आर या पार की लड़ाई
पाकिस्तान के कब्ज़े वाले पाक अधिकृत कश्मीर में जिस तरह जगह-जगह हज़ारों की संख्या में लोग सड़कों पर उतर आये हैं और उनके नेताओं ने आर या पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है, उससे पहले ही चारों तरफ से घिरे पाकिस्तान के शासकों का चिंतित होना स्वाभाविक है। पाकिस्तान एक पूर्व-निर्धारित नीति के अधीन दशकों से भारतीय इलाके जम्मू-कश्मीर पर अपना अधिकार जताता आया है। इसे हासिल करने के लिए उसने एक तरह से अपना सब कुछ दांव पर लगा दिया है। भारत के साथ इस मामले को लेकर वह कई लड़ाइयों में भी उलझा रहा और उसने इधर लगातार हर तरह का खून-खराबा करने और करवाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। आज भी वह अपने पोषित आतंकी संगठनों को इधर भेज कर गड़बड़ करवाने से हिचकिचाता दिखाई नहीं दे रहा।
परन्तु ऐसा करते हुए अब यह लगने लगा है कि पाकिस्तान द्वारा हथियाया गया कश्मीर भी उस के हाथ से निकलता जा रहा है। वहां पैदा हुए हालात इसकी हथियारबंद सेना से भी काबू में नहीं आ रहे। वैसे तो यहां कश्मीरियों का यह संघर्ष कई वर्षों से चलता आ रहा है परन्तु पिछले माह 10 जून से इसने बेहद ज़ोर पकड़ लिया है। वहां अलग-अलग शहरों में बड़ी संख्या में इकट्ठे हुए लोगों द्वारा धरने भी लगाए जा रहे हैं और प्रदर्शन भी किए जा रहे हैं। पाक अधिकृत कश्मीर की अवामी एक्शन कमेटी के नेता अमान खान ने सीधी बगावत का ऐलान करते हुए कहा है कि कश्मीर पाकिस्तान का हिस्सा नहीं है और पाकिस्तान ने इसे अपना एक उपनिवेश बना रखा है। यह भी कि वहां केन्द्र सरकार के निर्देश पर खाद्य पदार्थों को आने से रोक दिया गया है और मीडिया संचार साधनों पर भी पूरी सख्ती की जा रही है। सांझी अवामी एक्शन कमेटी का गठन वर्ष 2023 के अंतिम महीनों में किया गया था। मई 2024 को इस समिति द्वारा आयोजित भारी संख्या में लोगों ने पाक अधिकृत कश्मीर की राजधानी मुज़फ्फराबाद की ओर रोष मार्च शुरू किया था, जिसे सुरक्षा बलों तथा सेना ने गोलियां बरसा कर सख्ती से रोक दिया था। एक ओर लगातार यह संघर्ष जारी है तथा दूसरी ओर सरकार द्वारा इस वर्ष 27 जुलाई को वहां की विधानसभा के चुनाव करवाने की घोषणा की हुई है, परन्तु जिस तरह पैदा हुए इस रोष में प्रत्येक क्षेत्र के सरकारी कर्मचारियों से लेकर अध्यापकों तक ने भाग लेना शुरू किया है, उससे यह सुनिश्चित प्रतीत होने लगा है कि प्रशासन की बागडोर सरकार के हाथों से फिसल जाएगी।
नई सूचनाओं के अनुसार सांझी एक्शन कमेटी द्वारा 15 जुलाई को आज़ादी की घोषणा किए जाने की सम्भावना है और उसकी ओर से पाकिस्तान की सेना और सरकार को पाक अधिकृत कश्मीर के शहरों को तुरंत खाली करने की अंतिम धमकी भी दी हुई है। पिछले दिनों एक ऐसे ही बड़े रोष प्रदर्शन पर सेना प्रमुख आसिम मुनीर के आदेश पर सेना द्वारा प्रदर्शनकारियों पर जो गोलीबारी की गई थी, उसमें लगभग 3 दर्जन लोगों की मौत हो गई, सैकड़ों व्यक्ति घायल भी हो गए थे। इसके बाद यह रोष और भी व्यापक हो गया था। एक्शन कमेटी के नेता उमर नज़ीर कश्मीरी ने आन्दोलन को नई दिशा देने की घोषणा की है। आन्दोलनकारियों की मुख्य मांग विधानसभा में कश्मीरी शरणार्थियों के लिए 12 आरक्षित सीटें खत्म करने की है। इसके साथ-साथ वे बिजली के रेट में कमी करने तथा आवश्यक खाद्य पदार्थ सस्ती दरों पर उपलब्ध करवाने की भी मांग कर रहे हैं। उनकी ओर से हाईडल प्रोजैक्टों से पैदा होती बिजली को दूसरे राज्यों को भेजने का भी विरोध किया जा रहा है। अब तक इस आन्दोलन में हज़ारों गिरफ्तारियों के साथ-साथ 60 मौतें भी हो चुकी हैं। अब पाकिस्तान में लम्बे समय से सशस्त्र संघर्ष कर रहे बलोचों तथा पश्तूनों के साथ-साथ कश्मीरी लोग भी सरकार के खिलाफ लड़ाई में शामिल हो गए हैं। यह स्थिति पाकिस्तान के लिए एक ऐसी गम्भीर चुनौती बन चुकी है, जिसमें से उसके लिए निकल सकना बेहद कठिन होगा।
—बरजिन्दर सिंह हमदर्द

