जेन-ज़ी व राहुल सत्ता के लिये गंभीर चुनौती बने
नेता विपक्ष राहुल गांधी की आवाज़ को दबाने व युवाओं तक उनकी पहुंच को नियंत्रित करने का सरकार का प्रयास पिछले दिनों एक बार फिर विफल हो गया जबकि प्रयागराज के कायस्थ पाठशाला ग्राउंड में सांसद राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के लिए 8 अगस्त को अनुमति दे दी गयी। इसे प्रशासन की समझदारी ही कहा जायेगा कि उसने ग्राउंड के इस्तेमाल की पुन: अनुमति देकर छात्रों व युवाओं से होने वाले संभावित टकराव को टाल दिया। परन्तु मात्र दो दिनों के भीतर प्रशासन की इस पल्टी बाड़ी से यह सन्देश तो चला ही गया कि व्यवस्था द्वारा एक बार फिर राहुल गांधी को छात्रों व युवाओं से संवाद करने में विघ्न डालने की कोशिश की गयी। खबर यह भी है कि प्रयागराज के निकटवर्ती ज़िलों में अनेक छात्र छात्राओं को नज़रबंद कर उन्हें सभा में पहुंचने से रोका गया। सभास्थल के आसपास सत्ता समर्थकों द्वारा राहुल गांधी का विरोध करने वाले पोस्टर लगवाए गए। यहां तक कि भाजपा कार्यकर्ताओं द्वारा आनंद भवन के पास राहुल गांधी के काफिले को काला झंडा एवं भगवा झंडा दिखाकर उनका विरोध किया गया। इन सब के बावजूद राहुल गांधी को सुनने के लिये भारी जन सैलाब उमड़ पड़ा।
सवाल यह है कि क्या वजह है कि भाजपा द्वारा कई वर्षों तक करोड़ों रूपये खर्च कर राहुल गांधी की छवि को ‘पप्पू’ बनाने का वृत्तांत गढ़ा गया और सोशल मीडिया पर उनकी छवि बिगाड़ने का बाकायदा अभियान चलाया गया। भाजपा के आईटी सेल ने करोड़ों रुपये खर्च कर राहुल गांधी की राजनीतिक साख को खत्म करने के लिए सोशल मीडिया पर एक सुनियोजित अभियान चलाया। इस अभियान के तहत राहुल गांधी के भाषणों की अधूरी वीडियो क्लिप्स, मीम्स और भ्रामक प्रचार सामग्री के ज़रिये उन्हें एक अपरिपक्व राजनेता के रूप में पेश करने की कोशिश की गई। उसी ‘पप्पू ’ से आज भाजपा इतनी भयभीत हुई प्रतीत होती है कि जगह जगह उसे राहुल गांधी के कार्यक्रम निरस्त कराने, जनता से मिलने से उन्हें रोकने तथा उन्हें परेशान करने के लिये तरह तरह के हथकंडे अपनाने पड़ रहे हैं। अभी गत 17 जुलाई को देहरादून में परेड ग्राउंड में भी इसी तरह का ‘छात्रों की गूंज’ आयोजित होना था जिसमें राहुल गांधी को छात्रों से रूबरू होना था। यहां भी प्रशासन ने पहले अनुमति दी फिर वहां पहले से एक अन्य सरकारी कार्यक्रम का बहाना बता कर परेड ग्राउंड की अनुमति रद्द कर दी जबकि कांग्रेस का आरोप था कि उन्होंने 15 से 17 जुलाई तक के लिए परेड ग्राउंड की बाकायदा अग्रिम अनुमति ली थी। परन्तु शायद पुष्कर सिंह धामी सरकार राहुल गांधी की बढ़ती लोकप्रियता और नीट पेपर लीक तथा बेरोज़गारी जैसे मुद्दों पर छात्रों के साथ होने वाले राहुल के इस सीधे संवाद से डर गई थी, जिसके कारण ऐन वक्त पर झूठा बहाना बनाकर अनुमति रद्द कर दी गई। इसके बाद कार्यक्रम का स्थान बदलकर देहरादून के ही बन्नू स्कूल मैदान में स्थानांतरित किया गया, जहां अंतत: राहुल गांधी का यह छात्र संवाद कार्यक्रम संपन्न हुआ और अनुमान से भी अधिक युवा वहां पहुंचे।
इसी तरह उत्तराखंड के कोटद्वार में 4 जून, 2026 को उत्तराखंड दौरे के दौरान कोटद्वार (पौड़ी गढ़वाल) और अल्मोड़ा के कार्यक्रमों में प्रशासन ने राहुल गांधी का हेलीकॉप्टर खराब मौसम की बात बताकर उतरने नहीं दिया था। इस के पीछे प्रशासन और पायलटों द्वारा खराब मौसम और सुरक्षा कारणों का हवाला दिया गया था। उस समय भी राहुल के कोटद्वार और अल्मोड़ा के सभी कार्यक्रम रद्द हो गए थे। उस समय भी उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता हरीश रावत ने प्रशासन, नागरिक उड्डयन महानिदेशालय और यूकाडा पर सीधे सवाल उठाए थे। रावत ने आरोप लगाया था कि जब उसी हवाई मार्ग पर सरकार और अन्य निजी ऑपरेटरों की हेलीकॉप्टर सेवाएं सामान्य रूप से उड़ान भर रही थीं और अल्मोड़ा से हल्द्वानी के बीच आवाजाही हो रही थी, तो सिर्फ राहुल गांधी के हेलीकॉप्टर को ही उड़ान भरने की अनुमति क्यों नहीं दी गई? कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया था कि सरकार के इशारे पर प्रशासन ने जानबूझकर खराब मौसम का बहाना बनाया ताकि राहुल गांधी युवाओं, पूर्व सैनिकों और आम जनता से संवाद न कर कें। इसके कुछ ही दिनों बाद राजस्थान के कोटा में भी 17 जून, 2026 को राहुल गांधी के छात्र संवाद कार्यक्रम ‘छात्रों की गूंज’ के आयोजन स्थल की अनुमति प्रशासन द्वारा रद्द कर दी गयी थी। और कार्यक्रम के प्रचार के लिए लगाए गए कई होर्डिंग्स और पोस्टर्स को हटा दिया गया था। उस समय सत्ताधारी भाजपा नेताओं ने यह तर्क दिया था कि 21 जून को होने वाली नीट पुन: परीक्षा से ठीक 3 दिन पहले इस तरह की राजनीतिक रैली आयोजित करने से कोचिंग के छात्रों में मानसिक तनाव पैदा होगा। जबकि कांग्रेस नेताओं का आरोप था कि स्थानीय प्रशासन ने कोचिंग हब के संस्थानों और हॉस्टल मालिकों को छात्रों के इस कार्यक्रम में न भेजने के लिए डराया-धमकाया था। आज राहुल गांधी देश के युवाओं, छात्रों व जेन-ज़ी की आवाज़ बन चुके हैं और सत्ता के लिये गंभीर चुनौती साबित हो रहे हैं।
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