शादी में डी.जे. का एडवेंचर 

चंगू जी ने मंगू जी से कहा। भाई सुना है तुम्हारे यहां शादी है। हां ठीक सुना है ए भाई। लेकिन तुम क्यों पूछ रहे हो। भाई तुम्हारे यहां शादी है इसीलिए पूछ रहा हूं। क्यों कोई खास बात। नहीं भाई ऐसे ही। वो बात ये है कि तुम्हारे यहां तो डी.जे. भी बजेगा। हां, शादी है तो डी.जे. भी बजेगा और नाच-गाना भी होगा। क्यों पूछ रहे हो। अरे नहीं भाई मेरे भाई की तबीयत डी.जे. से बहुत घबराती है। सोच रहा था कि अगर डी.जे. ना बजता तो ठीक रहता, लेकिन शादी में शोर ना हो तो मजा नहीं आता। आखिर शादी-ब्याह, संगीत और शोर के लिए ही तो होता है। जब शोर ना हो। हो-हल्ला ना हो तो क्या फायदा ऐसी शादी का। और तो और मैंने तो डी.जे. वाले को एडवांस पैसा भी दे रखा है। मेरा एडवांस पैसा बर्बाद हो जाएगा। भाई चंगू जी डी.जे. का पैसा मुझसे ले लेना। चंगू जी ने मंगू जी से वीनित भाव से कहा। मंगू जी बोले भाई मैं घर में पूछ कर बताता हूं। ठीक है भाई। 
मंगू ने घर में ये समस्या बताई कि चंगू जी के भाई दिल के मरीज हैं। लिहाजा डी.जे. नहीं बजेगा। वैसे तो डी.जे. का बजना या नहीं बजना कोई बड़ी बात नहीं थी, लेकिन हमारे समाज में एक-से-इक्कीस लोग होते हैं। जो किसी भी बात को ना होना। अपनी नाक का कटना मानकर चलते हैं। उनकी नाक हर छोटी-बड़ी बात पर कट जाती है। 
मंगू के भाई संगू के लड़के तंगू की शादी थी। एक रिश्तेदार ने कहा कि आपका तो एक ही लड़का है। क्या आप उसकी शादी बार-बार कीजियेगा। दिल के अरमान दिल में रह जाते हैं। आखिर किसी के कहने से डी.जे. ना बजेगा। आखिर समाज में हमारी भी तो कोई इज्जत है। सब ने हां में हां मिलाई। ऐसे समय में लोग मजे ले लेकर बात को हवा देते हैं। बिना झंझट के शादी हो जाए। ऐसा होना ठीक नहीं रहता है। सबको कुछ ना कुछ एडवेंचर चाहिए होता है। चर्चा आगे बढ़ी। एक ही शादी है। वो भी सालों बाद इस घर में हो रही है। डी.जे. के बिना फीका-फीका नहीं लगेगा। इतनी लाईट, इतना डेकोरेशन सब जाया जाएगा। 
इस छोटी सी बात को बड़ा बनाया गया। तुरन्त-फुरंत में बैठक बुलाई गई। बैठक में तरह-तरह की संभावनाओं पर विचार किया जाने लगा कि आखिर इसके पीछे उनका मकसद क्या हो सकता है? रिश्तेदारों को इसमें किसी साजिश की बू आई। लगा ये किसी ना किसी की साजिश है। ज़रूर कोई अड़ोसी-पड़ोसी इसमें मिला हुआ है। किसी का सुख इनसे देखा नहीं जाता। बेकार की बातों में भी तथ्य निकालने वाले लोग होते हैं। जो हमेशा हमारे आसपास होते हैं। कुछ खुराफाती  लोग सामने वाले की हैसियत नापने लगे। कुछ लोग धमकाने की सोचने लगे। एक ने कहा उसकी बात क्यों मानना? एक हाथ में जमीन चाटने लगेगा। 
आखिर डी.जे. क्यों ना बजेगा। डी.जे. का ना बजना एक मामूली समस्या से नाक की बात कब बन गई पता ही नहीं चला। 
जितने लोग थे, उतनी बातें थीं। एक ने कहा डी.जे. बजेगा और ज़रूर बजेगा। देखता हूं कौन रोकता है। तुम उसकी बात सुनकर कैसे चले आए। तुम्हें उसका मुंह तोड़ देना चाहिए था। एक ने कहा अपने त्योहारों में तो डी.जे. खूब बजाते हैं। और हमारे यहां शादी है तो डी.जे. नहीं बजेगा। वाह रे भाई वह! डी.जे. तो बजेगा और ज़रूर बजेगा। 

-मेघदूत मार्केट फुसरो 
बोकारो झारखंड, पिन 829144 

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