भारत में मानसून में घूमने वाले स्थान

भारत में मानसून में घूमने वाले स्थाननसून में उमस से बचना है तो उन जगहों पर निकल जाओ जहां तापमान 25 डिग्री सेल्सियस से कम रहता है, दिन ठंडे और सुबह व शाम शांत रहते हैं, साथ ही हल्का सा स्वेटर पहनने का मन करता है। माउंटआबू राजस्थान का एकमात्र हिल स्टेशन है, जिसे मानसून की बारिश, धुंध व हरियाली ढक देती हैं, ऐसे में माउंटआबू का चरित्र ही बदल जाता है। मौसम की ठंडक आपको आमंत्रित करती है कि आप अचलगढ़ किले के खंडहरों में घूमें, नक्की झील में नौका विहार करें और पहाड़ों के ऊपर तैरते हुए बादलों को देखें या ऐतिहासिक स्थलों जैसे दिलवारा मंदिरों के दर्शन करें। अगर आसमान साफ हो तो सनसेट पॉइंट बारिश से धुले लैंडस्केप का नज़ारा प्रदान करता है, जबकि घुमावदार सड़कें और जंगल की ढलानें यात्रा के अनुभव में चार चांद लगा देती हैं। मानसून में माउंटआबू का तापमान 22.9 व 27.5 डिग्री सेल्सियस के बीच में रहता है और रात में 17.4 डिग्री सेल्सियस तक भी गिर जाता है यानी औसत तापमान 19 व 25 डिग्री सेल्सियस के बीच में रहता है।
चिकमंगलूर, कर्नाटक में जब मानसून की बारिश कॉफी एस्टेट्स व पश्चिमी घाटों की पहाड़ियों को हरियाली व कोहरे से ढक देती है और हेब्बे, झारी व कल्लाथिगिरी जैसे झरने जी उठते हैं, तो जीवन जीने का मन करने लगता है। किसी वर्किंग कॉफी एस्टेट पर ठहरना, सुबह उठते ही ताज़ी ब्रू की गई मलनाड कॉफी पीना, बाबा बुदनगिरी पहाड़ियों में ड्राइव करते हुए दिन गुज़ारना, हिरेकोलाले झील पर रुकना या झरनों को विजिट करना। बारिश के बीच में स्थानीय व्यंजनों जैसे अक्की रोटी, कदुबू व बांस के शोरबे (तरी) का आनंद लेना। अपने कार्यक्रम को लचीला रखना। हालांकि मानसून ट्रेकिंग रूट्स को फिसलन भरा व घुमावदार घाट सड़कों पर रोशनी कम कर देता है, लेकिन इससे मस्त ड्राइव व धीमी दोपहर बेहतर बन जाती हैं महत्वाकांक्षी कार्यक्रम की तुलना में। तापमान 18 डिग्री सेल्सियस से 22 डिग्री सेल्सियस रहता है और रातें अच्छी खासी ठंडी हो जाती हैं।
हालांकि मई-जून की तुलना में नैनीताल, उत्तराखंड जुलाई में अधिक शांत रहता है, लेकिन जुलाई-अगस्त भी इस शहर को विज़िट करने के लिए अच्छे हैं। अगर मैं अपना अनुभव शेयर करूं तो हरी पहाड़ियों से घिरी सुंदर झील, शांत पुराने कॉटेज व बाज़ार, वाकिंग ट्रैक्स का जाल, बोटिंग, प्राचीन मंदिरों व हेरिटेज बिल्डिंग्स तक सेलिंग... इस झील नगर में मेरे लिए देखने व करने को बहुत कुछ था। हालांकि सफर की थकान के कारण मैं शाम के समय अपने होटल के कमरे में पहुंचते ही गहरी नींद में सो गया था, लेकिन मेरी आंखें पौ फटने से पहले ही खुल गई थीं और मैं मन ही मन में दिनभर का कार्यक्रम बनाने की सोच ही रहा था कि मेरी निगाह अपने ट्रेकिंग शूज पर पड़ी। अब निर्णय लेना कठिन न रह गया था। मैंने टिफ़िन टॉप से उगते सूरज को देखने का मन बना लिया। मैं हॉर्स राइडिंग करता हुआ भी टिफिन टॉप जा सकता था, जोकि नैनीताल के केंद्र से लगभग 4 किमी के फासले पर है, लेकिन ट्रेकिंग का अपना ही आनंद है। सुबह के 6 बज रहे होंगे जब मैं टिफिन टॉप पर पहुंचा। उस दिन मौसम साफ था। पहाड़ों के पीछे से सूरज धीरे-धीरे ‘उग’ रहा था, हिमालय की बर्फीली चोटियों पर उसकी नर्म धूप पड़ने लगी थी। मेरे दिल के जज़्बात मेरे मुंह पर आ ही गये, ‘उफ़! तौबा! इतने अधिक प्राकृतिक सौन्दर्य को मैं शब्दों में कैसे व्यक्त कर पाऊंगा?’ मेरे पास शब्द न थे, लेकिन मैं इतना अवश्य कहूंगा कि अगर आपने टिफिन टॉप से उगते हुए सूरज का नज़ारा नहीं किया है, तो प्रकृति के सबसे सुंदर स्थल के आपने दर्शन ही नहीं किये हैं। मन कर रहा था कि समय ठहर जाये और मैं इस नज़ारे को देखता ही रहूं, लेकिन वक्त भी कभी किसी के लिए रुका है।  मानसून में तमिलनाडु की नीलगिरि पहाड़ियों में स्थित ऊटी हिल स्टेशन भी देखने दिखाने लायक है। ऊटी में दोनों दक्षिण-पश्चिम व उत्तर-पूर्व मानसूनों से भारी वर्षा होती है, जिससे यहां का तापमान कभी भी बहुत अधिक नहीं होता है। ऊटी में आज तक रिकॉर्ड किया गया अधिकतम तापमान 29.4 डिग्री सेल्सियस है, 30 अप्रैल 2024। ऊटी झील के पास स्थित बोट हाउस नौका विहार का अवसर प्रदान करता है, इसलिए पर्यटकों के लिए आकर्षण का मुख्य केंद्र है। 1842 में बना गवर्नमेंट बोटैनिकल गार्डन में जहां पौधों की अनेक देशज व विदेशी प्रजातियां हैं, वहीं एलक हिल की ढलान पर बने रोज़ गार्डन में गुलाबों की 20,000 से अधिक वैरायटी हैं। यह भारत का सबसे बड़ा रोज़ गार्डन है। झील के किनारे ही डियर पार्क भी है। -इमेज रिफ्लेक्शन सेंटर 

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