किस अलामत का प्रगटावा है कॉकरोच जनता पार्टी ?
यदि दुनिया के राजनीतिक इतिहास का अध्ययन किया जाए तो अलग-अलग देशों में हो रहे घटनाक्रमों संबंधी दिलचस्प तथ्य सामने आते हैं। कई बार देशों में ऐसा कुछ हो जाता है, जिसकी पहले कभी किसी ने कल्पना नहीं की होती। मज़बूत नज़र आती सरकारों और नेता लोक लहरों के बहाव के आगे ताश के पत्तों की तरह बिखरते दिखाई देते हैं। बड़े-बड़े नेताओं की याद में खड़ी की गई प्रतिमाओं को भीड़ें तोड़ देती हैं। यादगारों की आगजनी या तोड़-फोड़ कर दी जाती है। शाही महलों में भीड़ इकट्ठी हो जाती है। यदि दक्षिण एशिया की बात करें तो इसी प्रकार हमारे पड़ोसी देशों श्रीलंका, बांग्लादेश और नेपाल में कुछ साल पहले ही विद्यार्थियों और लोगों की असंतुष्टि के कारण सरकारें बदलती नज़र आई हैं। इन देशों संबंधी पहले राजनीतिक विशेषज्ञों ने ऐसे अंदाज़े भी नहीं लगाए थे कि लोगों की बेचैनी इस कदर बढ़ जाएगी और वह सरकारों के पलट देंगे। परन्तु यह सब कुछ होता हम देख चुके हैं।
ऐसे घटनाक्रम होने के बाद जब उनके संबंध में विश्लेषण होता है तो यह बात उभर कर सामने आती है कि सरकारों और उनके नेता निम्न स्तर की सामाजिक हकीकतों से टूट चुके थे। उनको लोगों की समस्याओं और दुख-दर्द का गहरा अहसास नहीं था, यदि अहसास था भी तो भी वह लोगों की मुश्किलों को हल करने में असफल रहे थे। परन्तु इतिहास यह भी बताता है कि अलग-अलग देशों में चलने वाली सभी लोक लहरें हमेशा सकारात्मक राजनीतिक और आर्थिक तबदीलियां लाने में सफल नहीं होती। कई लोक लहरों के बाद संबंधित देशों के प्रशासन और भी अधिक तानाशाह और दमनकारी हो जाते हैं और लोगों की आर्थिक और राजनीतिक पक्ष से स्थिति और भी खराब हो जाती है। फिर भी इस बात से इन्कार नहीं किया जा सकता कि लोकतांत्रिक देशों में अंतिम तौर पर लोगों की इच्छा ही महत्व रखती है। दमनकारी प्रशासनों की आयु लम्बी हो सकती है परन्तु लोक समर्थन न होने के कारण वह हमेशा कायम नहीं रह सकते। यदि भारत के इतिहास की बात करें तो आज़ादी के बाद जय प्रकाश नारायण के नेतृत्व में हुए आंदोलन और उसके बाद अन्ना हज़ारे के नेतृत्व में हुए सार्वजनिक आंदोलन ने अपनी किसम की अच्छी बुरी तबदीलियां लाई थी। उन्होंने कई राजनीतिक पार्टियों की किस्मत सवारी थी और कईयों की बिगाड़ी थी।
इस समय देश में अंतर्राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन, जिसमें भाजपा भारी पक्ष है, ने केन्द्र में सत्ता संभाली हुई है और प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी एक प्रभावी प्रधानमंत्री के तौर पर काम कर रहे हैं। इसके अलावा देश के 22 के लगभग प्रदेशों में भी सीधे या असीधे ढंग से भारतीय जनता पार्टी की सरकारें है। नि:संदेह देश के लोगों के लिए यह अमृत काल हो या न हो परन्तु भारतीय जनता पार्टी के लिए यह ज़रूरी अमृतकाल है। परन्तु निम्न स्तर पर केन्द्र सरकार और इसकी राज्य सरकारों का लोगों में कैसे प्रभाव है और लोग इससे कितना संतुष्ट हैं, इसका सच पिछले दिनों मज़ाक के तौर पर अस्तित्व में आई कॉकरोच जनता पार्टी के उभार के साथ सामने आया है। