बैंक घोटाले में दो वरिष्ठ अधिकारियों की गिरफ्तारी से अफसरशाही में फैली दहशत

अक्सर तहसीलों में आम लोगों को होने वाली परेशानी से बचाने के लिए अब मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व वाली हरियाणा सरकार ने ऑटो म्यूटेशन प्रणाली एवं पेपरलेस रजिस्ट्रेशन प्रणाली का शुभारंभ किया है। अब हरियाणा में इंतकाल के लिए आवेदन करने की आवश्यकता नहीं होगी। इतना ही नहीं, घर बैठे ही इंतकाल को डाउनलोड भी किया जा सकेगा। मुख्यमंत्री ने इन परियोजनाओं के आ़गाज़ के मौके पर कहा कि प्रदेशवासियों के जीवन को सरल, सुगम और सुविधाजनक बनाने का जो संकल्प राज्य सरकार ने लिया था, अब ऑटो म्यूटेशन प्रणाली एवं पेपरलेस रजिस्ट्री 2.0 के शुभारंभ के साथ उसे एक नई दिशा मिली है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले लोगों को इंतकाल और भूमि संबंधी कार्यों के लिए एक-एक और दो-दो वर्ष तक इंतजार करना पड़ता था। आम नागरिकों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते थे, जिससे उन्हें अनावश्यक परेशानी का सामना करना पड़ता था। वैसे तो प्रदेश में पेपरलेस रजिस्ट्री की शुरुआत 29 सितंबर, 2025 को की गई थी, जिसे 1 नवंबर, 2025 से पूरे राज्य में लागू कर दिया गया था। लेकिन पिछले आठ महीनों के दौरान विभिन्न हितधारकों से प्राप्त सुझावों और अनुभवों के आधार पर अब इसमें कुछ संशोधन करके इसके दूसरे चरण पेपरलेस रजिस्ट्रेशन 2.0 को लागू किया है, जिसमें रजिस्ट्री प्रक्रिया के साथ-साथ इंतकाल को भी शामिल कर दिया है।
मुख्य सचिव की तलाश 
हरियाणा के नए मुख्य सचिव के लिए राज्य के वरिष्ठ आईएएस अफसरों में लॉबिंग अभी से तेज हो गई है। मुख्य सचिव की दौड़ में करीब दस आईएएस अफसर शामिल बताए जा रहे हैं। ऐसे में नायब सरकार को मुख्य सचिव के पद पर चयन के लिए गहन मंथन करना पड़ रहा है। ऐसा इसलिए कि दावेदारों में नौ आईएएस अफसर ऐसे हैं, जिनका कार्यकाल इस साल या अगले साल पूरा हो जाना है। राज्य के मौजूदा मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी इसी महीने 30 जून को रिटायर हो जाएंगे। 1990 बैच के रस्तोगी को रिटायर होने से एक दिन पहले पिछले साल एक वर्ष का सेवा विस्तार दिया गया था। नए मुख्य सचिव के सबसे प्रबल दावेदारों में सबसे सीनियर 1990 बैच के आईएएस सुधीर राजपाल हैं। अभी उनके पास गृह सचिव के नाते कानून व्यवस्था, जेल प्रशासन और न्यायिक समन्वय जैसे विभागों की ज़िम्मेदारी है। राजपाल को इसी साल नवंबर महीने में रिटायर होना है। अगर उन्हें मुख्य सचिव के पद पर नियुक्त किया जाता है तो उम्मीद रहेगी कि उनके सेवाकाल में भी विस्तार किया जाएगा। मुख्य सचिव के दावेदारों में दूसरे स्थान पर 1990 बैच की डॉ. सुमिता मिश्रा हैं, जिनके पास राजस्व, आपदा प्रबंधन, चिकित्सा शिक्षा व स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी है। राज्य की गृह सचिव रह चुकी डॉ. मिश्रा भी अगले साल जनवरी में रिटायर हो जाएंगी। इसके अलावा राजा शेखर वुंडरू, विनीत गर्ग, अनिल मलिक, जी. अनुपमा, अपूर्व कुमार सिंह, अभिलक्ष्य लिखी, अरुण कुमार गुप्ता और वी. उमाशंकर भी इस दौड़ में शामिल हैं। मुख्य सचिव की कुर्सी इनमें से किस अफसर को मिलेगी, अगले कुछ दिनों में साफ हो जाएगा।
अफसरों में दहशत 
हरियाणा में हुए करोड़ों रुपए के बैंक घोटाले में थोड़े अंतराल के बाद दो आईएएस अफसरों की गिरफ्तारी से प्रदेश की अफसरशाही में हड़कंप है। इससे पहले भ्रष्टाचार के मामलों में राज्य के तीन आईएएस अफसरों के खिलाफ प्रदेश सरकार ने मुकद्दमा चलाने की इजाज़त देने से इनकार कर दिया था। तब अफसरों ने बड़ी राहत महसूस की थी, लेकिन अब जिस तरह से सीबीआई करोड़ों रुपए के बैंक घोटाले में एक-एक कर आईएएस अफसरों को उठा रही है, इससे अफसरों का डर बढ़ गया है। डर इसलिए भी है कि सीबीआई इस मामले में चार आईएएस अफसरों से पूछताछ कर उनके ठिकानों पर छापेमारी के जरिए सबूत इकट्ठे कर चुकी है। इस मामले में और गिरफ्तारियों की संभावना से सीबीआई ने इन्कार नहीं किया है। सीनियर आईएएस अफसर आरके सिंह और आईएफएस अफसर नवनीत श्रीवास्तव की गिरफ्तारी के बाद अब सीबीआई ने एक और आईएएस अधिकारी पंकज अग्रवाल को गिरफ्तार कर अदालत से रिमांड पर ले लिया है। राज्य के पांच से ज्यादा आईएएस अफसर इस समय गंभीर आरोपों के घेरे में हैं। सीबीआई ने यह कार्रवाई आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में करोड़ों रुपए के गबन व घोटाले के मामले में की है। 
सीबीआई जांच के दौरान सामने आया है कि इस बैंक में यह खाते वित्त विभाग के मौजूदा नियमों का उल्लंघन करके खोले गए थे। फॉर्म में जानकारी भी इस तरह से भरी गई थी कि धोखाधड़ी के लेन-देन को छुपाया जा सके। यह सब आईएएस अधिकारियों और बैंक के अफसरों की मिलीभुगत से ही संभव हो पाया था। आगे क्या होगा, सभी की नजरें इस ओर लगी हुई हैं ! 
