कौशल ही रोज़गार का सबसे मज़बूत आधार
आज के लिए विशेष
विश्व युवा कौशल दिवस प्रत्येक वर्ष 15 जुलाई को दुनियाभर में मनाया जाता है। इस दिवस का उद्देश्य युवाओं को कौशल विकास के क्षेत्र में आत्मनिर्भर और जागरूक बनाने के लिए किया जाता है। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने वर्ष 2014 में युवाओं को रोज़गार, अच्छे कार्य और उद्यमिता के लिए कौशल से लैस करने के रणनीतिक महत्व को मनाने के लिए 15 जुलाई को विश्व युवा कौशल दिवस के रूप में घोषित किया था। इस वर्ष विश्व युवा कौशल दिवस की 11 वीं वर्षगांठ है। इस दिवस की शुरुआत इसलिए की गई ताकि वैश्विक स्तर पर कौशल की कमी की ओर ध्यान दिया जा सके, जो कई युवाओं को अच्छे रोज़गार पाने और समाज में पूरी भागीदारी से वंचित करती है।
आज की तेज़ी से बदलती दुनिया में शिक्षा के साथ-साथ व्यावहारिक कौशल का होना ज़रुरी है। तकनीकी प्रगति, वैश्विक अर्थव्यवस्था और बदलते कार्यस्थलों के कारण युवाओं को लगातार नए कौशल सीखने और अपने मौजूदा कौशल को निखारने की ज़रूरत है। एक रिपोर्ट के अनुसार लगभग 26.7 करोड़ युवा नीट यानि रोज़गार, शिक्षा या प्रशिक्षण में नहीं है, की श्रेणी में हैं और यह संख्या 27.3 करोड़ तक पहुंचने की सम्भावना व्यक्त की जा रही है। यह दिवस यह भी दर्शाता है कि कौशल विकास सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति, गरीबी उन्मूलन और आर्थिक वृद्धि के लिए आवश्यक है। यह तकनीकी और व्यावसायिक शिक्षा को युवाओं के बेहतर भविष्य के लिए एक सशक्त माध्यम के रूप में प्रोत्साहित करता है। हुनर ही भविष्य की सबसे बड़ी पहचान है। हर नया कौशल सफलता का मार्ग खोलती है। सीखना सतत जारी रखना होगा। आज का कौशल, कल की ताकत है। मेहनत और कौशल कभी व्यर्थ नहीं जाते। कौशल ही रोज़गार का सबसे मजबूत आधार है।
भारत की तेज़ी से बढ़ती आबादी का 65 प्रतिशत हिस्सा 35 वर्ष से कम आयु का है और उनमें से कई लोगों के पास आधुनिक अर्थव्यवस्था के लिए आवश्यक कौशल का अभाव है। एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक हर साल लगभग एक करोड़ युवा कार्यबल में प्रवेश करते हैं और उनमें से केवल आधे ही रोज़गार के योग्य माने जाते हैं, ऐसे में कौशल-आधारित, उद्योग-केंद्रित शिक्षा मॉडल की आवश्यकता पहले कभी इतनी ज़रूरी नहीं थी, लेकिन अब इस अंतर को पाटना केवल एक आर्थिक अनिवार्यता नहीं है, यह एक राष्ट्रीय मिशन है। भारत सरकार भी युवाओं को कौशल में प्रवीण बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण योजनाएं चला रही है, जैसे प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना, स्किल इंडिया मिशन आदि। इन योजनाओं का लक्ष्य युवाओं को विभिन्न उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुसार प्रशिक्षित करना और उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है।
मोदी मंत्रिमंडल ने केंद्रीय क्षेत्र योजना कौशल भारत कार्यक्रम को वर्ष 2026 तक जारी रखने और पुनर्गठन को मंजूरी दी है। कौशल भारत कार्यक्रम में प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना, प्रधानमंत्री राष्ट्रीय प्रशिक्षुता प्रोत्साहन योजना और जन शिक्षण संस्थान योजना शामिल है। वर्ष 2022-23 से 2025-26 की अवधि के लिए कौशल भारत कार्यक्रम का परिव्यय 8,800 करोड़ रुपये है। समस्या केवल नौकरी की कमी नहीं है, बल्कि शिक्षा प्रणाली और श्रम बाज़ार की ज़रूरतों के बीच मेल न होना है। साथ ही उचित क्रियान्वयन, उद्योग से तालमेल और नतीजों की निगरानी। कौशल विकास कार्यक्रम नतीजों में बदलने चाहिए, केवल घोषणाओं में नहीं। एक अन्य रिपोर्ट में भारत में बेरोज़गारी पर गहरी चिंता व्यक्त की गई है। भारत में बेरोज़गारी एक गंभीर और दीर्घकालिक समस्या है, जो तेज़ जनसंख्या वृद्धि, कम उत्पादकता, अशिक्षा और आर्थिक संरचनात्मक असंतुलन जैसे कारणों से उत्पन्न होती है। इसके समाधान के लिए भारत सरकार ने विभिन्न रोज़गार सृजन कार्यक्रमों, जैसे ग्रामीण विकास योजनाएं, स्वरोजगार योजनाएं और शहरी गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम लागू किए हैं, जिन्होंने रोज़गार बढ़ाने और जीवन स्तर सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
भ्रषटाचार, जागरूकता की कमी, राजनीतिक हस्तक्षेप और निजी क्षेत्र की सीमित भागीदारी जैसी चुनौतियां इन योजनाओं की प्रभावशीलता को प्रभावित करती हैं। इसलिए आवश्यक है कि कौशल विकास पर सही ढंग से ध्यान दिया जाये तो भारत बेरोज़गारी की समस्या को काफी हद तक कम कर सकता है और समावेशी एवं सतत आर्थिक विकास प्राप्त कर सकता है। देश में बेरोज़गारी दर तेज़ी से बढ़ी है। इस साल उच्च मुद्रास्फीति पर काबू पाना और लाखों लोगों के लिए रोज़गार सृजित करना सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। आज सबसे बड़ी चुनौती युवाओं को रोज़गार देने व आत्मनिर्भर बनाने की है। आज का युवा अपने हक की लड़ाई लड़ रहा है। शिक्षा, रोज़गार और बेहतर भविष्य के लिए आज का युवा जागरूक है। देखना यह है क्या कौशल विकास योजनाओं के बावजूद देश बेरोज़गारी की समस्या से यूं ही जूझता रहेगा।