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कुछ दिन पहले एक केस की सुनवाई करते हुए यह कहा था कि हमारे देश में कुछ नौजनाव कॉकरोचों की तरह हैं, जिनको कोई नौकरी नहीं मिलती या किसी व्यवस्था में वह अपना स्थान नहीं बना पाता तो फिर वह मीडिया और सोशल मीडिया में चले जाते हैं। आर.टी.आई. एक्टीविस्ट बन जाते हैं और सिस्टम पर हमले शुरू कर देते हैं। उनकी इस टिप्पणी का बिना शक देश के राजनीतिक और पत्रकारी क्षेत्रों में गम्भीरता से नोटिस लिया गया था और उनकी आलोचना भी हुई थी। इसको मुख्य रखते हुए मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने अपना स्पष्टीकरण भी दिया था कि उन्होंने देश के नौजवानों संबंधी ऐसी कोई टिप्पणी नहीं की थी, बल्कि ऐसे व्यक्तियों संबंधी टिप्पणी की थी, जो जाली डिग्रियां लेकर नौकरियां प्राप्त करने की कोशिश करते हैं, लेकिन उनके इस स्पष्टीकरण से न तो देश में और न ही विदेश में लोग संतुष्ट हुए। उनकी इन टिप्पणियों को बहुत लोगों और खास तौर पर नौजवानों द्वारा इस तरह लिया गया, जैसे वह बेरोज़गार नौजवानों और आम लोगों का मज़ाक उड़ा रहे हों। इस तरह की भावनाओं के प्रभाव अधीन ही भारतीय मूल के अमरीका की बोस्टन यूनिवर्सिटी में पढ़ रहे विद्यार्थी अभिजीत दीपके ने मज़ाक-मज़ाक में इंस्टाग्राम पर कॉकरोच जनता पार्टी नामक संगठन बना कर नौजवानों को इसके साथ जुड़ने की आह्वान किया। इसके अलावा उन्होंने इस संबंधी एक्स पर भी अकाऊंट बनाया।
उनके लिए तथा भारत के लोगों के लिए भी यह बेहद आश्चर्यजनक बात हुई कि जंगल की आग की तरह कॉकरोच जनता पार्टी का संदेश देश-विदेश में फैल गया। यह सिलसिला 16 मई से आरंभ हुआ था। अब तक इंस्टाग्राम पर इसके 1.7 करोड़ लोग जुड़ चुके हैं। एक्स पर अभिजीत दीपके द्वारा बनाए गए खाते पर भारत सरकार ने देश में पाबंदी लगवा दी है, परन्तु अभिजीत दीपके द्वारा कॉकरोच जनता पार्टी कमबैक के नाम से पुन: खाता बना लिया गया है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया है कि यह प्लेटफार्म तैयार करने के लिए उन्हें तथा भारत में उनके परिवार को धमकियां दी जा रही हैं।
देश-विदेश में भारी संख्या में युवा लगातार इससे जुड़ रहे हैं। पंजाब सहित भारत के अलग-अलग राज्यों में युवा कॉकरोच जनता पार्टी के नाम से अपने-अपने खाते बना कर ए.आई. के इस्तेमाल से कॉकरोचों के बहुत सारे दिलचस्प वीडियो बना रहे हैं, जिनमें कॉकरोच युवाओं तथा आमजन के मामलों के बारे में भाषण करते दिखाई दे रहे हैं और कॉकरोचों की भीड़ बदलाव के लिए नारे लगाती दिखाई दे रही है। बहुत-से कलाकारों ने कॉकरोच जनता पार्टी के पक्ष में गाने भी रिकॉर्ड करवा कर सोशल मीडिया के प्लेटफार्म पर डाल दिए हैं। अभिजीत दीपके ने इस व्यंग्यात्मक पार्टी में शामिल होने के लिए जो योग्यताएं रखी हैं, उनमें बेरोज़गार होना, आलसी होना तथा हमेशा ऑनलाइन रहना तथा व्यावसायिक तरीके से अपनी भड़ास निकालने को योग्यता होना आदि शामिल हैं। कॉकरोच जनता पार्टी द्वारा जो अपनी मांगें रखी गई हैं, वे निम्नलिखित हैं।
