बाग और पौधे लगाने का उचित समय अगस्त-सितम्बर

बाग-बगीचे और नए पौधे लगाने के लिए अगस्त-सितम्बर का बिल्कुल उचित समय है। इस मौसम में लगाए गए पौधे अच्छे से चलते हैं। कृषि में फसली विभिन्नता लाने और सेहत बनाए रखने के लिए फलदार पौधे लगाना बेहद महत्व रखता है। इनका महत्व औषधि के रूप में भी माना जाता है। फलों की खपत बढ़ाने के लिए प्रत्येक उपभोक्ता को अपने बाग में और किसानों को अपने ट्यूबवेल पर फलों के पौधे इस समय लगा देने चाहिएं। नए बागों में और नए स्थानों पर फलों के पौधे लगाने के लिए इनकी किस्मों  के बारे में जानकारी होना बहुत ज़रूरी है। साइकिल और रेहड़ी वालों से खरीदे गए पौधे नुकसानदायक सिद्ध हो सकते हैं। इससे आर्थिक नुकसान हो सकता है, क्योंकि पौधों की खरीद व ढुलाई का खर्च, मज़दूरी आदि पर किया खर्च और चार-पांच वर्ष तक बिना फल के रहना पड़ सकता है। 
पौधे सिर्फ बागवानी विभाग, पीएयू और नेशनल बागवानी बोर्ड की प्रमाणित नर्सरियों से ही खरीदने चाहिएं। फलदार पौधो में नींबू, अमरूद, आम, बेर, लीची, चीकू, पपीता, लुकाठ, खजूर और बिल आदि के पौधे अगस्त-सितम्बर तक सफलतापूर्वक लगाए जा सकते हैं। इसी तरह नाशपाती, आड़ू, बेर, अनार, फालसा और अंजीर जनवरी-फरवरी में लगाए जा सकते हैं। आंवला और केला फरवरी-मार्च के अलावा आज-कल भी लगाए जा सकते हैं। बरसात ऋतु में लगाए जाने वाले सभी सदाबहार पौधे नर्सरियों से लाते समय खास ध्यान रखना चाहिए ताकि पौधों की गाची न टूटे। अमरूद इलाहाबादी सफेदा, पंजाब सफेदा, हिसार सफेदा, पंजाब किरण, पंजाब पिंक, हिसार सुर्ख किस्मों में से लगाया जाए। आम पूसा हाइब्रिड आम्रपाली, मलिका आदि जैसी बौनी किस्में या परम्परागत दशहरी, मलिका, अलफेंज़ो, लंगड़ा, चौसा तथा चूपने के लिए गंगिया, संधूरी, जीएन-1, जीएन-2, जीएन-3, जीएन-4, जीएन-5, जीएन-6 तथा जीएन-17 किस्में लगाई जा सकती हैं। लीची देहरादून, कलकत्तिया व सीडलेस लेट तथा आंवला एनए-7, एनए-10, बलवंत, नीलम, कंचन, चकैया किस्मों में से, पपीता हनी ड्यू, पूसा डिलीशियस, पंजाब स्वीट रैड लेडी-786 किस्मों में से, अंजीर लोकल व ब्राउन टर्की में से, आड़ू शाने पंजाब, प्रताप, फ्लोरिडा प्रिंस, अर्ली ग्रैंड, प्रभात, पंजाब नेक्टरीन तथा बिल की स्थानीय व कागज़ी किस्में लगाई जा सकती हैं। बेर की उमरान तथा सनोरा नम्बर-2 जैसी किस्मों में से कोई भी किस्म लगाई जा सकती है।
घरेलू बागीचियों में फलदार पौधे लगाने से जहां पौष्टिकता मिलती है, वहीं आर्थिक और शारीरिक तौर पर व्यक्ति खुशहाल और स्वस्थ रहता है। अमरूद खाने से कब्ज़ की समस्या नहीं रहती और इससे विटामिन-सी मिलता है। रक्तचाप कम करने में भी यह फल मदद सहायक होता है। शुगर के मरीज़ों के लिए तो बहुत ही फायदेमंद है। अमरूद में कॉपर भी काफी मात्रा में होता है। कॉपर थायरॉइड कम करने में सहायक होता है। विटामिन-बी3 और विटामिन-बी6 भी इसमें होते हैं। आंवला, नींबू जाति के फलों, स्ट्रॉबेरी और बेर में विटामिन-सी अधिक मात्रा में होता है, जो दांतों के लिए फायदेमंद होता है। अंगूर और बिल व्यक्ति को स्वस्थ रखने में सहायक होते हैं। किन्नू में विटामिन-सी होता है। इसमें लिमोनिन की मात्रा विशेषकर जूस में अधिक होने के कारण कोलेस्ट्रॉल और कैंसर जैसी बीमारियों को दूर रखने में समर्थ है। अंजीर, नींबू और आंवला में कैल्शियम की मात्रा अधिक होती है। आड़ू, फालसा, बेर आदि फलों में पोटाशियम काफी मात्रा में होता हैं। 
बागवानी विभाग के पूर्व उप-निदेशक (सेवा-निवृत्त) डॉ. स्वर्ण सिंह मान जो पटियाला अमरूद एस्टेट स्थापित करने में सफल रहे हैं, के अनुसार पंजाब में अमरूद की बागवानी बड़े रकबे में  है, लेकिन इसे और बढ़ाया जा सकता है। वर्ष में दो बार फल देने के कारण यह बागवानों के लिए फयदेमंद है। डॉ. मान कहते हैं कि नए पौधे ऐसे स्थानों पर लगाने चाहिएं, जहां ऊंची और हवा-रोधी बाड़ लगी हो। हवा रोधी बाड़ लगाने के लिए देसी आम, जामुन, बिल, बोगनविलिया और शहतूत के पेड़ भी लगाए जा सकते हैं। इन हवा-रोधी पेड़ों से प्राप्त होने वाले फलों से अतिरिक्त आय भी होगी। नए लगाए गए पौधों को सीधी धूप और सूर्य से बचाने के लिए उन्हें प्लास्टिक शीट या पराली आदि से ढंक देना चाहिए। पौधे लगाने के बाद मरे हुए, रोगी और अतिरिक्त शाखाओं को काट देना चाहिए। नए लगाए गए पौधों को पहले साल कोई रासायनिक खाद नहीं डालनी चाहिए। एक साल के बाद पीएयू द्वारा सिफारिश की गई खाद ही पौधों को डालनी चाहिए।
नए लगाए गए फलदार पौधों को गर्मियों में एक हफ्ते और सर्दियों में दो हफते बाद पानी देना चाहिए। आड़ू, नाशपाती, अनार, फालसा, अलूचा आदि फलदार पौधों को नवम्बर से दिसम्बर के महीनों में पानी नहीं देना चाहिए ताकि उन पौधों की पत्तियां अच्छी तरह गिर जाएं। पानी का सही इस्तेमाल करने के लिए तिपका सिंचाई प्रणाली का उपयोग करना फायदेमंद रहेगा। पपीता लगाते समय इसके पौधों में नर और मादा दोनों पौधे होने चाहिएं तभी फल प्राप्त होगा।

#बाग और पौधे लगाने का उचित समय अगस्त-सितम्बर