गुरु रविदास जी का बेगमपुरा का संकल्प और भाजपा की कलश यात्रा

650वीं जयंती पर विशेष

हम सभी भारतीय, आने वाली 20 फरवरी को पूरे संत समाज के सेंटर पॉइंट, इन्सानियत के रहबर और आपसी भाईचारे और बराबरी के प्रतीक, शिरोमणि संत गुरु रविदास जी महाराज की 650वीं जयंती के गवाह बनने जा रहे हैं। इसे देखते हुए पंजाब समेत पूरे देश में भक्ति और उत्साह का माहौल महसूस किया जा सकता है। पूरी भाजपा भी कलश यात्राएं, दीप महा उत्सव और जुलूस निकालकर श्रद्धांजलि देने की पूरी कोशिश कर रही है। श्रद्धा केन्द्र गुरु रविदास जी 13वीं-14वीं शताब्दी में पूरे भारत में फैली भक्ति लहर के महान संतों और महान शख्सियतों में से एक थे, जिन्होंने अपने पवित्र ग्रंथों और दुनिया भर में एकता की सोच के ज़रिए पूरी इन्सानियत को रूहानी रोशनी, बराबरी व सामाजिक न्याय का सच्चा रास्ता दिखाया। 
आप जी 1377 ई. में बनारस के पास सीर गोवर्धनपुर में प्रकट हुए, जिसे आज ‘गुरु रविदास की जन्मभूमि’ माना जाता है। उनके द्वारा रचित पवित्र बाणी, जिसमें 40 शब्द (पद) और एक श्लोक धन-धन श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी में अन्य महान भट्टों और भक्तों की बाणी के साथ सुशोभित हैं। इसके अलावा पूरे सिख पंथ के एक और पवित्र ग्रंथ ‘प्रेम-बोध’ और दादू परम्परा के महान ग्रंथ ‘पंच-बाणी’ में आपके द्वारा रचित दिव्य पद न केवल पूरी मानवता के लिए मार्गदर्शक का काम करते हैं, बल्कि ‘सर्व-धर्म समभाव’ के दर्शन के तहत सभी धर्मों में आपकी मान्यता और अपार सम्मान का प्रमाण भी हैं। 
हालांकि यूरोप के इतिहास में मध्य युग को ‘अंधकार युग’ माना गया है लेकिन भारत में 10वीं-11वीं शताब्दी से लेकर 19वीं शताब्दी तक का समय स्वर्ण युग रहा है जिसमें दुनिया का सबसे लंबा और सबसे प्रभावशाली ‘भक्ति आंदोलन’ चला। इस भक्ति आंदोलन के दौरान एक बहुत बड़ा दलित और सामाजिक चेतना आंदोलन भी चला, जिसे संतों और महापुरुषों ने अपनी निर्गुण भक्ति के ज़रिए आगे बढ़ाया। उन्होंने रूढ़िवादी और जाति-आधारित सामाजिक व्यवस्था का कड़ा विरोध किया और इंसानी बराबरी, आज़ादी और आपसी भाईचारे का प्रचार किया। इस मध्य युग में भारतीय समाज में फैली बुराइयों, अंधविश्वासों और धार्मिक-सामाजिक भेदभाव के खिलाफ जो महान क्रांति हुई, उसे ‘भक्ति आंदोलन’ नाम दिया गया। करीब 500 साल तक चले इस आंदोलन ने भारतीय सोच, सभ्यता और जीवन-दृष्टि को पूरी तरह बदल दिया। इसी क्रांति से गुरु रविदास जी के ‘बेगमपुरा’ के अलौकिक कॉन्सेप्ट का जन्म हुआ, जैसे गोस्वामी तुलसीदास जी के ‘राम राज’ का, जिसके बारे में सोचते हुए उन्होंने खुद कहा है :
बेगमपुरा सहर को नाउ।
दुखु अंदोहु नाहि तिहि ठाउ।
मतलब : ‘बेगमपुरा’ का मतलब है- ‘दुख या दर्द से मुक्ति’ और ‘पुरा’ का मतलब है- ‘शहर’ अर्थात एक ऐसा आदर्श समाज, जहां किसी को भी किसी प्रकार का मानसिक या शारीरिक कष्ट न हो। ‘बेगमपुरा’ की यह महान अवधारणा आज भी उस आदर्श, आनंदमय और शोषण-मुक्त समाज का सर्वश्रेष्ठ चित्र प्रस्तुत करती है, जहां प्रत्येक प्राणी समानता, स्वतंत्रता और शांति का आनंद उठाता है।