(1) सुप्रीम कोर्ट के सेवा-निवृत्त होने वाले जजों को राज्यसभा या अन्य सरकारी पदों पर नियुक्त न किया जाए।
(2) हाल ही में नीट मैडीकल परीक्षा के लीक हुए पेपर की ज़िम्मेदारी लेते हुए देश के शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें।
(3) संसद तथा विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण लागू किया जाए। यदि चुनावों में हेराफेरी होती है या वोट चोरी होते हैं तो मुख्य चुनाव आयुक्त पर यू.ए.पी.ए. लगा कर उन्हें जेल भेजा जाए।
(4) यदि कोई नेता दल बदली करता है, उस पर 20 वर्ष तक चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध लगाया जाए।
(5) सत्ता समर्थक मीडिया (गोदी मीडिया) के एंकरों तथा उनके मालिकों की सम्पत्ति की जांच की जाए।
कॉकरोच जनता पार्टी का उपरोक्त उभार इस बात का भली-भांति प्रगटावा करता है कि देश के युवा तथा आम लोग हमारी राजनीतिक व्यवस्था, न्यायपालिका तथा यहां की सरकारों द्वारा लागू की जा रही आर्थिक नीतियों से संतुष्ट नहीं हैं। वह इस बात से भी परेशान एवं बदज़न हैं कि पूरी व्यवस्था आम लोगों के प्रति जवाबदेह नहीं है, अपितु आम लोगों का बड़े पदों पर बैठी शख्सियतों द्वारा अपमान किया जा रहा है। कॉकरोच जनता पार्टी के उभार से जो ये हकीकतें सामने आई हैं, ये हमारी पूरी राजनीतिक व्यवस्था के लिए एक बड़ी चुनौती पेश करती हैं। सत्ता की कुर्सी पर विराजमान लोगों को अपनी पीढ़ी के नीचे सोटा फेरते हुए अपनी कार्यशैली में बड़े बदलाव करने चाहिएं। देश के युवाओं के लिए रोज़गार के अवसर सृजित करने चाहिएं। व्यवस्था में से भ्रष्टाचार को खत्म करना चाहिए। आर्थिक नीतियां कार्पोरेटरों के पक्ष में नहीं अपितु आम लोगों के पक्ष में होनी चाहिएं। जल, जंगल, ज़मीन तथा देश के अन्य प्राकृतिक स्रोतों का इस्तेमाल कार्पोरेटरों का मुनाफा बढ़ाने के लिए नहीं, अपितु आम लोगों के लिए रोज़गार के अवसर सृजित करने के लिए होना चाहिए। शिक्षा प्रणाली को समयानुकूल बनाना चाहिए और व्यवसाय कोर्सों के दाखिलों के संबंध में पेपरों के बार-बार लीक होने का सिलसिला रोका जाना चाहिए। यदि हमारा सत्तारूढ़ वर्ग व्यवस्था में पाई जाने वाली उपरोक्त कमियों को दुरुस्त नहीं करता और स्वयं को लोगों के प्रति जवाबदेह नहीं बनाता तो सोशल मीडिया के प्लेटफार्मों पर कॉकरोच जनता पार्टी का जो आन्दोलन धूम मचाता दिखाई दे रहा है, वह सड़कों पर भी उतर सकता है। समय की आवाज़ को सुनना अब हमारे सत्तारूढ़ वर्ग का काम है।



