तीन देशों की सफल यात्रा
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की तीन देशों इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड की कुछ दिनों की यात्रा प्रत्येक पक्ष से महत्त्वपूर्ण कही जा सकती है। ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड प्रशांत महासागर के विशाल द्वीपों वाले देश जिन्हें ओशियाना कहा जाता है, इन देशों की प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की यह यात्रा हिन्द प्रशांत क्षेत्र में मुख्य रूप में आपसी सहयोग और साझ को मज़बूत करने वाली कही जा सकती है। ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड में लाखों ही भारतीय परिवार रहते हैं। यह भारत के साथ समुद्र द्वारा हिंद महासागर और प्रशांत महासागर से हज़ारों किलोमीटर दूर होते हुए भी लम्बी अवधि से आपसी सहयोग में बंधे रहे हैं। दोनों ही देशों में ब्रिटेन और यूरोप की बस्तियां बनी रही हैं। बाद में भारत सहित विश्व के अलग-अलग भागों में से लोग यहां आकर बसने शुरू हो गए। ऑस्ट्रेलिया अनेक द्वीप समूहों वाला विशाल देश है, जिसकी धरती भारत से लगभग दो गुणा अधिक है। इसका पड़ोसी देश न्यूज़ीलैंड है। ऑस्ट्रेलिया के मुकाबले में यह क्षेत्र के लिहाज़ से बहुत छोटा देश है, जिसकी धरती लगभग पौने तीन लाख किलोमीटर है। इन दोनों देशों ने अनेक पक्ष से बहुत विकास किया है। चाहे इनकी जनसंख्या तुलनात्मक रूप में बहुत कम है, परन्तु इन देशों में लोगों का जीवन स्तर बहुत ऊंचा है। चीन की समुद्र में विस्तारवादी नीतियों के कारण आज दर्जनों ही देश चिंतित प्रतीत होते हैं, जिनमें ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड भी शामिल हैं।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की यह यात्रा इन देशों के साथ प्रत्येक तरह का सहयोग बढ़ाने के साथ-साथ हिन्द-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा संबंधी विचार-विमर्श के साथ भी जुड़ी हुई है। प्रशांत-महासागर के ये दोनों देश भारत के साथ लगातार जुड़े रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया के साथ भारत का परमाणु ऊर्जा समझौता बेहद महत्त्वपूर्ण रहा है। चाहे वर्ष 2014 में विकास के लिए दोनों देशों में परमाणु समझौता हुआ था, परन्तु इस बार ऑस्ट्रेलिया द्वारा भारत को यूरेनियम की पूर्ति के लिए जो समझौता किया गया है, उससे भारत की परमाणु शक्ति में वृद्धि होगी। चाहे हम विश्व भर के कई बड़े देशों द्वारा लगातार परमाणु हथियारों के भंडार जमा करने के सख्त खिलाफ हैं, परन्तु दरपेश चुनौतियों के दृष्टिगत भारत को भी अपनी सुरक्षा का ध्यान रखना ज़रूरी होगा। वर्ष 2022 में दोनों देशों में व्यापार समझौता हुआ था, जो अब तक हमेशा आगे बढ़ता रहा है। इस बार भी दुर्लभ खनिजों और ऊर्जा के क्षेत्र में किए गए समझौतों में कोयला, डीज़ल और प्राकृतिक गैसों का भारत में आयात होगा।
भारत-ऑस्ट्रेलिया समुद्री रक्षा के लिए विशेष योजनाएं बना रहे हैं, जिनके द्वारा स्वतंत्र और खुला हिन्द-महासागर क्षेत्र सुनिश्चित करना शामिल है। इसी तरह न्यूज़ीलैंड की राजधानी ऑकलैंड में एक ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते पर दोनों देशों ने हस्ताक्षर किए हैं, जिसमें आपसी बाज़ारों तक सम्पर्क करना और निवेश शामिल है। व्यापार के साथ-साथ रक्षा, शिक्षा, कृषि, खेल और पर्यटन के क्षेत्र में 10 अहम समझौते किए गए हैं। डेयरी और पशु पालन में नई तकनीकें अपनाने में न्यूज़ीलैंड भारत की सहायता करेगा और किसी भी तरह की आपदा में दोनों देश आपसी सहयोग के साथ इसका मुकाबला करेंगे।
इन तीन देशों में प्रधानमंत्री की यात्रा का हासिल बहुत उपयोगी होने की समर्था रखता है। आज जबकि प्रत्येक तरह के संचार साधनों के क्षेत्र में एक क्रांति आ चुकी है, उस समय भारत यदि दुनिया के अलग-अलग देशों के साथ प्रत्येक तरह के सहयोग की कार्रवाई में अपना योगदान डालता है तो यह देश के विकास मार्ग पर आगे बढ़ने का संदेश है, जिससे भारत के तेज़ी से विसकित होने की भी प्रत्येक पक्ष से उम्मीद ज़रूर बंधती है।
—बरजिन्दर सिंह हमदर्द

