स्थानीय चुनाव का महत्त्व
पिछले कुछ महीनों से आठ नगर निगमों, 75 नगर कौंसिलों और 20 नगर पंचायतों के चुनाव के लिए पंजाब भर में बड़ी सक्रियता देखी जाती रही है। पंजाब भर की प्रमुख राजनीतिक पार्टियां भी इन चुनावों के लिए स्थानीय स्तर पर सक्रिय रही थीं। इनकी राजनीतिक स्तर पर ज्यादातर सक्रियता इसलिए देखी जाती रही हैं, क्योंकि विधानसभा के चुनाव अगले वर्ष के शुरू में हो रहे हैं, जिस कारण सभी पार्टियां इन चुनावों को अपने लिए इम्तिहान के रूप में देख रही हैं। इस तरीके से उनको लोगों के साथ सम्पर्क करने का भी अवसर मिला है। चाहे स्थानीय चुनाव संबंधी लोगों में अक्सर यह धारणा बनी रहती है, कि इनमें प्रशासन चला रही पार्टी का किसी न किसी रूप में दबदबा बना रहता है। मतदान करते समय लोगों को यह भी उम्मीद होती है कि अपने क्षेत्रों के विकास और उलझे मामलों को सुलझाने के लिए सत्तारूढ़ पार्टी और प्रशासन से उन्हें अधिक सहयोग और साधन मिल सकते हैं।
यदि इन चुनावों की बात करें, चाहे नामांकन संबंधी प्रक्रिया की विपक्षी पार्टियां आलोचना करती रही थीं परन्तु इसके बावजूद उन्होंने बड़ी संख्या में अपने उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतारे हुए हैं। चुनाव आयोग ने भी इन चुनावों की घोषणा के बाद लगातार पूरी सक्रियता से तैयारियां शुरू कीं और बार-बार इस बात को भी सुनिश्चित बनाया कि चुनाव पूरी तरह दबाव रहित और पारदर्शी ढंग से हो सकें। ‘आप’ के अध्यक्ष और कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा और हरजोत सिंह बैंस ने भी बार-बार यह बयान दिए कि ये चुनाव प्रत्येक स्थिति में निष्पक्ष करवाए जाएंगे। अमन अरोड़ा ने तो यह भी कहा था कि सरकार की सोच है कि इन चुनावों के परिणामों से यह अनुमान लगाया जाए कि आम लोग उनकी पार्टी को कितना समर्थन देते हैं? इस पैमाने को सामने रख कर ही वह आगामी विधानसभा चुनाव के लिए अपनी योजनाबंदी कर सकेंगे। यह बात ज़रूर उत्साह पैदा करने वाली है कि निम्न स्तर पर इन चुनावों के लिए आम लोगों में भारी उत्साह देखने को मिला है। इनसे संबंधित वार्डों के लिए हज़ारों उम्मीदवारों का मैदान में उतरना भी ऐसा ही प्रभाव देता है। चाहे आप, कांग्रेस, भाजपा, अकाली दल (ब) और बहुजन समाज पार्टी ने बड़ी संख्या में अपने-अपने सैकड़ों उम्मीदवार चुनाव में उतारे हैं परन्तु इसके साथ-साथ 1500 से अधिक आज़ाद उम्मीदवारों का चुनाव लड़ना भी लोगों के उत्साह का प्रतीक कहा जा सकता है। जिस तरह इन चुनावों के लिए प्रबन्ध किए गए थे, वह भी विश्वास पैदा करने वाले थे। इन चुनावों के लिए 35,000 कर्मचारी और 32,000 पुलिस कर्मचारी तैनात किए जाने भी इनके महत्त्व को दर्शाते हैं।
इसके बावजूद कई स्थानों पर आपसी टकराव होना और रायकोट में कांग्रेसी उम्मीदवार का गम्भीर रूप में घायल होना यह ज़रूर दर्शाता है कि किस तरह कुछ लोगों के लिए ये चुनाव जुनून बने हुए थे। भीषण गर्मी के बावजूद भी ज्यादातर स्थानों पर लोगों की लम्बी कतारें ज़रूर दिखाई देती रहीं। एक अनुमान के अनुसार पांच बजे तक 61 प्रतिशत से अधिक मतदाताओं ने अपने मताधिकार का उपयोग किया है। स्थानीय स्तर पर चुनावों के लिए पैदा हुआ ऐसा उत्साह यह दर्शाता है कि लोग अपनी मूलभूत सुविधाओं और ज़रूरतों के प्रति कितने सुचेत हैं और उनकी पूर्ति चाहते हैं। ऐसा घटनाक्रम लोगों के जागरूक होने की निशानी भी है और यह भी कि वह अपने क्षेत्रों को प्रत्येक पक्ष से पूरी तरह विकसित हुआ देखना चाहते हैं। इनसे निकलेपरिणाम के आधार पर ही सभी पार्टियां 2027 के चुनाव के लिए अपनी-अपनी योजनाबंदी करेंगी। भविष्य में विकास और प्रदेश के मूलभूत ढांचे को और मज़बूत करने के लिए भी यह परिणाम सरकार को दिशा देने वाले सिद्ध हो सकते हैं।
—बरजिन्दर सिंह हमदर्द

