सिंदूर टीके नींबू का स्वाद

मैं ये मानता हूँ कि जब जागो तभी सवेरा। इसी उक्ति पर विश्वास करते हुए आगे बढ़ रहा हूँ। मेरा हर काम उल्टा है। मेरे हर काम को लोग कबीरदास की कहावत से जोड़ते हैं। कबीरदास की उल्टीवाणी पहले खानी फिर नहानी। मैं दोपहर एमें भी उठता हूं। तो उसको सुबह ही मान लेता हूं। और यकीन जानिए दस-बीस साल से मेरा जीवण कुछ इसी ढ़ेर्रे पर चल रहा है। और टनाटन हूँ। मुझे कुछ ना हुआ। साबुत और खुश हूँ। कहीं कुछ गड़बड़ नहीं है। सबकुछ ठीक-ठाक चल रहा है। एक दिन रेजर, क्रीम, ब्रश लेकर दाढ़ी बनाने के लिए बाथरूम में घुसा। पत्नी ने फट से टोक दिया क्या करते हो। शनिवार को भला दाढ़ी क्यों बना रहे हो। नहीं बनाना चाहिए। 
मैं मुस्कुराया बोला बताओ आखिर ऐसा क्यों है कि शनिवार को दाढ़ी नहीं बनवाना चाहिए। ऐसे ही जिसके दो बेटे हों। उसको तो बिल्कुल भी नहीं बनवानी चाहिए। शनिवार को दाढ़ी बाल नहीं बनवाना चाहिए। आदमी भले ही भालू बना रहे। लेकिन शनिवार को दाढ़ी और बाल ना बनवाए। सरकार ने परिवार नियोजन करने को कह रख है। और मैं देश का एक जिम्मेवार नागरिक हूँ। सरकारी आदेश को मानते हुए मुझे चलना चाहिए। नहीं तो दो बेटे और कर लेता। पत्नी भून-भूनाकर रह गई। एक दिन रात को कहीं पार्टी में जा रहे थे। आगे से बिल्ली ने रास्ता काट दिया। और मेरे दोस्त ने गाड़ी रोक दी।  मैंने पूछा गाड़ी क्यों रोक दी। बोला देखा नहीं आगे से बिल्ली ने रास्ता काट दिया है। आगे बढ़े और कोई दुर्घटना हो गई तो। मैं दोस्त से बोला लाओ गाड़ी की चाभी दो मैं चलाता हूँ।  
मैंने गाड़ी की चाभी ले ली और खुद चलाने को हुआ। दोस्त बोला गाड़ी मत चलाओ। तुम चलाओगे और मैं चलाऊँगा क्या दोनों अलग-अलग बातें हैं। मुझे कुछ विशेष छूट मिली हुई है। मैं सतमासु बच्चा हूँ। सतमासुओं को छूट रहती है। अच्छा! दोस्त क चेहरा खिल गया था। फिर लगा नहीं दोस्त को अंधविश्वास में रखना ठीक नहीं है। सो समझाया। 
मैंने उसका भ्रम दूर किया। तुमने तो सड़क पर सैंकड़ों कुत्ते, बिल्लियों को मरा हुआ और पड़ा हुआ देखा होगा। अगर ये इतने मनहूस या शक्तिशाली होते तो गाड़ी को कुछ होना था लेकिन उनकी ताकत उनके जितनी ही है। लिहाजा सड़क पर गाड़ियों की जगह कुत्ते-बिल्ली निपट जाते हैं। इसलिए शक्तिशाली आदमी है। कुत्ता-बिल्ली नहीं। एक दिन सड़क से गुजर रहा था। बेटा भी साथ था। बेटा अचानक से चोखा। बोला पापा पैर आगे मत देना, पैर आगे मत देना। मैंने उससे पूछा सड़क तो खाली है। फिर ऐसा क्यों कह रहे हो। आप गौर से देखिए पापा सड़क पर नींबू-मिर्च वो भी सिंदूर टीका हुआ पड़ा है। 
किसी ने जादू टोना करके फेंका होगा। हमारा कुछ अनिष्ट हो जाएगा। मैंने सिंदूर टीके नींबू-मिर्च को उठाया और चुपचाप ले जाकर अपने फार्म में फेंक दिया। बेटा कहता रहा पापा इसको फेंक दीजिए। किसी का कुछ नजर-गुजर किया हुआ है। जादू-टोना ज़रूर किया हुआ है। एक साल बाद देखा जहां नींबू मिर्च फेंका था। वहां से हरे मिर्च निकल रहें हैं। उसके और एक साल बाद छोटे-छोटे नींबू भी उगने लगे थे। मैं सोच रहा था कि जादू-टोना किए हुए चीज से जीवण कैसे निकल सकता है। पत्नी को ये बात ना बताई थी। अब जब भी नींबू की दरकार होती है। अपने फार्म से तोड़ लेता हूं।  इधर नींबू के आचार का आनंद ले रहा हूँ। सलाद में उसी टीके हुए नींबू और मिर्च का सलाद खाता हूँ। भुट्टे पर टीके हुए नमक, मिर्च और नींबू लगाकर खाता ह़ूँ। और ईश्वर की दुआ से पहले से भी ज्यादा तंदरूस्त हूँ। एक दिन मेरा भाई एक आदमी से उलझा हुआ था। कारण पूछा तो पता चला उसने कुछ पैसे उधारी में लिए हैं।  मैंने भाई से पुछा इसका बकाया क्यों नहीं लौटाते। भाई दो बार पुछने पर भी कुछ ना बोला। देनदार बोला। आपके भाई कह रहें हैं कि आज बृहस्पतिवार है। सो आज ना देंगें। 
क्यों बृहस्पतिवार को पैसे देने से क्या होता है। बृहस्पतिवार को लोग नित्यकर्म नहीं करते। बृहस्पतिवार को खाना नहीं खाते। बृहस्पतिवार को ज़रूरी काम नहीं निपटाते। जब सारे काम बृहस्पतिवार को करते हैं तो बृहस्पतिवार को पैसा क्यों नहीं लेते-देते। भईया बृहस्पतिवार को पैसे किसी को नहीं देना चाहिए। इससे लक्ष्मी चली जाती है। कुछ नहीं होता है। ये सब कहने की बातें हैं।
-मेघदूत मार्केट फुसरो, बोकारो झारखंड 
पिन 829144 

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