शहर दर शहर लाक्षागृहों की ज़िम्मेदार है भ्रष्टाचारी व्यवस्था
अभी एक पखवाड़ा पहले ही राजधानी दिल्ली में एक होटल में आग लगने से बारह विदेशी नागरिकों समेत 21 लोगों की मौत हुई थी, अब लखनऊ के कोचिंग सैंटर्स में अग्निकांड में 15 छात्र छात्राओं की दर्दनाक मृत्यु हुई है। प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज में एक तीन मंजिला ईमारत में जहां पैट अनीमल शाप ए एनीमेशन ट्रेनिंग कोचिंग चलती थी जिसमें करीब 25-30 छात्र-छात्राएं पढ़ते थे जिन्होंने अपने भविष्य को गढ़ने के उद्देश्य से इस कोचिंग में प्रवेश लिया था। यहां अपने जिगर के टुकड़ों को पढ़ा लिखा कर भविष्य बनाने के लिए भेजने वाले अभिभावकों को सपने में भी गुमान नहीं रहा होगा कि यह कोचिंग संस्थान एक दिन लाक्षागृह बन जाएगा और उनके घर के चिराग इस भयानक हादसे में जीवन गंवा देंगे इस बेहद दर्दनाक हादसे में 15 युवाओं की दम घुटने से मौत हो गई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं अब तक तीन लोगों को गिरफ्तार और चार अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है।
आपको बता दें इस हादसे से 15 परिवारों के सपनों उम्मीदों की भी मौत हो गई है। ये परिवार इस त्रासद अग्निकांड की मार से इस जीवन में कभी भी नहीं उबर पाएंगे। इस अग्निकांड हादसे की भयावहता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि 15 छात्र छात्राओं की मौके पर ही आग से जलकर और धुएं से दम घुटने से मौत हो गई। जबकि सभी छात्र छात्राओं ने खुद को बचाने के लिए सभी प्रयास किए फिर भी वे कामयाब नहीं हो सके। वे बिल्डिंग से बाहर नहीं निकल सके। आधे दर्जन किशोर घायल हैं जिनका इलाज अस्पताल में हो रहा है। आग से बचाव और बुझाने के लिए दमकल आधे घंटे बाद पहुंची जो अपने आप में बेहद चिंताजनक है। वहीं मुख्यमंत्री जो दौरे पर थे अपना दौरा छोड़कर मौके पर पहुंचे और उसके बाद उच्च स्तरीय बैठक में घटना की समीक्षा की और मामले की उच्चस्तरीय जांच के लिए दो सदस्यीय एसआइटी गठित करने के आदेश दिए हैं। वहीं तीन गिरफ्तारियां की गई है और चार अधिकारी सस्पेंड किए गए हैं।
रिपोर्ट्स के अनुसार इस हादसे में एक युवक ने तो बिजली के करंट प्रवाह तारों को पकड़कर नीचे कूदकर जान बचाने की कोशिश की। वहीं एक युवक जान बचाने के लिए शीशा तोड़कर कूद पड़ा लेकिन नीचे वह लोहे के ग्रिल पर गिर गया जिसकी वजह से वह गम्भीर रूप से घायल हो गया जिसे लोग अस्पताल ले गए। कुछ युवक जान बचाने के लिए बिल्डिंग में पीछे की ओर बाथरूम में चले गए लेकिन पीछे कोई रास्ता नहीं था। इसकी वजह से जब आग बढ़ी तो वे बाहर नहीं निकल सके क्योंकि आग सामने की ओर से लगी थी जो अत्यंत भयावह थी। देश में आग की घटनाएं अब रोज़ाना की बात हो गई हैं। कभी नर्सिंग होम और नवजात शिशु केयर सेंटर कभी अस्पतालों, कोचिंग संस्थानों, शॉपिंग कॉम्प्लेक्सों, कारखानों, होटल, रेस्तरां और झुग्गी बस्तियों यहां तक की चलती ट्रेन की बोगियों में आग के हादसे सामने आते रहे हैं जिनमें हर साल सैकड़ों जीवन आग की भेंट चढ़ जाते हैं।
