लपटों में घिरी दुनिया
अमरीका-इज़रायल ने ईरान पर 28 फरवरी को हमला किया था, उसके बाद यह युद्ध पूरे पश्चिम एशिया में फैल गया था। ईरान द्वारा होर्मुज़ समुद्री मार्ग को बंद करने ने स्थिति को और भी गम्भीर बना दिया था। इस मार्ग द्वारा दुनिया के 20 प्रतिशत तेल और प्राकृतिक गैस का व्यापार होता है। अन्य देशों के साथ भारत भी इससे बेहद प्रभावित हुआ। विश्व भर के ज्यादातर देश इस समुद्री मार्ग को अंतर्राष्ट्रीय व्यापारिक मार्ग मानते हैं, जिसके दूसरी ओर किनारे ओमान के साथ लगते हैं, परन्तु ईरान द्वारा भी इस मार्ग पर अपना अधिकार जताए जाने से स्थिति के और बिगड़ने की आशंका बन गई है। इन दोनों देशों के बीच 17 जून को एक समझौता हुआ था, जिसमें दोनों की ओर से कुछ शर्तों के तहत इस युद्ध को अस्थायी रूप से रोक दिया गया था, परन्तु ईरान के शीर्ष नेता अयातुल्ला खामेनेई की मौत के बाद विगत दिवस उन्हें द़फनाने के दौरान ईरान में जिस तरह का माहौल बन गया है, उसके दृष्टिगत इस युद्ध के शीघ्र बंद होने की सम्भावनाएं खत्म होती जा रही हैं।
ईरान ने अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प, इज़रायल के प्रधानमंत्री बैंजामिन नेतन्याहू सहित यूरोप के कई वरिष्ठ नेताओं को खुलेआम अपना निशाना बनाने की धमकी दी है। उसने ओमान के तट के निकट खड़े एक मालवाहक जहाज़ को अपना निशाना बनाया, जिसके कर्मचारियों में कुछ भारतीय भी शामिल थे। इसकी प्रतिक्रिया स्वरूप अमरीका ने ईरान के लगभग 140 ठिकानों पर लड़ाकू विमानों और ड्रोनों से हमले किए, जिसके जवाब में ईरान ने भी उन 6 खाड़ी देशों पर फिर हमले किये, जिनमें अमरीकी सैन्य अड्डे बने हुए हैं। इसके साथ ही राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने यह भी दावा किया है कि उसने होर्मुज़ मार्ग पर अपना अधिकार स्थापित कर लिया है और यह भी कहा है कि इस मार्ग द्वारा गुज़रने वाले जहाज़ों से अब अमरीका टैक्स वसूलेगा। इससे पहले ईरान भी इस मार्ग से गुज़रने वाले जहाज़ों से टैक्स वसूलने के दावे करता रहा है। भारत ने इस जल मार्ग को अंतर्राष्ट्रीय कानूनों के तहत होने के कारण यह रवैया धारण किया है कि इसमें से गुज़रने वाले सभी मालवाहक जहाज़ों को सुरक्षित आवागमन का अधिकार मिलना चाहिए। इसलिए भारत की ओर से इस मार्ग पर कोई भी टैक्स देने से इनकार किया गया है। विगत पूरे समय में अपनी नीतियों में बड़े बदलाव करके भारत ने तेल और गैस के आयात के लिए लम्बे सुरक्षित समुद्री मार्गों को प्राथमिकता देनी शुरू कर दी है।
पहले भारत लगभग 60 प्रतिशत कच्चा तेल और गैस होर्मुज़ मार्ग से आयात करता था, परन्तु अब यह सप्लाई इधर से कम होकर 20 प्रतिशत रह गई है, परन्तु यह सुनिश्चित है कि यदि यह युद्ध जारी रहता है तो दुनिया भर में ऊर्जा संकट पैदा हो जाएगा, जिसका प्रभाव भारत पर पड़ना भी सुनिश्चित है। समाचारों के अनुसार अब रूस ने भी अपने विशेष लड़ाकू विमान तेहरान भेजने शुरू कर दिए हैं, जिससे इस युद्ध के और भी फैलने का ़खतरा बन गया है, क्योंकि चीन भी इस मामले पर ईरान के साथ खड़े होने को प्राथमिकता दे रहा है। इसके साथ ही यह बात भी सुनिश्चित है कि यदि ईरान होर्मुज़ पर अपना दावा नहीं छोड़ता तो दुनिया के ज्यादातर देश इस मामले पर उसके विरुद्ध खड़े हो जाएंगे, क्योंकि कोई भी इस अंतर्राष्ट्रीय समुद्री मार्ग पर किसी देश के दावे को नहीं मान सकता। इसलिए अब बड़े अंतर्राष्ट्रीय यत्नों की ज़रूरत होगी, जिससे एक ़खतरनाक मोड़ पर आ खड़े हुए इस युद्ध को रोका जा सके।
—बरजिन्दर सिंह हमदर्द

