भविष्य में भी बनी रहे चंदा चोरी मामले में दिखी पारदर्शिता
अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी के बाद गत 6 जुलाई, 2026 को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की हुई पहली औपचारिक बैठक में ट्रस्ट के महासचिव रहे चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा के इस्तीफे स्वीकार कर लिए गये तथा पूर्व आईएफएस कृष्ण मोहन को कार्यवाहक महासचिव बनाया गया है। चढ़ावा चोरी के चलते लंबे समय से मच रहे हंगामे के बाद तीन घंटे तक चली बैठक के उपरांत मीडिया से बात करते हुए कोषाध्यक्ष गोविंद देवगिरी ने कहा कि 22 जुलाई, 2026 को ट्रस्ट की दुबारा बैठक होगी, जबकि ट्रस्ट के कार्यवाहक महासचिव कृष्ण मोहन ने कहा कि चढ़ावा चोरी के आरोपियों को हर हाल में सजा दिलवाएंगे और भविष्य में प्रबंधन की व्यवस्था को बेहद पुख्ता व ज्यादा पारदर्शी बनाया जायेगा। इस दौरान कोषाध्यक्ष गोविंद देवगिरी ने मीडिया को यह भी बताया कि ट्रस्ट को दान के जरिये 3264 करोड़ रुपये मिले थे, जिनमें से 2370 करोड़ रुपये मंदिर निर्माण और अन्य कार्यों में खर्च हो गये हैं। इसके अलावा उन्होंने यह भी बताया कि ट्रस्ट की स्थापना से लेकर 31 मार्च 2026 तक श्रद्धालुओं से मंदिर को 582 करोड़ रुपये की चढ़ावा राशि प्राप्त हुई है। इसमें से 391 करोड़ रुपये ट्रस्ट के संचालन और अन्य मदों पर खर्च किये गये जबकि बाकी धनराशि बैंक खातों में सुरक्षित है। इसी सिलसिले में उन्होंने यह भी बताया कि नगद के अलावा अब तक दान के रूप में श्रद्धालुओं से मिली 2926 भेंटें ट्रस्ट के पास सुरक्षित हैं, इनका एक रजिस्टर बनाया गया है जिससे कोई भी श्रद्धालु अपनी दी हुई भेंट की जानकारी जब भी लेना चाहे, वह ट्रस्ट के किसी भी अधिकारी से अयोध्या में आकर ले सकता है। कुल मिलाकर राम जन्मभूमि मंदिर में करोड़ों रुपये की हुई चंदा चोरी के बाद जिस तरह से देशभर में आक्रोश व्याप्त है, उसको देखते हुए ट्रस्ट की हुई पहली बैठक में काफी हद तक पारदर्शिता बरती गई है और उम्मीद है कि आने वाले दिनों में इसी तरह पारदर्शिता बरती जायेगी ताकि आम जनता का आक्रोश व्यवस्था के विरुद्ध विद्रोह के रूप में न फूटे। जैसे कि 2 जुलाई 2026 को सुबह 7 बजे अमौसी एयरपोर्ट में फूटा, जब लोगों ने मंदिर ट्रस्ट से जुड़े गोपाल राव को देखा। उस समय लोगों ने उन्हें देखते ही न केवल ‘चंदा चोर, चंदा चोर’ के नारे लगाये बल्कि कुछ ही देर में गुस्से से आग-बबूला होकर उनकी तरफ झपटे भी थे। ये तो कहो समय रहते इंडिगो के फ्लाइट स्टाफ ने, यात्रियों के हाथ पैर जोड़कर उन्हें समझाया और फ्लाइट के प्रोटोकॉल की दुहाई देते हुए उनसे संयम बनाये रखने की गुजारिश की, जिसके कारण लोग शांत हो गये, नहीं तो इस दिन कुछ भी हो सकता था।
इस सबके बाद केन्द्र सरकार को सजग होना ही था ताकि देश को लगे कि इतने बड़े मामले में लीपापोती नहीं होगी, जैसे कि पहले होती दिख रही थी। इसलिए 6 जुलाई 2026 को तीन घंटे तक चली ट्रस्ट की चोरी के खुलासे के बाद की पहली बैठक काफी हद तक निर्णायक रही। लेकिन ज़रूरी है कि आगे भी इस जांच पड़ताल में सब कुछ यानि दूध का दूध और पानी का पानी बिल्कुल साफ होना चाहिए, नहीं तो दान चोरी से अब तक जो छवि हनन हुई है, वह दोबारा से संवर नहीं पायेगी। शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने भी कहा है, ‘इतने बड़े भगवान के दरबार में चोरी करके अगर इस्तीफा देने भर से छुट्टी मिल गई, तो इस नाटक को लोग बर्दाश्त नहीं करेंगे। जिस तरह से राम मंदिर में दान की चोरी का मामला उभरकर सामने आया है और शुरू में जिस तरह पूरे मामले में लीपापोती की गई, उससे न केवल देशभर में राम भक्त बल्कि आम लोग भी बेहद आक्रोशित हैं। जो लोग भक्त नहीं हैं और भाजपा के समर्थक भी नहीं हैं, ऐसे लोगों के मन में भी भगवान राम को लेकर आस्था है।
