यह कैसी टेक्नोलॉजी है

आज के दौर में जो जुगाड़ टेक्नोलॉजी को समझ गया, समझिए उसने आधी जंग जीत ली। यह एक ऐसी तकनीक है जो लगभग हर क्षेत्र में मौजूद है। चाहे कारोबार हो, व्यापार हो या सत्ता का दरबार-सफलता के लिए इसका होना मानो अनिवार्य हो गया है। विज्ञापन से लेकर रोज़गार तक, हर जगह इसका सहारा लेकर लोग अपना काम निकालते हैं।
आज देश की राजनीति में इसका धड़ल्ले से प्रयोग हो रहा है। साम, दाम, दंड, भेद इन सबका मिश्रण करके जो परिणाम हासिल किया जाता है, वही आज के समय में जुगाड़ टेक्नोलॉजी कहलाता है।
यदि आप लोन लेना चाहते हैं, तो आपको भी कई पापड़ बेलने पड़ते हैं। बिना नगद नारायण की सेवा किए मंज़िल तक पहुंचना आसान नहीं। आप चाहे जितना प्रयास कर लें, बिना सही जुगाड़ के काम बनना मुश्किल है। इस स्थिति को हम दूसरे शब्दों में रिश्वत टेक्नोलॉजी भी कह सकते हैं।
नौकरी की बात करें। यदि आप हर दृष्टि से योग्य हैं, तब भी कई बार दान-दक्षिणा का आदान-प्रदान अनिवार्य हो जाता है। बिना कुछ खिलाए-पिलाए यदि नौकरी मिल जाए, तो उसे अपवाद ही माना जाएगा। यहां सोर्स और पैरवी का बड़ा महत्व है। कई बार तो लेन-देन के बावजूद भी जुगाड़ फेल हो जाता है, क्योंकि कोई और आपसे अधिक पावरफुल जुगाड़ लगा देता है। ऐसे में कम खर्च करने वाला व्यक्ति, अधिक खर्च करने वाले के सामने टिक नहीं पाता। आज अस्पताल भी एक उद्योग की तरह संचालित हो रहे हैं, जहां जुगाड़ टेक्नोलॉजी का खुलकर इस्तेमाल होता है। यदि अस्पताल में बेड खाली नहीं है, तो किसी नेता या अधिकारी का जुगाड़ लगाकर काम कराया जा सकता है। कई बार खर्च भी उसी के अनुसार घट-बढ़ जाता है। यदि इलाज इंश्योरेंस के तहत हो, तो मरीज को ज़रूरत से ज्यादा समय तक भर्ती रखकर बिल बढ़ा दिया जाता है। दो घंटे में ठीक होने वाला मरीज भी एक रात अस्पताल में रखा जाता है, ताकि क्लेम बढ़ाया जा सके।
वास्तव में आज शायद ही कोई ऐसा क्षेत्र बचा हो, जहां जुगाड़ टेक्नोलॉजी के बिना काम चल सके। समस्या गंभीर हो तो उसे रंगीन बनाने के लिए इसका इस्तेमाल और बढ़ जाता है। नौकरी में प्रमोशन हो, तिकड़म भिड़ाना हो या आपसी टकराव-हर जगह यह अलग-अलग रूप में सामने आती है।
जुगाड़ टेक्नोलॉजी के भी कई प्रकार हैं।
यदि बात से बात बन जाए, तो उसे वार्ता टेक्नोलॉजी कह सकते हैं।
यदि पैसे के बल पर काम निकाला जाए, तो वह रिश्वत टेक्नोलॉजी है।
और यदि डराकर-धमकाकर काम कराया जाए, तो उसे दंड टेक्नोलॉजी कहा जा सकता है।
अर्थात जुगाड़ टेक्नोलॉजी का परिवार बहुत बड़ा है। आप दुनिया के किसी भी कोने में चले जाएं, यह किसी न किसी रूप में आपको ज़रूर मिल जाएगी।
जैसे कोई कह रहा हो।
‘अजी, आप मुझसे रूठकर कहां जाएंगे,
जहां-जहां जाएंगे, मुझे वहीं पाएंगे।’

-लिली आर्केड, फ्लैट नं.101 
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