आत्मनिर्भर चिकित्सा तकनीक : विकसित भारत की मज़बूत नींव

भारत ने पिछले एक दशक में स्वास्थ्य सुविधाओं के क्षेत्र में अभूतपूर्व विस्तार किया है। सरकारी और निजी क्षेत्र में अस्पतालों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, जांच केंद्रों और मेडिकल कॉलेजों की संख्या तेजी से बढ़ी है। शहरों के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में भी स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार हुआ है। यह सरकार की ऐसी नीतियों को दर्शाता है, जिनका केंद्र आम नागरिक की स्वास्थ्य सुरक्षा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं को हर नागरिक तक पहुंचाने के लिए काम किया है। इन लगातार किए गए प्रयासों का परिणाम है कि देश में लोगों द्वारा अपनी जेब से स्वास्थ्य सेवाओं पर किए जाने वाले खर्च में पिछले कुछ वर्षों में बड़ी कमी आई है। यह खर्च पहले 65 प्रतिशत तक थाए जो अब घटकर 43 प्रतिशत रह गया है।
जिला अस्पताल में जन्म लेने वाले नवजात शिशु से लेकर बड़े अस्पताल में इलाज करा रहे कैंसर मरीज़ तक, आधुनिक स्वास्थ्य व्यवस्था में भरोसेमंद, अच्छी गुणवत्ता वाले और किफायती चिकित्सा उपकरण बेहद ज़रूरी हो गए हैं। प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन के तहत सरकार ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों की सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था को मज़बूत कर रही है। इसके लिए प्रयोगशालाओं को बेहतर बनाने, गंभीर मरीजों के इलाज की सुविधाएं बढ़ाने, बीमारियों की निगरानी व्यवस्था मजबूत करने और आपात स्थिति से निपटने की क्षमता बढ़ाने पर निवेश किया जा रहा है। जैसे-जैसे भारत 2047 तक विकसित भारत बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, अब जोर एक आत्मनिर्भर चिकित्सा तकनीक क्षेत्र तैयार करने पर है। इसका उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं को और सस्ता, आसानी से उपलब्ध और किसी भी संकट के समय मज़बूत बनाना है।
पहले एभारत कई आधुनिक और जटिल चिकित्सा उपकरणों के लिए काफी हद तक दूसरे देशों से होने वाले आयात पर निर्भर था। इन तकनीकों से स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार तो हुआ, लेकिन इससे इलाज की लागत बढ़ी, आपूर्ति व्यवस्था पर बाहरी निर्भरता बनी रही और इन उपकरणों की पहुंच सीमित रही। इसी जरूरत को देखते हुए राष्ट्रीय चिकित्सा उपकरण नीति-2023 में देश के भीतर आधुनिक चिकित्सा उपकरण बनाने की क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया गया। इसका उद्देश्य चिकित्सा उपकरणों को सस्ता बनाना और जांच की लागत कम करना है। सरकार ने चिकित्सा उपकरणों के पूरे क्षेत्र को मज़बूत करने के लिए कई योजनाएं शुरू की हैं। इनमें उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजना, चिकित्सा उपकरण पार्क और दवा एवं चिकित्सा तकनीक के क्षेत्र में अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने वाली योजना शामिल हैं।
इन पहलों से देश में चिकित्सा उपकरणों के निर्माण, नए शोध, निवेश और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा के लिए बेहतर माहौल तैयार हो रहा है। नतीजे उत्साह बढ़ाने वाले हैं। उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजना के तहत 50 से अधिक आधुनिक चिकित्सा उपकरणों का देश में उत्पादन शुरू हो चुका है। इसके साथ ही इस क्षेत्र में विदेशी निवेश लगातार बढ़ रहा है, जो वैश्विक निवेशकों के बढ़ते भरोसे को दर्शाता है। ये उपलब्धियां बताती हैं कि भारत धीरे-धीरे दुनिया के चिकित्सा तकनीक क्षेत्र में एक भरोसेमंद भागीदार के रूप में उभर रहा है।
सिर्फ  चिकित्सा उपकरणों का निर्माण केंद्र बनने के अलावा भारत तेज़ी से आधुनिक चिकित्सा तकनीकों को अपना भी रहा है, ताकि लोगों का जीवन बेहतर बनाया जा सके। आधुनिक जांच सुविधाओं, शरीर की अंदरूनी तस्वीर लेने वाली मशीनों, शरीर में लगाए जाने वाले चिकित्सा उपकरणों, गहन चिकित्सा की मशीनों और डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं को किफायती दर पर उपलब्ध कराने से मरीज़ों पर इलाज का आर्थिक बोझ कम होता है। साथ ही इलाज की गुणवत्ता और समय पर इलाज मिलने में भी सुधार होता है। देश में ही चिकित्सा उपकरण बनने से विदेशों से आयात पर निर्भरता घटती है, आपूर्ति व्यवस्था मज़बूत होती है और लागत कम करने के अवसर बढ़ते हैं।
भारत का विश्व स्तर पर पहचान बना चुका दवा उद्योग, मजबूत इंजीनियरिंग क्षमता, तेजी से फैलता डिजिटल ढांचा, तेजी से बढ़ता नए उद्यमों का क्षेत्र और कुशल मानव संसाधन अगली पीढ़ी की चिकित्सा तकनीक विकसित करने के लिए मजबूत आधार प्रदान करते हैं। कृत्रिम बुद्धिमत्ता, चिकित्सा उपकरण के रूप में इस्तेमाल होने वाले सॉफ्टवेयर (एसएमडी), इंटरनेट से जुड़े चिकित्सा उपकरण, रोबोट आधारित तकनीक और दूर से जांच जैसी नई तकनीकों में भारत के पास देश और दुनिया की स्वास्थ्य ज़रूरतों के लिए नए समाधान विकसित करने के बड़े अवसर हैं।
दुनिया के स्तर पर प्रतिस्पर्धी चिकित्सा तकनीक क्षेत्र तैयार करने के लिए सरकार, उद्योग, शिक्षण संस्थानों, स्वास्थ्य सेवा देने वालों, नए उद्यमों और निवेशकों के बीच करीबी सहयोग ज़रूरी है। जब प्रयोगशालाओं में तैयार विचार आसानी से कारखानों तक और वहां से मरीजों तक पहुंचते हैं, तभी नए आविष्कारों को वास्तविक लाभ में बदला जा सकता है। सरकार ऐसी स्थिर और पारदर्शी नीतियां बनाने के लिए प्रतिबद्ध है, जिनसे शोधए निवेशए तकनीकी साझेदारी और कारोबार करना आसान हो।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत लगातार एक आत्मनिर्भर चिकित्सा तकनीक व्यवस्था तैयार कर रहा है। इसका उद्देश्य केवल भारत में चिकित्सा उपकरण बनाना नहीं है, बल्कि हर नागरिक को समय पर अच्छी और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करानाए देश की स्वास्थ्य सुरक्षा को मजबूत करना और बेहतर स्वास्थ्य के लिए भारत को दुनिया के एक भरोसेमंद साझेदार के रूप में स्थापित करना है।
(लेखक भारत सरकार में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री तथा रसायन एवं उर्वरक मंत्री हैं)

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