फज़र्ी कंपनियां
सवाल यह है कि आईएएस अफसरों ने ऐसा क्यों किया? जिनकी जिम्मेदारी राज्य सरकार के हितों का ध्यान रखने की है, उन्होंने ऐसी लापरवाही क्यों बरती? फिक्स्ड डिपॉजिट खोलने के नाम पर जो चेक दिए गए थे, उन्हीं चेकों का इस्तेमाल कर बैंक से पैसे निकाल लिए गए और निकाली गई रकम शैल कंपनियों के खातों में ट्रांसफर कर दी गई। इन कंपनियों को बैंक के अफसर ही कंट्रोल और ऑपरेट करते थे। आरोप है कि पंचकूला नगर निगम के कमिश्नर रहते आरके सिंह के समय में 79.46 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी हुई थी। पंकज अग्रवाल पर राज्य सरकार को 60.54 करोड़ रुपए का नुकसान पहुंचाने का आरोप है। इसके अलावा आईएफएस अफसर नवनीत श्रीवास्तव जब अक्षय ऊर्जा व विज्ञान-प्रौद्योगिकी संवर्धन सोसायटी (क्रेस्ट) के पूर्व सीईओ के पद पर तैनात थे, उनके समय में 75 करोड़ रुपए से अधिक के गबन का मामला सामने आया था। 
जांच के मुताबिक आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में संचालित क्रेस्ट के तीन खातों में जमा सरकारी धनराशि को सुनियोजित तरीके से विभिन्न शेल कंपनियों में स्थानांतरित किया गया। गबन की रकम का एक हिस्सा ऐसी निजी कंपनी के खाते में पहुंचा, जिसमें श्रीवास्तव की पत्नी और एक करीबी रिश्तेदार निदेशक के रूप में जुड़े हैं। क्रेस्ट के बैंक खातों की जांच से सीबीआई ने कुल 303 संदिग्ध लेन-देन पाए हैं, जिसमें लगभग 75.34 करोड़ रुपए चार अलग-अलग शेल कंपनियों के खातों में भेजे गए। बहरहाल, जांच अभी जारी है और इस मामले में अभी कई और गिरफ्तारियां होनी हैं। रिपोर्ट आने पर ही इस घोटाले की परते खुलेंगी। 
मुख्यमंत्री सैनी गंभीर 
करोड़ों रुपए के इस बैंक घोटाले की जानकारी जैसे ही सामने आई, मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने संदिग्ध पाए गए आईएएस अफसरों को फ़ौरन महत्वपूर्ण महकमों से हटाकर खुड्डे लाइन कर दिया। एकदम से अफसरों के इस तरह तबादलों से यह साफ़ हो गया कि मुख्यमंत्री इस मामले को हल्के में नहीं लेंगे। मामले की जांच विजिलेंस ब्यूरो ने फौरन ही शुरू कर दी थी और कुछ कर्मचारियों को गिरफ्तार भी किया गया। लेकिन जांच आगे बढ़ती, इससे पहले ही मुख्यमंत्री ने यह मामला सीबीआई के हवाले कर साफ कर दिया कि किसी आरोपी को राज्य सरकार की तरफ से कोई मदद मिलने वाली नहीं है। सीबीआई को संदिग्ध आईएएस अफसरों के खिलाफ जांच के लिए मंजूरी देने में भी कोई देरी नहीं की गई। इसी का परिणाम है कि दो आईएएस और एक आईएफएस अफसर आज सलाखों के पीछे बैठे हैं। कुछ अन्य आईएएस अफसरों को भी अब अपनी गिरफ्तारी का डर सता रहा है। मुख्यमंत्री चाहते हैं कि इस मामले में ऐसी सख्त कार्रवाई हो, ताकि भविष्य में किसी अफसर को सरकारी पैसे की बंदरबांट में शामिल होने से पहले सौ बार सोचना पड़े। मुख्यमंत्री ने सीबीआई को जांच सौंप कर यह साबित कर दिया है कि उन्हें किसी आईएएस अफसर को बचाने की बजाय राज्य के हित प्यारे हैं। इसका अर्थ यही है कि जिसने जो गलत किया है, वही अब भुगतेगा।    

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