यही वजह है कि राम मंदिर में चंदे की चोरी से पूरा देश सन्न रह गया है, चाहे वह राम भक्त हो या न हो। देश के आम लोगों को यह कतई उम्मीद नहीं थी कि कभी ऐसा दिन भी आयेगा, जब तथाकथित राम भक्त ही आम लोगाें के दिये गये चंदे पर हाथ साफ कर लेंगे। सबसे बड़ी बात यह है कि राम मंदिर ट्रस्ट में हर सदस्य तथाकथित मंदिर समर्थक, भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विभिन्न संगठनों से निकले हुए लोग हैं लेकिन जिस तरह से रह-रह कर उनके कृत्यों की खबरें आ रही थीं और उन्हें दबाया जा रहा था, उस कारण लोगों के सब्र का बांध टूटने लगा था। अगर चोरी की खुलासे के बाद ट्रस्ट की हुई बैठक में भी इन कृत्यों पर पर्दा डालने की कोशिश की जाती, तो विद्रोह हो जाता। पहले तो लंबे समय तक चोरों के खिलाफ एफआईआर नहीं लिखायी गई। जब एफआईआर लिखायी भी गई और 7 आरोपियों से 79.85 लाख रुपये नगद और बड़े पैमाने पर जेवरात आदि बरामद कर लिए गये, उसके बाद भी पुलिस ने इन आरोपियों से आगे की पूछताछ के लिए उनका रिमांड तक नहीं लिया।
इस सबसे लोगों में यह संदेश गया था कि एफआईआर और गिरफ्तारी के बाद भी यह एक तरह से लीपापोती करने का ही एक तरीका है। शायद इसी वजह से आरजेडी सांसद सुधाकर सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर की है कि चढ़ावा चोरी के मामले में सीबीआई जांच की जाए। हालांकि इस सबको लेकर अभी तक किसी बड़ी पार्टी ने राष्ट्रव्यापी आंदोलन की चेतावनी नहीं दी। सिर्फ कांग्रेस के दिग्विजय सिंह ने उज्जैन से अयोध्या तक की यात्रा की घोषणा की है और देश के लोगों को इस चोरी के विरुद्ध उठ खड़ा होने की अलख लगाने की बात की है। मगर हर गुजरते दिन के साथ जिस तरह से इस मामले को लेकर देशभर में माहौल तनावभरा हो रहा है, विरोधियों को तो छोड़िये, भाजपा और आरआरएस से जुड़े लोग भी इस सबसे बहुत गुस्से में हैं। साथ ही असहाय महसूस कर रहे हैं। इस सबको देखते हुए ही केंद्र सरकार के इशारे पर चोरी के मामले के खुलासे के बाद हुई ट्रस्ट की पहली बैठक में काफी हद तक पारदर्शिता बरती गई और दान चोरों के विरुद्ध कड़ा रुख अपनाया गया। इसे लगातार बनाये रखना होगा, क्योंकि संत समाज ने भी अब यह कहना शुरू कर दिया है कि सिर्फ इस्तीफा दे देने और उसे स्वीकार कर लेने से कोई बात नहीं बनेगी। संतों के मुताबिक इस्तीफा देना और स्वीकार करना पूरे मामले को लीप-पोत कर बराबर करने की कोशिश है।
संताें के इस आक्रोश से भी सरकार को सबक लेना चाहिए और जो सख्त कार्रवाई का भरोसा दिलाया गया है, उस पर खरे उतरना होगा। जिस तरह से राम मंदिर चढ़ावा चोरी की खबरें सामने आने के बाद शुरुआत में लगभग एक पखवाड़े तक किसी भी तरह मामले को दबाने की कोशिश की गई और उल्टे उलाहना दिया गया कि हिंदू संस्थाओं को बदनाम करने की ये सोची-समझी साजिश है। अब उन गतिविधियों को याद करके लोग बेहद आक्रोशित हैं। इसलिए केंद्र सरकार और आरएसएस को आगे बढ़ कर इस मामले को ईमानदारी से दूध का दूध और पानी का पानी करना चाहिए, नहीं तो न सिर्फ भाजपा सरकार बल्कि आरएसएस के सौ सालों की साख पर भी बट्टा लग जायेगा। -इमेज रिफ्लेक्शन सेंटर



