एफ.आई.एच. हाकी वर्ल्ड कप 2026

क्या भारत 51 वर्षों का इन्तज़ार खत्म करके पुन: बनेगा विश्व चैम्पियन ?

हाकी को भारत की शान और पहचान कहा जाता है। एक समय था जब विश्व स्तर पर हाकी में भारत का महाशक्ति के रूप में नाम होता था। ओलम्पिक के बाद अब भारत की नज़र 2026 के एफ.आई.एच. हाकी वर्ल्ड कप पर है, जहां 14 से 30 अगस्त तक बैल्जियम और नीदरलैंड की संयुक्त मेजबानी में दुनिया की 16 सर्वोत्तम टीमें विश्व चैम्पियन बनने के लिए अपना ज़ोर लगाएंगी। भारतीय टीम के लिए यह टूर्नामैंट केवल एक और विश्व कप नहीं, बल्कि 1975 के बाद पहली बार विश्व चैम्पियन बनने का सुनहरी मौका है। पिछले कुछ वर्षों में भारतीय टीम ने अपनी खेल, फिटनैस और आत्म-विश्वास में शानदार सुधार किया है और अब वह विश्व की सबसे मज़बूत टीमों में गिनी जाती है। वर्ष 1975 में कुआलालंपुर (मलेशिया) में अजीत पाल सिंह की कप्तानी में भारत ने फाइनल में पाकिस्तान को 2-1 से हराकर अपना पहला और अब तक का इकलौता हाकी वर्ल्ड कप विजेता का खिताब जीता था। उस ऐतिहासिक जीत को अब आधी शताब्दी से ज्यादा समय हो चुका है, परन्तु भारत अभी तक दोबारा विश्व चैम्पियन नहीं बन सका। इसके कई कारण रहे। कुदरती घास से एस्ट्रोटर्फ पर खेल के बदलाव ने यूरोपीय और आस्ट्रेलियाई टीमों को बहुत लाभ दिया। भारत को इस नये युग से तालमेल बिठाने में बहुत समय लगा। आधुनिक फिटनैस, वैज्ञानिक कोचिंग, खेल विश्लेषण और बुनियादी ढांचे में भी भारत कुछ समय के लिए पीछे रह गया था। इस दौरान नीदरलैंड, आस्ट्रेलिया, जर्मनी और बाद में बैल्जियम जैसे देशों की टीमों ने विश्व हाकी पर अपना दबदबा कायम कर लिया। हालांकि पिछले एक दशक में भारतीय हाकी ने शानदार वापसी की है। लगातार ओलम्पिक पदक, एशियाई खिताब, एफ.आई.एच. प्रो लीग में मज़बूत प्रदर्शन और विश्व की प्रसिद्ध टीमों के विरुद्ध हासिल की गई जीत ने यह साबित किया है कि भारत एक बार फिर विश्व चैम्पियन बनने की समर्था रखता है।
हाकी वर्ल्ड कप का संक्षेप इतिहास : हाकी वर्ल्ड कप का विचार पाकिस्तान के एयर मार्शल नूर खान और बैल्जियम के हाकी प्रशासक रेने फ्रैंक ने पेश किया था। पहला पुरूष हाकी विश्व कप 1971 में स्पेन के शहर बार्सीलोना में आयोजित हुआ था। उस समय से यह टूर्नामैंट अंतर्राष्ट्रीय हाकी का सबसे बड़ा और अहम मुकाबला माना जाता है। शुरुआती दौर में यह प्रत्येक दो वर्ष बाद होता था परन्तु बाद में इसको हर चार वर्ष बाद कर दिया गया। आज यह ओलम्पिक के बाद हाकी का सबसे बड़ा मुकाबला माना जाता है। भारत ने 1971 से लेकर अब तक हर विश्व कप में हिस्सा लिया है, परन्तु 1975 में जीता गया स्वर्ण पदक अभी भी उसकी इकलौती विश्व कप की सम्मानीय जीत है।
भारत का विश्व कप सफर : भारत के पहले ही विश्व कप में कांस्य पदक जीत कर अपनी मौजूदगी दर्ज करवाई थी। 1973 में फाइनल तक पहुंचा और 1975 में पाकिस्तान को 2-1 से हरा कर विश्व चैम्पियन बना। इसके बाद भारत लम्बे समय तक विश्व स्तर पर संघर्ष करता रहा। एस्ट्रोटर्फ के आने, यूरोप हाकी की तेज़ रफ्तार, आधुनिक फिटनेस और तकनीकी बदलाव से कदम मिलाने में भारत को समय लगा।
भारत का विश्व कप रिकार्ड (संक्षेप) : 1971 में कांस्य पदक, 1973 में उप-विजेता, 1975 में विश्व चैम्पियन, 1978 से 2014 तक उतार-चढ़ाव भरा दौर, 2018 में क्वार्टर फाइनल, 2023 में क्वार्टर फाइनल तक पहुंच सका।
