बरनाला: मिड-डे-मील वर्करों द्वारा अनिश्चितकालीन हड़ताल


बरनाला , 2 जुलाई  -  प्रदर्शनकारियों का नेतृत्व कर रही करमजीत कौर ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि वे स्कूलों में बच्चों के लिए पूरी सफाई से खाना बनाती हैं, लेकिन बदले में सरकार द्वारा उन्हें महीने का सिर्फ 3,000 रुपये मेहनताना दिया जा रहा है, जो कि रोजाना का सिर्फ 100 रुपये बनता है। उन्होंने कहा, "इतनी महंगाई के दौर में 3,000 रुपये के साथ घर का गुजारा करना असंभव है, जबकि हमारे पड़ोसी राज्य हरियाणा में मिड-डे-मील वर्करों को बहुत अच्छा मेहनताना मिल रहा है।" उन्होंने आरोप लगाया कि स्कूलों में काम के दौरान किसी दुर्घटना की स्थिति में उन्हें कोई सुविधा या स्वास्थ्य बीमा नहीं दिया गया है और न ही कोई पहचान पत्र या वर्दी मिली है। अगर कोई वर्कर बीमार हो जाए, तो मेडिकल छुट्टी की जगह उन्हें अपने स्तर पर ही किसी अन्य का प्रबंध करके भेजना पड़ता है।

उन्होंने कहा कि न्यूनतम मजदूरी के दायरे में लाकर 26,000 रुपये महीना वेतन दिया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर मांगें न मानी गईं तो वे मुख्यमंत्री भगवंत मान की कोठी और विधानसभा का घेराव करने से भी पीछे नहीं हटेंगी। पंजाब सरकार द्वारा 1 जुलाई से महिलाओं के खातों में पैसे डालने के वादे पर तंज कसते हुए करमजीत कौर ने कहा कि सरकार सिर्फ 'लॉलीपॉप' दे रही है। उन्होंने कहा, जो सरकार हमारी दिन-रात की मेहनत का पूरा मूल्य नहीं दे सकती, वह हमें मुफ्त में 1,000 या 1,500 रुपये कहां से देगी? हमें अंदेशा है कि कहीं खाते लिंक होने के बहाने महिलाओं के खातों में पड़े पहले पांच-सात सौ रुपये भी न उड़ जाएं।
 

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