पंजाब आर्ट्स काउंसिल की अनोखी नीति

27 जुलाई, 2026 को पंजाब आर्ट्स काउंसिल (अर्थात पंजाब कला परिषद) के आंगन में शाम के समय नवीनीकृत ओपन एयर थिएटर का उद्घाटन हुआ और फिर सरदार तरलोचन सिंह का सम्मान। इन कार्यों की ज़िम्मेदारी लेने वाली पद्म श्री डॉ. रत्न सिंह मेमोरियल चैरिटेबल फाउंडेशन है। मेरे मन में तरलोचन सिंह भी बसे हुए हैं और जग्गी साहिब भी। तरलोचन सिंह मेरे 1953 से 1984 तक नई दिल्ली में रहते हुए मित्र बने और जग्गी जी मेरे पंजाबी यूनिवर्सिटी में पत्रकारिता और जन संचार विभाग में काम करते हुए पंजाबी विभाग के प्रमुख थे। उन दोनों से मेरा प्यार और मित्रता रही है।
मैं खराब स्वास्थ्य की वजह से वहां देर से पहुंचा। मुझे बताया गया कि स्पीकर कुलतार सिंह थिएटर का उद्घाटन करने आए हैं और मेरे मित्र तरलोचन सिंह के सम्मान में एक रस्म होने वाली है। 
जग्गी परिवार ने जग्गी साहिब को याद रखने के लिए पटियाला में फाउंडेशन स्थापित करके जग्गी साहिब की याद को उनके प्रशंसकों और अन्य तक लंबे समय तक जीवित रखने का कार्य किया है। जिसकी प्रत्येक साहित्यकार को खुशी है।
यह और भी अच्छी बात है कि उन्होंने समय-समय पर तरलोचन सिंह जैसे उच्च मेल-मिलाप व्यक्तियों का सम्मान करते रहना है। तरलोचन सिंह ने भी सम्मान की राशि (51,000) फाउंडेशन को लौटा कर फाउंडेशन का धन्यवाद करते हुए सलाह दी है कि इस राशि के मूल्य की जग्गी साहिब द्वारा रचित पुस्तकें जग्गी के प्रशंसकों में बांट दी जाएं। मेरा यह मित्र शुभकामनाओं का मालिक है और मैं उससे ऐसे ही कार्य की उम्मीद रखता था।
कला परिषद आंगन में उक्त गतिविधियों का स्वागत किया जाना बनता है। अगर मुझे कोई असहमति है, तो वह सिर्फ ओपन एयर थिएटर के नाम से है। फाउंडेशन ने इसे अपने स्वर्गीय पिता जी का नाम दिया है।
किसी ऐसी संस्था का, जो काउंसिल की सदस्य भी नहीं। काउंसिल कॉम्प्लेक्स में स्थायी रूप से प्रवेश करना भी किसी राजनीतिक नेता के मन में ऐसी भावना भी पैदा कर सकता है कि वह काउंसिल को दिया जाने वाला खर्च रोक कर इस इमारत में अपना सरकारी स्टाफ बिठा दे। ऐसे क्रियान्वयन से एम.एस. रंधावा द्वारा स्थापित की गई पंजाब आर्ट्स काउंसिल का वजूद खत्म हो जाएगा। पंजाबी साहित्य और संस्कृति से प्रेम करने वालों को इस तरफ  ध्यान देने की ज़रूरत है। वैसे इसका निपटान फाउंडेशन और काउंसिल के दोनों चेयरमैन अपने स्तर पर भी कर सकते हैं। पंजाबी जगत धन्यवादी होगा।
शहीद भगत सिंह का शैक्षणिक सर्टीफिकेट
मेरे परिवार का शहीद भगत सिंह के साथ नाता उनके संधू होने के कारण नहीं, अपितु तत्कालीन सीआईडी इंस्पैक्टर गोपाल सिंह के कारण है, जो भगत सिंह के जीवित रहते नंगे सिर चारपाई पर भगत सिंह के साथ बातें करते देखे जा सकते हैं। सरदार साहिब मेरी जीवन साथी के दादा थे। उन्हें बिना पगड़ी के भगत सिंह से बात करते देखा जा सकता है।
गोपाल सिंह ने यह तस्वीर उन दिनों में भगत सिंह की पहचान के लिए अपने पास रखवाई थी। यह तस्वीर उस तस्वीर से ज़्यादा लोकप्रिय है जिसमें पगड़ी पहने भगत सिंह किसी नाटक या दूसरे खेल में हिस्सा ले चुके थे।
 कल तक उनकी गतिविधियों तथा उपरोक्त बताई दो तस्वीरों से ही अवगत था। मेरे मित्र सरवण सिंह ने अब मुझे भगत सिंह के उस सर्टीफिकेट की एक कॉपी भेजी है जिसमें भगत सिंह के अलग-अलग विषयों में लिए गए अंक ही नहीं, अपितु सर्टीफिकेट के माथे पर फिफ्टी वाली पगड़ी बंधी मिलती है। इसमें भगत सिंह का चेहरा दो तस्वीरों से ज़्यादा सुंदर हैं। मिडिल स्कूल पास करने तक वह लाहौर के गवर्नमेंट मिडिल स्कूल के छात्र थे और उनके सर्टीफिकेट के अनुसार उन्हें किसी भी विषय में 100 में से 72 से कम अंक आए। 72 अंकों वाला विषय अंग्रेज़ी था और 100 में से 75 से 88 अंक वाले विषय हिन्दी, पंजाबी, जियोग्राफी, गणित, विज्ञान, ड्राइंग, ड्रिल और चरित्र थे। यह सर्टीफिकेट सीआईडी वाली तस्वीर को भी मात देता है, जो कुछ चुनिंदा कार्यालयों और घरों में आमतौर पर देखी जा सकती है।

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