हर बड़ी घटना की तरह ही इस हादसे के बाद प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और विभिन्न दलों के राजनेताओं की शोक संवेदना आयी और सरकार ने मुआवजे की घोषणा भी की है लेकिन क्या एक जीवन की कोई भरपाई की जा सकती है? क्या जीवन का कोई भी मोल हो सकता है? इस हादसे के शिकार बने कुछ बच्चे अभी ज़िंदगी के लिए अस्पतालों में जंग लड़ रहे हैं। आज़ादी के करीब 80 साल बाद भी इस देश की सरकारें व्यवस्था सिस्टम को नही सुधार सकी हर स्तर पर भ्रष्टाचार इस कदर हावी है कि आप ईमानदारी से भवन का निर्माण करें तो भी रिश्वत देना पड़ेगा फिर समझ नहीं आता कि बिना नक्शा राज्यों की राजधानियों में सरकार और अधिकारियों की नाक के तले सिर्फ ग्राउंड फ्लोर का नक्शा पास करा कर तीन मंजिला व्यवसायिक भवन इमारतों का निर्माण किस की कृपा से हो जाता है? कौन सा तंत्र है जिस के आशीर्वाद से इन इमारतों में बिना अग्निशमन विभाग व दूसरे विभाग की अनुमति के कोचिंग संस्थान या चाइल्ड नर्सरी या होटल संचालित किए जाते हैं? हर बड़े हादसे के बाद सहानुभूति मुआवजा राशि जांच कमेटी का गठन किया जाता है। घोषणा की जाती है कि दोषियों को दंडित किया जायेगा हादसे के जिम्मेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी लेकिन कुछ नहीं बदलता इन घोषणाओं का फायदा वही अफसरशाही उठाती है जो जांच और कारवाई का नाटक कर तमाम वैध अवैध निर्माणों और प्रतिष्ठानों से उगाही करती है जेब भरती है और अगले हादसे का इंतजार करती है।
अभी हाल ही में दिल्ली में अस्पताल के निकट होटल कम गेस्ट हाउस में आग लगने से कई लोगों की जान चाली गई थी जिनमें से एक दर्जन से अधिक विदेशी नागरिक भी थे। रिकार्ड बोल रहे हैं कि राजधानी लखनऊ के कई होटलों में इस प्रकार आग लग चुकी है इसके बावजूद कोई फायर सेफ्टी पर ध्यान नहीं दिया जाता है। भवन चूंकि तीन मंजिला था और कई मकान व भवन एक-दूसरे से जुड़े हुए थे। नीचे से लेकर ऊपर तक उसमें व्यवसायिक कार्य हो रहे थे। भवन में दूसरा कोई रास्ता भी निकलने को नहीं था और आगे शीशे की बंद खिड़कियां थीं। आग को एसी ब्लास्ट या शार्ट सर्किट से लगना बताया जा रहा है। सवाल फिर वही है कि लखनऊ और दिल्ली जैसे अग्निकांडों के लिए जिम्मेदार कौन हैं? किसकी जवाबदेही है?
चश्मदीदों का कहना है कि फायर ब्रिगेड की टीम 30 से 40 मिनट की देरी से पहुंची। फायर बिग्रेड का इतनी देरी से पहुंचने का मतलब है आग का विकराल हो जाना। इस सब के लिए कौन जिम्मेदार है? क्या सरकारों की इस व्यवस्था को दुरुस्त करने की ज़िम्मेदारी नहीं है? हमारा सुझाव है कि माननीय मुख्यमंत्री योगी इस हादसे को एक चुनौती माने और सटीक कारवाई और व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए ऐसे सख्त कदम उठाएं जो पूरे देश के सभी राज्यों के लिए अनुकरणीय उदाहरण बने। दिवंगत बच्चों को इस से बेहतर कोई श्रद्धांजलि नहीं हो सकती है।