आज पूरी दुनिया में गुरु रविदास जी के करोड़ों भक्त हैं। पंजाब के जालंधर ज़िले में मौजूद ‘डेरा सचखंड बल्लां’ पूरे रविदासिया समुदाय का मुख्य आध्यात्मिक, धार्मिक और सामाजिक केंद्र है, जो गुरु रविदास जी की लिखी पवित्र बाणी, उनके समानता के संदेश और मानवाधिकारों के प्रचार के लिए पूरी दुनिया में मशहूर हैं। वैसे तो गुरु रविदास जी का प्रकट स्थल उत्तर प्रदेश है लेकिन उन्हें समर्पित पवित्र मंदिर और गुरुद्वारे इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस, इटली, जर्मनी, ग्रीस, हॉलैंड, अमरीका, मॉरिशस समेत दुनिया भर के कई देशों में श्रद्धा से सुशोभित हैं। इसमें कोई शक नहीं कि दुनिया और देश भर में पूरे रविदासिया समुदाय की अच्छी संख्या देश के धार्मिक और राजनीतिक माहौल पर भी असर डालती है। साल 2022 के पंजाब विधानसभा चुनाव में ‘गुरु रविदास जयंती’ की वजह से चुनाव की तारीख में बदलाव इसका जीता-जागता सबूत है। 
जगत गुरु रविदास जी की पवित्र शिक्षाओं, उनके ऊंचे जीवन-परीक्षण और सार्वभौमिक दर्शन को देखते हुए पूरा रविदासिया समुदाय सभी राजनीतिक पार्टियों के लिए बहुत सम्मान का केंद्र रहा है। इसी उम्मीद पर चलते हुए पूरी भारतीय जनता पार्टी ने भी हर साल की तरह इस साल भी गुरु रविदास जी को अपने तरीके से श्रद्धांजलि देने की सच्ची कोशिश की जिसके तहत देश के माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने अब तक कई ऐतिहासिक कदम उठाए हैं और लगातार जारी हैं। 
प्रधानमंत्री मोदी ने हाल ही में अपने पंजाब दौरे के दौरान अमृतसर के छेहर्टा से वाराणसी के लिए श्री गुरु रविदास जी को समर्पित ‘बेगमपुरा एक्सप्रेस’ रेल सेवा को हरी झंडी दिखाकर संगत को एक बड़ा तोहफा दिया। पिछले साल, 2025 में भी राष्ट्रीय स्तर पर सभी हैडक्वार्टरों पर गुरु जी को समर्पित एक पखवाड़ा मनाते हुए, नेशनल लेवल पर सभी हेडक्वार्टरों पर कलश यात्राएं और पथ प्रकाश का आयोजन किया था। इसी सिलसिले को बनाए रखते हुए इस बार भी गुरु रविदास जी की 650वीं जयंती को समर्पित ‘समरसता संकल्प अभियान’ नेशनल लेवल पर श्रद्धा और सम्मान के साथ जारी है। इसके तहत पूरे देश सहित पंजाब भर में तिथि 29 जुलाई, 2026 (पूर्णिमा) से उनकी जयंति की तिथि 20 फरवरी, 2027 (माघ पूर्णिमा) तक गुरु रविदास जी का संदेश घर-घर तर पहुंचाने के लिए भाजपा द्वारा दीप महा-उत्सव, पावन कलश यात्राएं निकाली जा रही हैं। अगर हम सच में एक स्वस्थ और खुशहाल समाज बनाना चाहते हैं, तो हमें गुरु रविदास जी के ‘बेगमपुरा’ के पवित्र संकल्प और उनके विश्व भाईचारे और समानता की शिक्षाओं को अपने जीवन में अपनाना होगा, जिसके लिए पूरी भारतीय जनता पार्टी पूरी तरह से वचनबद्ध और निरन्तर कार्यशील है।

#गुरु रविदास जी का बेगमपुरा का संकल्प और भाजपा की कलश यात्रा