़ाई में पाकिस्तान से मध्यस्थता करवाना तथा उसकी पीठ थपथपाना भी भारत को रास नहीं आ रहा। इस तरह के माहौल में रूबियो की यात्रा का महत्व अवश्य बढ़ जाता है। रूबियो ने यह कहा है कि अमरीका भारत को अधिक से अधिक तेल निर्यात करने का इच्छुक है ताकि भारत की इस मामले में रूस पर निर्भरता कम की जा सके। उन्होंने तेल के साथ-साथ भारत को हथियार तथा छोटे परमाणु रिएक्टर देने की भी बात की है। चाहे अमरीकी राष्ट्रपति ने चीन के साथ अपने देश के संबंधों को प्राथमिकता अवश्य दी है, परन्तु इसके साथ-साथ वह हिन्द-प्रशांत क्षेत्र में चीन के बढ़ते सैन्य प्रभाव तथा आर्थिक विस्तारवादी नीतियों में भी संतुलन बनाना चाहते हैं और दक्षिण चीन सागर में भी उसकी बढ़ती शक्ति को रोकना चाहते हैं। इसलिए रूबियो की भारत यात्रा के दौरान हो रही क्वाड देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक का भी बड़ा महत्व दिखाई देता है। क्वाड में भारत, जापान, ऑस्ट्रेलिया तथा अमरीका शामिल हैं, जो साझी रणनीति से इस क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए काम कर रहे हैं।
इसी समय भारत ने रूस के साथ अपने संबंधों में संतुलन बनाए रखा है। ईरान के साथ-साथ खाड़ी देशों से भी भारत का नाता जुड़ा रहा है। खाड़ी देशों में भारत के लाखों श्रमिक काम कर रहे हैं। इसी समय भारत को भी पाकिस्तान तथा चीन से बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, परन्तु इसके बावजूद विश्व के बड़े विकसित देशों के साथ अपने व्यापारिक सहयोग में संतुलन बनाए रखना भारत की विदेश नीति की सफलता ही माना जा सकता है। रूबियो का यह दौरा दोनों देशों में बढ़ी दूरियों को कितना कम करने में सहायक हो सकेगा, यह देखने वाली बात होगी, परन्तु यह बात स्पष्ट दिखाई दे रही है कि अंतर्राष्ट्रीय मंच पर भारत के प्रभाव को दृष्टिविगत नहीं किया जा सकता।
—बरजिन्दर सिंह हमदर्द