इस बार मुकाबले बैल्जियम के वेवरे और नीदरलैंड के एमस्टलवीन में खेले जाएंगे। बैल्जियम और नीदरलैंड की साझी मेज़बानी में होने वाला हाकी वर्ल्ड कप 2026 दुनिया के सबसे बड़े हाकी मुकाबलों में से एक होगा। टीमों के विभाजन में 16 टीमों को चार पूलों (ए,बी,सी,डी) में बांटा गया है। हर पूल में चार-चार टीमें होंगी। विश्व की 8वीं रैंकिंग टीम भारत को ग्रुप डी में पाकिस्तान, इंग्लैंड, वेलज़ की टीमों के साथ स्थान मिला है।
मौजूदा भारतीय टीम से नई उम्मीदें : मुख्य कोच क्रैग फुलटन के नेतृत्व में भारतीय टीम अब तेज़ काउंटर अटैक, मज़बूत प्रैसिंग और पैनल्टी कार्नरों का ज्यादा से ज्यादा लाभ लेने वाली टीम बन चुकी है।
कप्तान हरमनप्रीत सिंह दुनिया के सर्वोत्तम ड्रैग फ्लिकरों में गिने जाते हैं। हार्दिक सिंह मिडफील्ड की रीढ़ की हड्डी हैं, जबकि अभिषेक, सुखजीत सिंह, मंदीप सिंह, विवेक सागर प्रसाद टीम की बड़ी ताकत हैं। कोच क्रैग फुलटन की रणनीति ने भारतीय टीम को अनुशासित रखा, तेज़ ट्रांज़िशन और वैज्ञानिक तैयारी वाली टीम में बदला है।
रक्षा भारत की सबसे बड़ी ताकत : कप्तान हरमनप्रीत सिंह का नाम सिर्फ दुनिया के सर्वोत्तम ड्रैग-फ्लिकरों में से एक है, बल्कि उनका नेतृत्व और अनुभव भी टीम के लिए बड़ी ताकत है। अमित रोहिदास, जर्मनप्रीत सिंह, जुगराज सिंह, संजय और सुमित जैसे डिफैंडर भारत की रक्षा को मज़बूती देते हैं। पैनल्टी कार्नरों पर हरमनप्रीत और जुगराज विरोधी टीम के लिए बड़ा खतरा साबित हो सकते हैं।
मिडफील्ड टीम की असली ताकत : हार्दिक सिंह, मनप्रीत सिंह, विवेक सागर प्रसाद, नीलकांत शर्मा और राजिंदर सिंह जैसे मिडफील्डर भारत के खेल की रफ्तार को नियंत्रित करते हैं। गेंद पर काबू, तेज़ पासिंग और काऊंटर अटैक की शुरुआत इस विभाग की सबसे बड़ी खूबी है। हार्दिक और मनप्रीत का अनुभव नाकआऊट मैचों में निर्णायक हो सकता है।
हमलावर लाइन पर बड़ी उम्मीदें : अभिषेक, सुखजीत सिंह, मंदीप सिंह, दिलप्रीत सिंह और शिलानंद लाकड़ा जैसे फारवर्ड किसी भी समय मैच का रूख बदल सकते हैं। पिछले दो वर्षों में भारत की फारवर्ड लाइन ने गोल करने की समर्था में काफी सुधार किया है। यदि ये खिलाड़ी मौके का लाभ लेने में सफल रहे तो भारत किसी भी टीम के लिए मुश्किल खड़ी कर सकता है।
गोलकीपिंग : मोहित एच.एस. और सूरज करकेरा टीम को विश्वसनीय गोलकीपिंग देते हैं। नाकआउट मैचों में उनकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रहेगी।
भारत के मुख्य विरोधी : बैल्जियम, नीदरलैंड, जर्मनी, आस्ट्रेलिया, अर्जेंटीना और स्पेन मुख्य हैं। ये सभी टीमें मौजूदा वर्षों में विश्व हाकी में लगातार अच्छा प्रदर्शन करती आ रही हैं। भारत को खिताब जीतने के लिए इनमें से एक से ज्यादा टीमों को हराना पड़ सकता है। हाकी विशेषज्ञों के अनुसार देखा जाए तो भारत 2026 के विश्व कप की प्रमुख चार दावेदार टीमों में शामिल है।
विश्व हाकी विशेषज्ञों की भविष्यवाणी के अनुसार ये 4 टीमें, नीदरलैंड, भारत, बैल्जियम और जर्मनी मज़बूत दावेदार हैं। यदि भारत खिताब जीतना चाहता है तो ये तीन बातें निर्णायक होंगी। हरमनप्रीत सिंह की पैनल्टी कार्नर कनवज़र्न। फारवर्ड लाइन द्वारा मिले मौकों को गोलों में बदलना। क्वार्टर फाइनल और सैमीफाइलन में बिना दबाव के खेलना। विशेषज्ञों के मूल्यांकन के अनुसार भारत इस बार यकीनी तौर पर सैमीफाइनल तक का मज़बूत दावेदार है और यदि नाकआऊट में अपना सर्वोत्तम प्रदर्शन करता है तो 1975 के बाद पहली बार विश्व कप जीतने की समर्था भी रखता है। 
अब देखने वाली बात होगी कि क्या बैल्जियम और नीदरलैंड की धरती पर भारत द्वारा एक नया इतिहास लिखा जा सकता है।
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